अनंत चतुर्दशी व्रत से विष्णु लोक की होती है प्राप्ति : आचार्य
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 12 Sep 2019 3:54 AM
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दरौंदा : भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को अनंत चतुर्दशी मनाया जाता हैं. अनंत चतुर्दशी का व्रत गुरुवार को मनाया जायेगा. इस दिन भगवान श्री हरि विष्णु की पूजा होती है. इस दिन बप्पा का विसर्जन भी किया जाता है, ऐसे में अनंत चतुर्दशी का महत्व बढ़ जाता है. मान्यता है कि इस व्रत […]
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दरौंदा : भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को अनंत चतुर्दशी मनाया जाता हैं. अनंत चतुर्दशी का व्रत गुरुवार को मनाया जायेगा. इस दिन भगवान श्री हरि विष्णु की पूजा होती है. इस दिन बप्पा का विसर्जन भी किया जाता है, ऐसे में अनंत चतुर्दशी का महत्व बढ़ जाता है.
मान्यता है कि इस व्रत को 14 सालों तक लगातार करने पर विष्णु लोक की प्राप्ति होती है. खास बात यह है कि इस दिन गुरुवार का दिन है और गुरुवार भगवान विष्णु का दिन माना गया है और अनंत भगवान, भगवान विष्णु का ही स्वरूप है, जिसके कारण इस पर्व पर विशेष संयोग बन रहा है. अनन्त पूजा के बारे में भविष्य पुराण में भी वर्णन किया गया है. अनंत पूजा करने से पाप के क्षय और सुख की प्राप्ति तो होती ही है.
वहीं धन व पुत्र प्राप्ति की भी कामना पूरी होती है. पर्व के दौरान पुरुष दायें व स्त्रियां बायें हाथ में अनंत धारण करती हैं. अनंत राखी के समान रूई या रेशम के कुंकू रंग में रंगे धागे होते हैं और उनमें चौदह गांठे होती हैं. इन्हीं धागों से अनंत का निर्माण होता है, अग्नि पुराण वन में इसका विवरण भी है.
अनंत चतुर्दशी व्रत करने के ये हैं लाभ : आचार्य जितेंद्र नाथ पांडे बताते हैं कि अनंत चतुर्दशी व्रत का बहुत अधिक महत्व है. इस दिन व्रत करने से जातक को धन संबंधी सभी परेशानियां दूर होती है. भगवान विष्णु का पूजन किया जाता है. श्रद्धा पूर्वक व्रत करने वालों को सभी मनोकामनाओं को पूरा करने के साथ उसके संकट भी हरते हैं. भगवान कृष्ण के सलाह से पांडवों ने भी इस व्रत को किया था. इसे करने से दरिद्रता का नाश होता है.
सुबह जग कर स्नान करें, फिर कलश की स्थापना करें
अाचार्य श्री पांडेय ने बताया कि इस दिन व्रती को चाहिए कि सुबह जग कर स्नान करें उसके बाद कलश की स्थापना करें. कलश पर अष्टदल कमल के समान बने बर्तन में कुश से निर्मित अनंत की स्थापना की जाती है. इसके आगे कुमकुम, केसर या हल्दी से रंग कर बनाया हुआ कच्चे डोरे का चौदह गांठों वाला अनंत भी रखा जाता है.
गणेश चतुर्थी के दिन गणेश जी कि स्थापना की जाती है तो वहीं अनंत चतुर्दशी गणेश जी अपने घर वापस लौट जाते हैं. अनंत चतुर्दशी के दिन गणपति विसर्जन की परंपरा सबसे ज्यादा प्रचलित है.
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