एक बार फिर वोटरों पर चढ़ने लगा चुनावी रंग

Updated at : 06 Jan 2016 1:39 AM (IST)
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एक बार फिर वोटरों पर चढ़ने लगा चुनावी रंग

हाजीपुर : मार्च-अप्रैल माह में होने वाले बिहार के पंचायत चुनाव को लेकर गांवों में धीरे-धीरे चुनावी फिजा बनने लगी है. ग्रामीण चौक-चौराहे से लेकर सुबह-शाम जलने वाले अलाव तक में चर्चा का बिंदू केवल चुनाव होता है. इसके साथ हीं चुनाव के संभावित प्रत्याशियों का लोगों से मिलना-जुलना और दुआ सलाम भी बढ गया […]

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हाजीपुर : मार्च-अप्रैल माह में होने वाले बिहार के पंचायत चुनाव को लेकर गांवों में धीरे-धीरे चुनावी फिजा बनने लगी है. ग्रामीण चौक-चौराहे से लेकर सुबह-शाम जलने वाले अलाव तक में चर्चा का बिंदू केवल चुनाव होता है. इसके साथ हीं चुनाव के संभावित प्रत्याशियों का लोगों से मिलना-जुलना और दुआ सलाम भी बढ गया हैं.
देर शाम तक हो रही बैठक : चुनावी चर्चा प्रारंभ होते हीं ग्रामीण क्षेत्र के वैसे दुकान जो दिन भी वीरान रहता था अब देर रात तक गुलजार रहने लगी है और चाय की दुकानों में धीरे-धीरे नास्ते के सामान भी सजाये जाने लगे हैं.
दुकानों पर बैठकर अपना समय काटने वाले लोगों के लिये यह अच्छा मौसम आया है ऐसा जानकार लोगों का मानना है. चौक पर रहने के कारण कोई न कोई संभावित उम्मीदवार आकर न केवल दुआ-सलाम करता है बल्कि चाय और नास्ते के बारे में भी पूछ लेता है.
छोटी-सी घटना पर भी पहुंच जाते हैं दर्जनों लोग : चुनावी मौसम आते हीं ग्रामीण क्षेत्र में घटित होने वाले छोटी से छोटी घटना-दुर्घटना के बाद दर्जनों लोग जमा हो जाते है और अपनी सहानुभुति जताते हैं. इस दौरान उनकी इच्छा केवल पीड़ित व्यक्ति से संपर्क मात्र होता है और वे अपना चेहरा दिखाने के साथ हीं आवश्यकता होने पर कुछ आर्थिक सहायता भी प्रदान करते हैं.
बनने लगी अष्टयाम और यज्ञ की योजना : चुनाव का मौसम आते हीं ग्रामीण क्षेत्रों में जिस गति से सामाजिक कार्यकर्ताओं की बाढ आयी है उसी गति धार्मिक कार्यों में रुची रखने वालों की भी बाढ आ गयी है. मौसम के अनुसार धार्मिक कार्य कर धन और यश का भागी बनने वाले लोग जगह-जगह सक्रिय हो गये हैं और अष्टयाम और यज्ञ की योजना बना रहे हैं. इस योजना का लक्ष्य ऐसे लोगों से चंदा उगाहना होता है जो चुनाव में उम्मीदवार होना चाहते हैं या तैयारी कर रहे हैं.
आरक्षण की स्थिति का ले रहे जायजा : पंचायत चुनाव में उम्मीदवारी की चाह रखने वाले लोग अपने निर्वाचन क्षेत्र के आरक्षण की स्थिति का जायजा ले रहे हैं. जैसे हीं आरक्षण की स्थिति स्पष्ट होगा वैसे हीं वे अपने उम्मीदवारी की घोषणा कर देंगे. आरक्षण की स्थिति को लेकर कायम उहापोह के कारण लोग खुलकर कहीं चुनाव के संबंध में चर्चा नहीं कर रहे हैं. कहीं ऐसा न हो कि वे अपने उम्मीदवारी की घोषणा कर दें और क्षेत्र आरक्षित हो जाये तब क्या होगा.
सामान्य प्रत्याशियों के लिये चिंता का सबब : विभिन्न पदों पर निर्वाचित वर्तमान सामान्य पंचायत प्रतिनिधियों के लिये चिंता का विषय यह है कि यदि उनका क्षेत्र आरक्षित हो गया तब वे क्या करेंगे.
आरक्षित श्रेणी के जन प्रतिनिधियों का क्षेत्र यदि सामान्य हो जाता है तब भी वे अपनी उम्मीदवारी दे सकते हैं लेकिन सामान्य श्रेणी के प्रतिनिधियों का क्या होगा. उसी तरह यदि सामान्य हो जाने पर महिला प्रत्याशी भी अपनी उम्मीदवारी दे सकते हैं लेकिन सामान्य महिला हो जाने पर सामान्य पुरुष वंचित हो जायेंगे. इसलिए हर कोई देखो और प्रतीक्षा करो की नीति पर चल रहा है.
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