चुकानी पड़ती है टोल टैक्स आक्रोश. जिलावासियों के लिए लक्ष्मण रेखा है टोल प्लाजा

Published at :23 Jul 2017 5:37 AM (IST)
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चुकानी पड़ती है टोल टैक्स आक्रोश. जिलावासियों के लिए लक्ष्मण रेखा है टोल प्लाजा

कोसी महासेतु पर बना टोल प्लाजा अब भी जिले वासियों के बीच एक लक्ष्मण रेखा बना हुआ है. जिसे पार करने के लिए कीमत चुकानी होती है. जिसका सबसे ज्यादा खामियाजा चार चक्का वाहन मालिकों को आर्थिक रूप से उठाना पड़ता है. सुपौल : जिलावासियों को भी अपने ही जिला में अपने रिश्तेदारों व निजी […]

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कोसी महासेतु पर बना टोल प्लाजा अब भी जिले वासियों के बीच एक लक्ष्मण रेखा बना हुआ है. जिसे पार करने के लिए कीमत चुकानी होती है. जिसका सबसे ज्यादा खामियाजा चार चक्का वाहन मालिकों को आर्थिक रूप से उठाना पड़ता है.

सुपौल : जिलावासियों को भी अपने ही जिला में अपने रिश्तेदारों व निजी कार्य से यदि मरौना व निर्मली चार चक्का वाहन से जाना पड़े तो आपको टोल टैक्स चुकाना ही पड़ेगा. यदि आपने आना-कानी की तो एनएचआई के गुर्गे आपकी खैर मकदम कर सकते हैं. यह सुपौल जिले की एक सच्चाई है. जिससे यहां के आम जन की भावना जुड़ी है. सदियों से कोसी नदी के कारण दो भागों में विभक्त जिला में जब एनएच 57 के बीच सनपतहा के समीप कोसी सड़क महासेतु का निर्माण हुआ तो जिले वासियों के चेहरे पर मुस्कान छा गयी कि सुपौल जिला मुख्यालय से कोसी नदी के कारण जिले से अलग-थलग पर चुके निर्मली अनुमंडल का सीधा संपर्क जिला मुख्यालय से स्थापित हो जायेगा.
लेकिन कोसी महासेतु पर बना टोल प्लाजा अब भी जिले वासियों के बीच एक लक्ष्मण रेखा बना हुआ है. जिसे पार करने के लिए जिला वासियों को भी कीमत चुकानी होती है. जिसका सबसे ज्यादा खामियाजा चार चक्का वाहन मालिकों को आर्थिक रूप से उठाना पड़ता है. जिसकी वजह से जिला वासियों का गुस्सा टोल प्लाजा के विरुद्ध पनपने लगा है. लोगों का टोल टैक्स को लेकर विरोध नहीं है. विरोध इस बात को लेकर है कि कम से कम जिला के चार चक्का वाहन टोल टैक्स क्यों दें. क्योंकि जिला मुख्यालय से निर्मली, मरौना प्रखंड समेत सरायगढ़ व किसनपुर का कुछ भाग का संपर्क इसी मार्ग से है.
लाइफ लाइन है कोसी महासेतु
एक जमाना था जब सुपौल जिला के लोगों को अपने ही जिले में निर्मली अनुमंडल के निर्मली, मरौना, कुनौली, डगमारा व अन्य स्थानों पर सड़क से जाने के लिए भारत-नेपाल सीमा स्थित कोसी बराज होते हुए जाना पड़ता था. अन्यथा इन स्थानों पर जाने के लिए लोगों के आवागमन का एक मात्र जरिया नाव ही था. ऐसे में लोगों को इन स्थलों पर जाने के लिए कई घंटे की दूरी तय करनी पड़ती थी. लेकिन रोड महासेतु बनने के बाद जिलेवासियों की दूरियां ही नहीं मिटी. बल्कि अपने ही जिले से सदियों से कटे निर्मली अनुमंडल की आबादी का संपर्क भी जिला मुख्यालय से सीधा जुड़ गया. लेकिन सनपतहा के पास बना टोल प्लाजा जिले के लोगों के बीच ही एक दीवार सा बना हुआ है.
सदियों से थी कोसी नदी पर एक पुल की दरकार
सदियों से सुपौल का हिस्सा रहा निर्मली अनुमंडल कोसी नदी की वजह से जिला मुख्यालय से कटा रहा. समय के साथ बहुत कुछ बदला लेकिन कोसी वासियों की तकदीर बदलने में कई दशक लग गये. बाद के समय में जब अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में केंद्र की सरकार बनी तो उन्होंने देश को जोड़ने के लिए ईस्ट-वेस्ट और नार्थ-साउथ कॉरिडोर की आधारशिला रखी. दो भागों में विभक्त मिथिला व सुपौल जिला भी जुड़ गया. सुपौल जिले के लिए एनएच 57 पर बना कोसी रोड महासेतु किसी वरदान से कम साबित नहीं हुआ.
टोल टैक्स से जुड़ा ऐसा कोई भी मामला मेरे संज्ञान में नहीं है. विशेष परिस्थिति में किसानों से जुड़ी कोई भी समस्याएं सामने आती है, तो उसके निदान का प्रयास किया जायेगा. जिससे किसी तरह की परेशानियों का सामकना जिले वासियों को नहीं करना पड़े.
बैद्यनाथ यादव, डीएम, सुपौल
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