डाकघरों में कर्मियों का टोटा

Updated at : 08 Apr 2016 3:29 AM (IST)
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डाकघरों में कर्मियों का टोटा

वैशाली : केंद्र सरकार जहां ग्रामीण क्षेत्रों के डाकघर को हाइटेक कर ग्रामीणों को ऑनलाइन सुविधा देने का प्रयास कर रही है, वहीं विभागीय अधिकारियों की उदासीनता के कारण इसमें सफलता मिलती नहीं दिख रही है. प्रखंड मुख्यालय के पास स्थित डाकघर में लगभग 16 हजार खाताधारी हैं. यहां आरडी, पेंशनधारियों का खाता तथा टीडीएसी […]

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वैशाली : केंद्र सरकार जहां ग्रामीण क्षेत्रों के डाकघर को हाइटेक कर ग्रामीणों को ऑनलाइन सुविधा देने का प्रयास कर रही है, वहीं विभागीय अधिकारियों की उदासीनता के कारण इसमें सफलता मिलती नहीं दिख रही है. प्रखंड मुख्यालय के पास स्थित डाकघर में लगभग 16 हजार खाताधारी हैं.

यहां आरडी, पेंशनधारियों का खाता तथा टीडीएसी सहित कई तरह की स्कीम में 300-400 लेनदेन प्रतिदिन होता है. प्रखंड कार्यालय, अंचल कार्यालय, बाल विकास परियोजना कार्यालय, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तथा बैंक होने के कारण इनके कार्यों का भी दबाव बना रहता है. एक अवर डाकपाल तथा पोस्ट मैन के सहारे यह पोस्ट ऑफिस चल रहा है. कंप्यूटर के नाम पर भी मात्र एक सिस्टम दिया गया है.

आधुनिकीकरण के बाद काम पर पड़ा प्रतिकूल असर : डाकघरों के आधुनिकीकरण के बाद उसके कामकाज पर प्रतिकूल असर पड़ा है. पहले जब मैनुअल काम होता था, तब समय से काम हो जाता था, लेकिन आधुनिकीकरण के बाद लिंक फेल रहने और प्रशिक्षित कर्मियों की कमी के कारण यह बंद-सा रहता है. अवर डाकपाल रामलखन प्रसाद सिंह ने बताया कि सात जनवरी को विभाग द्वारा पोस्टऑफिस को हाइटेक करने के उद्देश्य से एक सिस्टम तो लगा दिया गया, मगर उसे चलाने के लिए कोई स्टाफ नहीं दिया गया. कंप्यूटर की जानकारी के अभाव में सिस्टम पर काम करना काफी मुश्किल हो रहा था. मगर मार्च से काम सुचारु रूप से चालू हो गया है.
सर्वर डाउन रहने के कारण होती है समस्या : डाकपाल ने यह भी बताया कि यहां एसटीएफवाइ का कनेक्शन लगा है. मगर उसका लिंक बराबर फेल रहता है. इस कारण हमलोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. कर्मियों की कमी का रोना रोते हुए अवर डाकपाल ने बताया कि यहां एक पोस्टमैन, एक पोस्टमास्टर, एक सहायक तथा एक मेल पैकर की भी आवश्यकता है, जिससे काम सुचारु रूप से किया जा सके.
कोर बैंकिंग की सूचना से खुश हुए लोग लिंक फेल रहने से हैं आक्रोशित
देसरी. अवर डाकघर देसरी को 21 दिसंबर, 2015 को कंप्यूटरीकृत कर कोर बैंकिंग सेवा के माध्यम से चालू किया गया था. इसको लेकर लोगों में हर्ष का माहौल था, पर अब कुछ दिनों के बाद ही यह हर्ष तब आक्रोश में बदल गया, जब ग्राहकों को हमेशा लिंक फेल रहने की सूचना देकर डाकघर से टरकाया जाने लगा.
प्रतिदिन लिंक फेल होने की वजह से ग्राहकों को डाकघर में घंटों बैठ कर वापस होना पड़ने लगा, तो उनलोगों में इस डाकघर के प्रति काफी रोष व्याप्त होने लगा. लोगों ने बताया कि मार्च में तो लगातार 15 दिनों तक लिंक फेल रहा. इस डाकघर से आरडी खाता 9000, बचत खाता 46000 एवं अन्य सभी खाता 93500 संचालित हैं.
केवल दो सहायकों की सहायता से चलाते हैं 18 डाकघर : लंबे समय से नियुक्ति नहीं होने के कारण डाक विभाग में कर्मचारियों का टोटा हो गया है. इस अवर डाकघर में पर्याप्त संख्या में कर्मचारी नहीं है. इसके अधीन 18 अन्य ब्रांच पोस्ट ऑफिस कार्यरत हैं. जिसके लिए मात्र दो क्लर्क एवं एक पोस्टमास्टर ही इस अवर डाकघर में कार्यरत हैं.
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