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असमय गर्भाशय ऑपरेशन मुआवजा को लेकर नहीं पहुंच रही पीड़िता, सीएस ने अधिकारियों का वेतन रोका

Updated at : 23 Mar 2017 10:48 PM (IST)
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असमय गर्भाशय ऑपरेशन मुआवजा को लेकर नहीं पहुंच रही पीड़िता, सीएस ने अधिकारियों का वेतन रोका

शेखपुरा: राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत जिले में बड़े पैमाने पर हुए गर्भाशय घोटाले की पीड़िता से जुड़े मुआवजा योजना के लिए लाभुकों को जुटाने में विभाग को पसीना बहाना पड़ रहा है. मार्च के इस महीने में 28 शेष बचे हुए लाभूक महिलाओं का 14 लाख रुपये कहीं वापस न लौट जाए इसको […]

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शेखपुरा: राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत जिले में बड़े पैमाने पर हुए गर्भाशय घोटाले की पीड़िता से जुड़े मुआवजा योजना के लिए लाभुकों को जुटाने में विभाग को पसीना बहाना पड़ रहा है. मार्च के इस महीने में 28 शेष बचे हुए लाभूक महिलाओं का 14 लाख रुपये कहीं वापस न लौट जाए इसको लेकर सिविल सर्जन ने सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा प्रभारी एवं स्वास्थ्य प्रबंधकों पर विभागीय शिकंजा कस दिया है.

सिविल सर्जन ने बताया कि जिले में गर्भाशय घोटाले का मामला अभी न्यायालय में लंबित है लेकिन विभाग के द्वारा जिले के 46 महिलाओं को इस ऑपरेशन के दौरान पीड़ित मानते हुए 50 -50 हजार का मुआवजा भुगतान करने की कार्रवाई कर रही है. हालांकि पिछले 3 माह से चल रहे इस कार्रवाई में अब तक मात्र 18 लाभुक महिला ही उपस्थित हो सके है. जबकि 28 लाभुकों का अभी विभाग को इंतजार है. सिविल सर्जन डॉ. मृगेन्द्र प्रसाद सिंह ने बताया कि संबंधित प्रखंड के चिकित्सा अधिकारियों को कई बार लाभुक महिलाओं को उपस्थित कराने के लिए निर्देशित किया गया. लेकिन इस दिशा में कोई रुचि नहीं दिखाई गयी. नतीजतन जिले के सभी 6 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा प्रभारी एवं हेल्थ मैनेजरओं का वेतन पर रोक लगा दिया गया है.

क्या है गर्भाशय घोटाला का मामला

दरअसल, राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत चिन्हित लाभुकों को सरकार प्रतिवर्ष 30 हजार तक के इलाज के लिए विभाग के द्वारा बीमा कार्ड उपलब्ध कराया था. लेकिन इस योजना की आड़ में जिले के कई नर्सिंग होम ने उम्र सीमा के पहले ही अथवा अनचाहे तरीके से महिलाओं के गर्भाशय निकाल कर बड़े पैमाने पर अनियमितता को अंजाम दिया था. इस मामले में जांच के दौरान कई अस्पताल प्रबंधन को दोषी ठहराते हुए प्राथमिकी दर्ज करने की कार्यवाही की गयी थी. लेकिन यह मामला फिलहाल न्यायालय में लंबित है. इसी मामले को लेकर विभाग ने ऑपरेशन कराने वाले जिले के 46 महिलाओं को समय से पहले और अनचाहे ऑपरेशन कर गर्भाशय निकालने के मामले में पीड़ित घोषित करते हुए 50

नहीं पहुंच सके यह लाभुक
इंदू देवी खोरमरमपुर, टुन्नी देवी माफो, नीलम कुमारी हसनगंज, गीता देवी मखदुमपुर, प्रमिला देवी सुल्तानपुर, प्रमिला देवी देवले, सरस्वती देवी देवले, पर्वतीया देवी देवले, रीता देवी भिटठापर, मिनता देवी माफो, बसंती देवी कुरमुरी, कुंती देवी सादिकपुर, उमादेवी तेजाबीघा, प्रभादेवी भलुआ, किरण देवी चकंदरा, जयमंती देवी सोहदी, चंपादेवी तेजा बीघा, रीना देवी कसार, सकुंती देवी बेलछी, अंजू देवी धनौला, मासो देवी मणिपुर, उषा देवी फरपर पिंकी देवी रमजानपुर, सुनीता देवी बहुआरा, साबो देवी छठियारा, सविता सिझौडी, उरो देवी बहुआरा, प्रतिमा देवी भदौसी, काली देवी कोरमा.

क्या कहते हैं अधिकारी
उम्र से पहले और अनचाहे गर्भाशय निकालने के मामले में विभाग द्वारा चिन्हित पीड़ित महिलाओं को विभाग द्वारा निर्धारित मुआवजा का भुगतान पारदर्शिता के साथ किया जा रहा है जबकि अब तक 28 पीड़ित महिलाएं इस लाख के लिए विभाग के समक्ष उपस्थित नहीं हो सकती हैं इसके लिए सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों को सख्त निर्देश दिया गया है ताकि चालू वित्तीय वर्ष में ही इसका भुगतान सुनिश्चित हो सके. (डॉ.मृगेन्द्र प्रसाद सिंह, सिविल सर्जन शेखपुरा)

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