सात वर्षों से है रेल परिचालन ठप, यात्री हलकान(प्रभात पड़ताल)

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सात वर्षों से है रेल परिचालन ठप, यात्री हलकान(प्रभात पड़ताल) फोटो -09 से 15 तककैप्सन- सूना पड़ा रेलवे स्टेशन, गायब पटरी व प्रतिक्रिया देते लोग जगदीश कुमार, प्रतापगंज——————— पूर्व मध्य रेल के सहरसा- फारबिसगंज रेलखंड में राघोपुर व फारबिसगंज के बीच विगत करीब सात वर्षों से रेल परिचालन ठप पड़ा है.मेगा ब्लॉक की वजह से […]

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सात वर्षों से है रेल परिचालन ठप, यात्री हलकान(प्रभात पड़ताल) फोटो -09 से 15 तककैप्सन- सूना पड़ा रेलवे स्टेशन, गायब पटरी व प्रतिक्रिया देते लोग जगदीश कुमार, प्रतापगंज——————— पूर्व मध्य रेल के सहरसा- फारबिसगंज रेलखंड में राघोपुर व फारबिसगंज के बीच विगत करीब सात वर्षों से रेल परिचालन ठप पड़ा है.मेगा ब्लॉक की वजह से ट्रेनों का परिचालन बाधित रहने के कारण इस रेल खंड के यात्रियों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है.विगत 40 वर्षों से रेल सेवा की सुविधा प्राप्त स्थानीय नागरिकों को अब ट्रेन पकड़ने हेतु राघोपुर स्टेशन तक की दूरी तय करनी पड़ रही है.वहीं आमान परिवर्तन का कार्य काफी मंथर गति से चलने के कारण लोगों को जल्द इस समस्या से निजात मिलने की संभावना भी नहीं नजर आ रही है.ऐसे में स्थानीय लोगों की मुश्किलें काफी बढ़ गयी है.केंद्र में नयी सरकार बनने के साथ ही इस क्षेत्र के लोगों में यह उम्मीद बंधी थी कि इस रेलखंड में जारी आमान परिवर्तन के कार्य को त्वरित गति से पूरा किया जायेगा.लेकिन कार्य की गति में किसी प्रकार का बदलाव नजर नहीं आ रहा है.लोगों की उम्मीदों पर फिर रहा पानी 20 जनवरी 2012 को इस रेलखंड में आमान परिवर्तन हेतु मेगा ब्लॉक लिया गया.मेगा ब्लॉक के बाद स्थानीय लोगों में उम्मीद बंधी थी कि शीघ्र ही उन्हें देश के अन्य हिस्सों की तरह बड़ी रेल लाइन की बेहतर सुविधा नसीब होगी.लेकिन रेल परिचालन बंद होने के एक वर्ष तक किसी प्रकार का कार्य प्रारंभ नहीं हुआ.वहीं वर्तमान में कछुए की चाल से कार्य को अंजाम दिया जा रहा है.कार्य की शिथिलता के कारण अब लोगों के सपने मलिन होने लगे हैं.105 वर्ष पुराना जंक्शन है प्रतापगंज रेल के मामले में प्रतापगंज का काफी गौरवपूर्ण इतिहास रहा है.यह दीगर बात है कि कोसी की विभीषिका व भूकंप के चपेट में आने से कई बार इस रेल खंड में परिचालन बाधित हुआ है.गौरतलब है कि दरभंगा-फारबिसगंज रेल खंड के बीच अवस्थित प्रतापगंज स्टेशन को 1910 ई में जंक्शन का दर्जा प्राप्त हुआ था.यहां से फारबिसगंज, दरभंगा व भीमनगर के लिए ट्रेनों का परिचालन होता था.लेकिन इसी वर्ष कोसी की मुख्य धारा की चपेट में आ जाने से यह रेल खंड ध्वस्त हो गया.पुन: 65 वर्षों बाद पूर्व रेल मंत्री ललित नारायण मिश्र की पहल पर 02 अक्टूबर 1975 को इस रेलखंड में ट्रेनों का परिचालन प्रारंभ हुआ.लेकिन 33 वर्ष बाद इस रेल खंड को वर्ष 2008 में कुसहा त्रासदी के दौरान एक बार फिर तबाही झेलनी पड़ी और तब से आज तक इस रेल खंड में ट्रेनों का परिचालन बाधित है.कहते हैं स्थानीय लोग लंबी अवधि तक इस रेल खंड में ट्रेनों का परिचालन बाधित रहने के कारण स्थानीय लोगों में असंतोष बढ़ता जा रहा है.परिचालन ठप रहने से जहां यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.वहीं व्यवसाय भी प्रभावित हो रहा है.स्थानीय बड़े व्यवसायी व मर्चेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेंद्र डागा ने इस रेल खंड को क्षेत्र का लाइफ लाइन बताते हुए कहा कि लंबी अवधि तक परिचालन बाधित रखना क्षेत्र की जनता के साथ अन्याय है.उन्होंने कहा कि परिचालन बाधित रहने से व्यवसाय प्रभावित हो रहा है.जिससे अब यहां के व्यवसायी पलायन करने का मन बना रहे हैं. व्यवसायी गौरव कुमार उर्फ चिंटू पूवेर् ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि इस रेल खंड में आमान परिवर्तन व रेल परिचालन शीघ्र प्रारंभ नहीं किया गया तो चरणबद्ध आंदोलन का रास्ता इख्तियार किया जायेगा. प्रखंड प्रमुख रमेश प्रसाद यादव ने भी शीघ्र आमान परिवर्तन का कार्य पूरा कर ट्रेनों का परिचालन आरंभ करने की मांग करते हुए कहा कि लंबे अर्से से परिचालन बंद रहने से क्षेत्र की जनता का सब्र अब जवाब देने लगा है.कहा कि क्षेत्र के लोग अब इस समस्या के निदान हेतु आंदोलन का मूड बना रहे हैं. गंगसायर निवासी महेंद्र प्रसाद यादव ने भी ट्रेनों का परिचालन बंद रहने से होने वाली समस्या का इजहार किया.बताया कि परिचालन बाधित रहने के कारण ट्रेन पकड़ने के लिए राघोपुर तक का सफर तय करना पड़ता है. भवानीपुर दक्षिण पंचायत के प्रमोद राम कहते हैं कि ट्रेनों का परिचालन ठप रहने से सबसे ज्यादा गरीब तबके के लोगों को तकलीफ उठानी पड़ रही है.निजी वाहनों से यात्रा करना आर्थिक रूप से कठिन साबित होता है. मजदूर तेतर दास ने बताया कि क्षेत्र के 80 प्रतिशत मजदूर रोजगार के लिए दिल्ली, पंजाब आदि राज्यों के लिए पलायन करते हैं.लेकिन ट्रेन परिचालन बाधित रहने के कारण उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है.

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