प्रतिष्ठा व जीवन से हो सकता है खिलवाड़

Published at :01 Feb 2017 6:03 AM (IST)
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प्रतिष्ठा व जीवन से हो सकता है खिलवाड़

राजनीतिक मतभेद के डेढ़ दशक बाद आनंद मोहन ने लिखा सीएम को पत्र मंडल कारा में उत्पन्न विस्फोटक स्थिति से कराया अवगत न्यायालय में पेशी के लिए आये पूर्व सांसद ने कहा जेल में हो गया है जीना हराम सहरसा : राजनीतिक मतभेद के डेढ़ दशक बाद पूर्व सांसद सह मंडल कारा सहरसा में बंद […]

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राजनीतिक मतभेद के डेढ़ दशक बाद आनंद मोहन ने लिखा सीएम को पत्र

मंडल कारा में उत्पन्न विस्फोटक स्थिति से कराया अवगत
न्यायालय में पेशी के लिए आये पूर्व सांसद ने कहा जेल में हो गया है जीना हराम
सहरसा : राजनीतिक मतभेद के डेढ़ दशक बाद पूर्व सांसद सह मंडल कारा सहरसा में बंद आनंद मोहन ने मुख्यमंत्री को पत्र लिख कर मंडल कारा में प्रशासनिक पक्षपात के कारण व्याप्त जातीयता, धार्मिक तनाव, गुटबाजी के कारण उत्पन्न विस्फोटक स्थिति पर ध्यान आकृष्ट कराया है. मंगलवार को पेशी के लिए व्यवहार न्यायालय पहुंचे सांसद ने कहा कि नये अधीक्षक के पदभार ग्रहण करने के बाद जेल की सारी सकारात्मक गतिविधियां समाप्त हो गयी है. अधीक्षक के उकसावे पर वर्तमान में जेल जातियता, धार्मिक तनाव, गुटबाजी का अखाड़ा बन गया है. आये दिन यहां नोंक झोंक, गाली गलौज, मारपीट,
डंडा बेड़ी, सेल, लाठी चार्ज व पगली घंटी आम बात हो गयी है. अधीक्षक ने आते ही सर्वप्रथम अधिकारियों और सिपाहियों को जातीय आधार पर डराया धमकाया और बांट कर पक्षपातपूर्ण कार्रवाई शुरू की. इसके अलावे जेलर विपीन सिंह को होटल बुला कर अपने विरुद्ध साजिश रचने के नाम पर धमकी दी. जेल प्रशासन को आतंकित करने के बाद कैदियों में फूट, गुटबाजी, जातीय व धार्मिक आधार पर बांटा.
कुख्यातों को बैठाते हैं दफ्तर में : उन्होंने कहा कि कुछ दिनों के बाद अपने दफ्तर में दो ऐसे कुख्यातों को तरजीह देना शुरू किया. जो कुछ वर्ष पहले ड्यूटी पर तैनात संतरी की हत्या और जेल ब्रेक कर दुर्दांत अपराधी पुकार यादव को भगा ले गये थे. ऐसे लोगों को कारा नियमों को ताक पर रखकर बेरोकटोक मिलने जुलने व दरबार लगाने की इजाजत दी गयी है. जहां सभी मिलकर शहर के अन्य अपराधियों के साथ बैठकर अपराध की योजना बनाते हैं. जेल में अराजकता का माहौल ऐसा है कि कोई भी अपनी मर्जी से गुट बना कर गाली गलौज व मारपीट कर सकता है. नये साल की पार्टी के नाम पर इन कुख्यातों द्वारा मछली मंगवाकर गुट विशेष के बंदियों व कुछ सिपाहियों के बीच बांटा गया. उसी तरह मकर संक्रांति के नाम पर दही व अन्य सामग्री का बंटवारा किया गया. कारा कार्यालय के माध्यम से जेल में गांजा, चरस, अफीम, कोरेक्स, शराब का धंधा जोरों से फल फूल रहा है. स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस या गांधी जयंती पर कैदी उत्साहपूर्वक मनाते थे. लेकिन अधीक्षक के तानाशाह व पक्षपातपूर्ण रवैया के कारण गणतंत्र दिवस का बहिष्कार कर दिया. पिछले एक माह में दो बार पगली घंटी बजा कर आम बंदियों को पीटा गया.
चैन से जीना मुश्किल हो गया है
पूर्व सांसद ने कहा कि वह बीते 29 जनवरी को पुस्तकालय में बैठा था. जेल की स्थिति सामान्य थी. अचानक दूर से सीटी की अावाज सुनायी दी और पगली घंटी बजा दी गयी. देखते ही देखते काराधीक्षक के साथ दो दर्जन से अधिक सिपाही गाली गलौज व लाठी भांजते लाइब्रेरी में घुस कर शीशा व कप प्लेट तोड़ने लगे. विरोध करने पर मेरे साथ बदसलूकी करने लगा. पूर्व से बीमार कैदी संजीत यादव को निर्ममता पूर्वक पीटा गया और घसीटते हुए जेल अस्पताल में भरती कराया गया. बात बाहर नहीं फैले उसे आनन फानन में पीएमसीएच रेफर कर दिया गया. मकर संक्रांति के मौके पर मेरी 90 वर्षीया मां व पुत्र को बेवजह मिलने से रोक दिया. उन्होंने कहा कि जेल में जीना हराम हो गया है. किसी समय प्रतिष्ठा व जीवन से खिलवाड़ हो सकता है.
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