अपराधियों पर नकेल नये एसपी के समक्ष बड़ी चुनौती
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :04 May 2018 5:27 AM (IST)
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सीतामढ़ी : छुटभैये अपराधियों व रंगदारों पर नकेल नये पुलिस कप्तान विकास बर्मन के लिए बड़ी चुनौती है. साथ ही आये दिन जिले में सोशल मीडिया पर सांप्रदायिक भावनाओं को ठेस पहुंचानी वाली टिप्पणी लिखकर सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाले तत्वों पर समय रहते कार्रवाई भी नये पुलिस कप्तान के लिए चुनौती के रूप में खड़ी […]
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सीतामढ़ी : छुटभैये अपराधियों व रंगदारों पर नकेल नये पुलिस कप्तान विकास बर्मन के लिए बड़ी चुनौती है. साथ ही आये दिन जिले में सोशल मीडिया पर सांप्रदायिक भावनाओं को ठेस पहुंचानी वाली टिप्पणी लिखकर सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाले तत्वों पर समय रहते कार्रवाई भी नये पुलिस कप्तान के लिए चुनौती के रूप में खड़ी है.
पड़ोसी देश नेपाल के सीमा से सटे होने के कारण जिले में आपराधिक वारदात को अंजाम देकर अपराधी एक दूसरे के देश में आसानी से छिप जाते हैं, जो पुलिस के लिए पकड़ना मुश्किल होता है. बिहार में शराबबंदी कानून लागू हुए तीन वर्ष बीत चुका है, लेकिन शराब के कारोबारियों व तस्करों की गतिविधि पर विराम नहीं लग सका है. प्राय: प्रतिदिन नेपाल से शराब की बड़ी खेप भारतीय सीमा में पहुंचायी जा रही है. भारत-नेपाल सीमा पर तैनात सशस्त्र सीमा बल(एसएसबी) तथा सीमावर्ती थानों की पुलिस द्वारा न सिर्फ शराब की बरामदगी की जा रही है, बल्कि कारोबारियों को भी दबोचा जा रहा है,
लेकिन कारोबारियों में न एसएसबी जवानों का खौफ दिख रहा है और न ही पुलिस का. आइजी स्तर से एसपी के माध्यम से जिले के थानेदारों से विभिन्न अपराध में सक्रिय गिरोहों पर शिकंजा कसने के उद्देश्य से सूची तलब की गयी थी, लेकिन अब तक थानेदार सूची तैयार नहीं कर पाये हैं.
पब्लिक की अब भी बनी है पुलिस से दूरी: आम लोगों में पुलिस की कार्यशैली के प्रति नाराजगी दूर नहीं हो पा रही है. चर्चा है कि मामूली काम के लिए थानों में बगैर नजराना सुनवाई नहीं होती. गुहार लगाने पर पुलिसकर्मियों की डांट तक खानी पड़ती है. वही सनहा दर्ज कराने तक में थाना का दौड़ लगाना पड़ता है. नये पुलिस अधीक्षक को पुलिस व पब्लिक के बीच की बढ़ती दूरी को नजदीक लाना भी बड़ी चुनौती होगी.
शहरी इलाके में पुलिस अधिकारियों की गश्ती की खास दरकार है.
अगर पुलिस अधिकारी भी अपनी कोठियों से निकलकर गश्ती टीम का नेतृत्व करें तो अपराधियों में भय पैदा होना स्वाभाविक है. पिछले कई वर्षों के भीतर पुलिसिंग के इस जरूरी सिस्टम का अभाव देखा गया है. जिला स्थापना के 46 वर्ष बीतने के बाद सीतामढ़ी जिला ने 45 एसपी को काम करते देखा है. इस दौरान कुछ ऐसे आइपीएस भी रहे हैं जिन्होंने अपनी कार्यशैली से यहां की जनता में अलग छाप छोड़ी है. मनोज नाथ, वी नारायणन, एमवी राव, एसएन प्रधान, डॉ परेश सक्सेना, अनुपमा एस निलेकर, कुंदन कृष्णन व राकेश राठी उस व्यवस्था के दौड़ में जाने पहचाने नाम थे जो स्वयं गश्ती को हैंडल करने के लिए पहचाने जाते थे. इसके बाद के दौड़ में अधिकारियों को कम ही शहर में देखा गया. इसके अलावा इंस्पेक्टर व थानेदारों को सप्ताह में तीन दिन गांव में बिताने के निर्देश का भी अनुपालन होता नहीं दिख रहा है.
सीमा पार से शराब की तस्करी
पर नहीं लग पा रही लगाम
तस्करों व शराब कारोबारियों
में पुलिस का खौफ नहीं
थानेदार नहीं तैयार कर पा
रहे अपराधियों की सूची
व्यवसायियों का विश्वास जीतना भी बड़ा काम
नये पुलिस कप्तान के कार्यभार संभालने के चार-पांच घंटा के बाद अपराधियों ने दो दवा दुकानदारों को निशाना बनाते हुए फायरिंग की. इससे व्यवसायियों में अभी दहशत का माहौल कायम है. आये दिन व्यवसायियों से रंगदारी मांगने की घटना होती रहती है. नये पुलिस कप्तान के टीम को व्यवसायियों का विश्वास जीतना भी कम चुनौती नहीं है. चार वर्ष अपराधियों ने रंगदारी के लिए शहर के प्रमुख दवा व्यवसायी यतींद्र खेतान की गोली मारकर हत्या कर दी थी. इसके बाद से भी कई व्यवसायियों को अपराधियों ने रंगदारी के लिए निशाना बनाया, जिसमें कुछ को जान भी गंवानी पड़ी, लेकिन दहशत कम नहीं हो रहा है. अब भी व्यवसायियों में डर कायम है.
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