विभन्नि मांगों को लेकर अराजपत्रित कर्मियों ने दिया धरना

Updated at :02 Sep 2016 12:00 AM
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विभन्नि मांगों को लेकर अराजपत्रित कर्मियों ने दिया धरना

विभिन्न मांगों को लेकर अराजपत्रित कर्मियों ने दिया धरना फोटो- 2कैप्सन- धरना पर बैठे अराजपत्रित संघ के सदस्यसुपौल. बिहार राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के आह्वान पर संघ के जिला इकाई द्वारा शुक्रवार को समाहरणालय द्वार पर धरना सभा का आयोजन किया गया. केंद्रीय ट्रेड यूनियन, सेवा संघों के 12 सूत्री व अखिल भारतीय राज्य सरकारी […]

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विभिन्न मांगों को लेकर अराजपत्रित कर्मियों ने दिया धरना फोटो- 2कैप्सन- धरना पर बैठे अराजपत्रित संघ के सदस्यसुपौल. बिहार राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के आह्वान पर संघ के जिला इकाई द्वारा शुक्रवार को समाहरणालय द्वार पर धरना सभा का आयोजन किया गया. केंद्रीय ट्रेड यूनियन, सेवा संघों के 12 सूत्री व अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के पांच सूत्री मांगों को लेकर बिहार राज्य अराजपत्रित महासंघ के जिलाध्यक्ष दिलीप ठाकुर की अध्यक्षता में आयोजित धरना को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि वर्ष 1991 से सरकार द्वारा आर्थिक सुधार के नाम पर अपनायी गयी नव उदारवादी नीतियों का दुष्परिणाम लोगों को भुगतना पड़ रहा है. कहा कि सरकार की नीति अमीरों को राहत व गरीबों को आफत में डाल दिया है. एक तरफ जहां युवा वर्ग बेरोजगारी की संकट झेल रहे हैं. वहीं किसान आत्महत्या करने पर विवश हो रही है. आये दिन महंगाई चरम पर है. जिस कारण आम आवाम की क्रय शक्ति क्षीण हो चुकी है. सार्वजनिक क्षेत्र को या तो बेचा जा रहा है. या फिर बंद पड़ा हुआ है. श्रम सुधार के नाम पर पूर्व से मिल रही सुविधाओं को बंद कर मालिकाना बनाया जा रहा है. साथ ही बैंक एवं वित्तीय संस्थानों से देशी व विदेशी इजारेदारों एवं कॉरपोरेट घरानों को बड़े पैमाने पर मनमाने तरीके से ऋण करवा उसे एनपीए में डालने की साजिश रची जा रही है. वक्ताओं ने कहा कि ठेका, अनुबंध, नियत वेतन, मानदेय व प्रोत्साहन राशि पर नियुक्त कर युवाओं का आर्थिक व मानसिक शोषण किया जा रहा है. वहीं उक्त कर्मियों का हकमारी कर कॉरपोरेट घराने को विभिन्न टैक्स में भारी भरकम छूट देकर लाभ पहुंचाने का कार्य जारी है. जबकि रक्षा के क्षेत्र में सौ फीसदी विदेशी पूंजी निवेश किये जाने से देश की सुरक्षा पर खतरा उत्पन्न हो जायेगा. वक्ताओं ने कहा कि अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ द्वारा सातवां वेतन आयोग की कर्मचारी विरोधी अनुशंसाओं में आवश्यक सुधार कर सरकार कर्मियों का न्यूनतम वेतन 26 हजार करें. साथ ही नई पेंशन नीति को बंद कर नये एवं पुराने सभी कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना का लाभ उपलब्ध करवाये. सीडी सिंह के संचालन में आयोजित धरना सभा में सूर्य नारायण राम, अमरेंद्र झा, रवि शंकर मिश्र, मो सफीक, किसान सलाहकार संघ के जिलाध्यक्ष सचिन कुमार सिंह, मो आसिफ इकबाल, भवेश कुमार भारती, कृष्ण कुमार, देव नाथ चौधरी, नदीम इकबाल सहित भारी संख्या में आंगनबाड़ी सेविका व अन्य उपस्थित थे. ट्रेड यूनियन व सेवा संघों की 12 सूत्री मांग1. मंहगाई पर रोक लगाओ2. बेरोजगारी पर रोक लगाने सहित रिक्त पदों पर नियमित नियुक्ति व नियुक्ति पर लगे रोक को वापस लेने3. सामाजिक सुरक्षा स्कीम लागू करने,4. स्कीम वर्करों का भयंकर शोषण व दोहन बंद करने,5. भूमि अधिग्रहण अध्यादेश वापस लेने6. खेत मजदूर सहित असंगठित मजदूरों के पक्ष में सार्वभौम सामाजिक सुरक्षा लागू करने,7. रक्षा, रेल, बीमा एवं पेंशन में विदेशी पूंजी निवेश बंद करने,8. सार्वजनिक प्रतिष्ठानों एवं वित्तीय संस्थानों में एफडीआई बंद करने,9. ठेकाकरण पर रोक व समान काम के लिए समान वेतन भत्ता तथा बारहमासी कामों के लिए नियमित नियुक्ति करने,10. न्यूनतम मजदूरी 15 हजार मासिक करने,11. न्यूनतम पेंशन तीन हजार रुपये सहित बोनस व पीएफ का लाभ देने तथा12 45 दिनों के भीतर यूनियन का पंजीयन करने शामिल हैं. अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ की ये मांगे1. नई पेंशन नीति समाप्त करने व सभी को पुरानी पेंशन उपलब्ध कराने,2. ठेका अनुबंध पर नियुक्त सभी कर्मियों को नियमित करने,3. स्वास्थ्य शिक्षा सहित सभी क्षेत्र का निजीकरण एवं आउट सोर्सिंग पर रोक लगाने,4. आयकर की सीमा में बढ़ोतरी करने तथा5. वेतन पुनरीक्षण के लिए सभी राज्यों को समुचित राशि आवंटित किये जाने शामिल हैं

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