दिन भर परेशान रहे मरीज नाराजगी. चिकित्सकों की हड़ताल से स्वास्थ्य सेवा चरमरायी

Updated at :21 Aug 2016 1:21 AM
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दिन भर परेशान रहे मरीज नाराजगी. चिकित्सकों की हड़ताल से स्वास्थ्य सेवा चरमरायी

आइएमए और भाषा के राज्यव्यापी आह्वान पर शनिवार को जिले में स्वास्थ्य सेवा पूरी तरह ठप रही. चिकित्सकों के इस हड़ताल के कारण मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा. हालांकि जिले भर से हड़ताल के दौरान किसी अनहोनी की कोई सूचना नहीं मिली. सुपौल : आइएमए और भाषा के राज्यव्यापी आह्वान पर शनिवार […]

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आइएमए और भाषा के राज्यव्यापी आह्वान पर शनिवार को जिले में स्वास्थ्य सेवा पूरी तरह ठप रही. चिकित्सकों के इस हड़ताल के कारण मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा. हालांकि जिले भर से हड़ताल के दौरान किसी अनहोनी की कोई सूचना नहीं मिली.

सुपौल : आइएमए और भाषा के राज्यव्यापी आह्वान पर शनिवार को जिले में स्वास्थ्य सेवा पूरी तरह ठप रही. सभी सरकारी एवं गैर सरकारी अस्पताल एवं निजी क्लिनिकों में दिन भर ताला लटकता रहा. हालांकि सदर अस्पताल में इमरजेंसी सेवा मरीजों को उपलब्ध करवाया जा रहा था. चिकित्सकों के इस हड़ताल के कारण मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा. हालांकि जिले भर से इस हड़ताल के दौरान किसी अनहोनी की कोई सूचना नहीं मिली.
आइएमए बिहार एवं बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार की दोपहर सदर अस्पताल स्थित नशा मुक्ति केंद्र में चिकित्सकों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गयी.बैठक की अध्यक्षता करते हुए आइएमए के सचिव डॉ बीके यादव ने कहा कि बिहार में चिकित्सक एवं स्वास्थ्य कर्मियों पर लगातार हमले हो रहे हैं जो चिंता का विषय है. मोतीहारी के चिकित्सक डॉ एसबी सिंह की दिन दहाड़े अपराधियों ने हत्या कर दी.
भारी विरोध के बावजूद बिहार पुलिस हत्यारों को गिरफ्तार या इस पूरे प्रकरण के उदभेदन में असफल साबित हुई है.आइएमए के अध्यक्ष डॉ सीके प्रसाद ने कहा कि अपनी सुरक्षा के लिए चिकित्सकों को हड़ताल करना पड़ रहा है जो काफी शर्मनाक स्थिति है.राज्य भर में बेलगाम अपराधियों के निशाने पर विशेष रूप से चिकित्सक आ गये हैं. दिनोंदिन चिकित्सकों पर बढ़ रहे हमले के मामले को देखते हुए राज्य सरकार अविलंब सरकारी और गैर सरकारी अस्पतालों में सेवा दे रहे चिकित्सकों की सुरक्षा सुनिश्चित करे अन्यथा बिहार के सभी चिकित्सक एकजुट हो कर निर्णायक आंदोलन के बाध्य होंगे.
बैठक के दौरान चिकित्सा सेवा से जुड़ी अन्य परेशानियों पर भी बिंदुवार चर्चा की गयी.संघ ने एक स्वर में मांग किया कि मोतीहारी के दिबंगत चिकित्सक डॉ एसबी सिंह के परिजनों को सरकारी नौकरी और 25 लाख रुपये का मुआवजा अविलंब दिया जाय. बैठक के दौरान मुख्य रूप से डॉ जे लाल, सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ एनके चौधरी, डॉ कन्हैया प्रसाद सिंह, डॉ अरुण कुमार वर्मा, डॉ मिहिर कुमार वर्मा,डॉ बीएन भारती, डॉ रीता सिंह, डॉ नूतन वर्मा, डॉ रीता महतो, डॉ जितेंद्र कुमार सिंह, डॉ अजीत श्रीवास्तव, डॉ शांतिभूषण, डॉ संजय मिश्र, डॉ रौशन सिंह आदि मुख्य रूप से उपस्थित थे.
फरजी चिकित्सकों का पौंबारह :
चिकित्सकों के हड़ताल का सबसे अधिक फायदा शहर में संचालित दर्जनों निजी क्लिनिक खोल कर बैठे फर्जी चिकित्सकों को मिला.हड़ताल के कारण मरीज जब इलाज के लिए इधर-उधर भटक रहे थे तो फर्जी चिकित्सकों के बिचौलियों ने जम कर इसका लाभ उठाया और ऐसे मरीजों को बहला-फुसला कर फर्जी चिकित्सक के पास ले गये.तत्काल फायदा के लिए फर्जी चिकित्सकों के इस क्लिनिक पर दूर दराज से आये मरीजों का जम कर शोषण किया गया.हड़ताल में रिक्शा चालकों ने भी जम कर लाभ कमाया.चिकित्सक की खोज में दिन भर मरीजों को इस क्लिनिक से उस क्लिनिक ले जा कर मनमाना भाड़ा वसूल किया.
निजी क्लिनिक भी रहा बंद
आइएमए और भाषा के संयुक्त आह्वान पर शनिवार को आहूत एक दिवसीय हड़ताल का जिले के निजी क्लिनिकों पर भी असर देखा गया.शनिवार को शहर के अधिकांश निजी क्लिनिक बंद रहे.सभी क्लिनिकों के मुख्य द्वार पर हड़ताल की सूचना चश्पा किया गया था.वहीं मुख्य द्वारा पर दिन भर ताला लटकता रहा.चिकित्सकों की इस हड़ताल के कारण मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा.कई निजी क्लिनिक के नियमित मरीज क्लिनिक के कंपाउंडर के पास इलाज के लिए चिरौरी करते देखे गये.हालांकि सदर अस्पताल में इमरजेंसी सेवा जारी रहने के कारण दूर-दराज से आये मरीजों को कुछ राहत मिली.लेकिन मामूली परेशानी से जूझ रहे मरीजों को उपचार से वंचित रहना पड़ा.
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