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अनुदान के लिए भटक रहे किसान

Updated at : 08 Dec 2017 4:57 AM (IST)
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अनुदान के लिए भटक रहे किसान

शिवहर : बिहार शताब्दी निजी नलकूप योजना के राशि के लिए किसान सरकारी कार्यालयों का चक्कर लगा रहे हैं. इस योजना के तहत बोरिंग उपलब्ध कराने के लिए किसानों ने प्रखंड कृषि विभाग के कार्यालय में आवेदन दिया. कृषि समन्वयक द्वारा अनुसंशित आवेदन को बीडीओ द्वारा स्वीकृति दी गयी. उसके बाद किसान को बोरिंग गाड़ने […]

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शिवहर : बिहार शताब्दी निजी नलकूप योजना के राशि के लिए किसान सरकारी कार्यालयों का चक्कर लगा रहे हैं. इस योजना के तहत बोरिंग उपलब्ध कराने के लिए किसानों ने प्रखंड कृषि विभाग के कार्यालय में आवेदन दिया.

कृषि समन्वयक द्वारा अनुसंशित आवेदन को बीडीओ द्वारा स्वीकृति दी गयी. उसके बाद किसान को बोरिंग गाड़ने के लिए परमिट निर्गत किया गया. उसके बाद किसानों ने स्वयं नगदी खर्च कर बोरिंग गाड़ा है. कृषि विभाग के कर्मी मौजूद रहकर बोरिंग गड़वाया है. बावजूद इसके किसान गाड़े गये बोरिंग की अनुदान राशि के लिए सरकारी कार्यालयों का चक्कर लगा रहे हैं.
इस योजना के तहत अधिकतम 15 हजार अनुदान की राशि देय है. कृषि विभाग के कर्मी का कहना है कि बोरिंग गाड़ने के बाद किसानों के आवेदन को जांच कर भुगतान की व्यवस्था सुनिश्चित कराने के लिए लघु सिंचाई विभाग में भेजा गया है. किंतु उसकी क्या स्थिति है. उन्हें नहीं मालूम है.
डुमरी कटसरी के कृषि समन्वयक के हवाले से प्रखंड प्रमुख सरिता देवी के प्रतिनिधि रूपेश कुमार सिंह ने बताया कि कृषि विभाग से आवेदन लघु सिंचाई विभाग को भेजा गया है. किंतु उसके बाद की स्थिति की जानकारी कृषि विभाग को नहीं हैं. इधर कृषि समन्वयक अजय कुमार सिंह ने बताया कि बोरिंग गाड़े गये किसानों का 60 आवेदन विभाग के भेजा गया था. किंतु कनीय अभियंता ने करीब 16 आवेदन को यह कहकर लौटा दिया है कि किसान स्वयं आवेदन लेकर उनके पास जमा करायें. जबकि कनीय अभियंता लघु सिंचाई विभाग कर्म चंद्र कुमार ने कहा कि मैंने आवेदन प्रोपर चैनल से भेजने की बात कही है. कृषि विभाग के द्वारा 10 आवेदन मुझे रिसिव करने के लिए कहा गया था. जिसे मैंने इनकार कर दिया है.
कहा कि आवेदन बीडीओ के कार्यालय में जमा करें या फिर लघु सिंचाई विभाग कार्यपालक अभियंता के कार्यालय में जमा करें. बताते चलें कि इसके पूर्व कनीय अभियंता भी आवेदन जमा कर लेते थे.
पूरे मामले पर में कृषि कार्यालय डुमरी कटसरी की भूमिका भी सवाल के घेरे में है. किसानों की माने तो इसमें सुविधा शुल्क नीति भी कार्य करने लगी है. उधर पुरनहिया प्रखंड के प्रखंड कृषि पदाधिकारी अशोक कुमार ने बताया कि प्राप्त आवेदन 238 में से 119 को स्वीकृत किया गया. उसके बाद की स्थिति की उन्हें जानकारी नहीं हैं. लघु सिंचाई विभाग समन्वय स्थापित करने को तैयार नहीं दिख रहा है. जिसके कारण अग्रतर स्थिति की उन्हें जानकारी नहीं है.
यह मामला किसी एक प्रखंड का नहीं है. बल्कि पांचों प्रखंड में किसान अनुदान राशि के लिए सरकारी कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं. बहुआरा निवासी किसान अवधेश कुमार सिंह ने बताया कि उनके पत्नी रूपकांति देवी के नाम से परमिट दिया गया.करीब तीन माह से अधिक समय बोरिंग गाड़े हुए हो गये. किंतु उसके अनुदान राशि का भुगतान अभी तक नहीं हो सका है.
आये 654 आवेदन, 677 की दी स्वीकृति
लघु सिंचाई विभाग के रिपोर्ट पर गौर करें तो विभाग ने 17 नवंबर 2017 को डीएम को भेजे गये रिपोर्ट में कहा है कि शिवहर प्रखंड में प्राप्त आवेदन 654 आवेदन के विरुद्ध 677 को बीडीओ द्वारा स्वीकृति दी गयी. जबकि 80 बोरिंग गाड़े गये. वही 65 को अनुदान राशि का भुगतान किया गया. जबकि डुमरी कटसरी में 320 आवेदन के विरुद्ध 243 की स्वीकृति दी गयी. जिसमें 46 ने बोरिंग गाड़े हैं. जिसमें 40 को अनुदान की राशि भुगतान की गयी है. पिपराही प्रखंड में 174 आवेदन के विरुद्ध 128 को बीडीओ द्वारा स्वीकृति दी गयी. जिसमें 37 बोरिंग गाड़े गये. जिसमें 26 किसानों को अनुदान राशि का भुगतान किया गया है.
पुरनहिया प्रखंड में 237 आवेदन के विरुद्ध 139 को स्वीकृति दी गयी. जिसमें 24 किसानों ने बोरिंग गाड़े. जिसमें 16 के खाते में अनुदान की राशि भेजी गयी है. तरियानी प्रखंड में 124 आवेदन के विरुद्ध 115 को बीडीओ द्वारा स्वीकृति दी गयी. जिसमें 114 नलकूप गाड़े गये. जिसके विरुद्ध 90 किसानों को अनुदान राशि का भुगतान किया जा चुका है.
तेजी से हो रहा काम
लघु सिंचाई विभाग के कार्यपालक अभियंता शिव कुमार प्रसाद ने बताया कि वर्तमान में शिवहर प्रखंड में 80 के विरुद्ध 65 आवेदन की जांच पूरी कर ली गयी है. जबकि डुमरी कटसरी में 46 के विरुद्ध 40, पिपराही में 37 की जगह 26, पुरनहिया में 24 के विरुद्ध 16 व तरियानी में 114 की जगह 90 की जांच की प्रक्रिया पूरी है. कहा कार्य तेजी से हो रहा है.
शिव कुमार प्रसाद, कार्यपालक अभियंता
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