भूमिदाता को 35 साल बाद भी नहीं मिली नौकरी
Updated at : 31 May 2016 5:12 AM (IST)
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गोरौल : लगभग 35 वर्ष पूर्व लघु जल संसाधन विभाग द्वारा जमीन का अधिग्रहण चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी के पद पर नियुक्त करने के आश्वासन पर लिया गया, लेकिन आज तक न तो नौकरी मिली और न ही मुआवजे की राशि ही मिली. मालूम हो कि भगवानपुर प्रखंड के करहरी गांव निवासी राजू कुमार मिश्रा के […]
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गोरौल : लगभग 35 वर्ष पूर्व लघु जल संसाधन विभाग द्वारा जमीन का अधिग्रहण चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी के पद पर नियुक्त करने के आश्वासन पर लिया गया, लेकिन आज तक न तो नौकरी मिली और न ही मुआवजे की राशि ही मिली. मालूम हो कि भगवानपुर प्रखंड के करहरी गांव निवासी राजू कुमार मिश्रा के पिता ने अपनी साढ़े तीन कट्ठा जमीन गांव में स्थापित होने वाली उद्वह सिंचाई योजना के लिए सरकार को वर्ष 1982 में ही दी थी.
मुआवजा नहीं लेने पर देनी थी विभाग में नौकरी : जमीन अधिग्रहण करने के समय लघु जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने श्री मिश्रा को बताया कि यदि वह जमीन का मुआवजा राशि नहीं लेंगे, तो एक आदमी को विभाग में चतुर्थ वर्गीय श्रेणी में नौकरी दी जायेगी. मिले आश्वासन पर विश्वास कर श्री मिश्रा ने अपनी पुश्तैनी जमीन साढ़े तीन कट्ठा विभाग को दे दी. जमीन पर योजना भी कार्यान्वित हो गयी, लेकिन राजू को आज तक नौकरी नहीं मिला.
अखबार बेच कर अपना जीवन यापन करने वाले राजू बताते हैं कि उनके पास उतनी ही जमीन थी, जो समय पर काम आती. वो जमीन भी अब नहीं रही. विभाग के अधिकारी भी अपने वादे से मुकर गये, जिस कारण राजू को नौकरी नहीं मिल सकी.
नौकरी के लिए दरवाजा खटखटा रहा भूमिदाता :
विभाग द्वारा किया गया वादाखिलाफी के खिलाफ कई बड़े अधिकारियों का दरवाजा भी खटखटाया, लेकिन सभी अधिकारियों ने एक स्वर में कहा कि जमीन के बदले नौकरी देने का आश्वासन नहीं दिया गया था. आखिर प्रश्न यह उठता है कि विभाग द्वारा किस आधार पर जमीन ली गयी,
नौकरी नहीं तो मुआवजा का भुगतान तो होना चाहिए था. बिना मुआवजा दिये किसी की जमीन को हड़प लेना कहा का न्याय है. इस संबंध में दर्जनों बार मुख्यमंत्री, विभाग के प्रधान सचिव एवं जिला पदाधिकारी से न्याय के लिए गुहार लगायी, लेकिन आज तक उसे न्याय नहीं मिल सका. अब उसे थक कर कोर्ट की शरण में जाने को मजबूर होना पड़ रहा है.
उद्वह सिंचाई योजना के लिए सरकार को वर्ष 1982 में ही दी थी जमीन
मुआवजा राशि नहीं लेने पर विभाग में चतुर्थ वर्गीय नौकरी का मिला था आश्वासन
लघु जल संसाधन विभाग ने 35 वर्ष बाद भी भूमिदाता को नहीं दी नौकरी
विभाग के अधिकारी अपने वादे से मुकर रहे, जिससे नौकरी नहीं मिल रही
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