नाबालिग को बनाया मां, हुआ फरार

Published at :27 Jul 2016 8:37 AM (IST)
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नाबालिग को बनाया मां, हुआ फरार

सलखुआ थाना क्षेत्र के बहोरवा गांव की एक नाबालिग का शादी के नाम पर यौन शोषण किया गया. बाद में युवक शादी से मुकर गया. चार माह पूर्व महिला थाना में मामला दर्ज किया जा चुका है. लेकिन आरोपी की अब तक गिरफ्तारी नहीं हो सकी है.सहरसा : नाबालिग को मां बना कर फरार हो […]

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सलखुआ थाना क्षेत्र के बहोरवा गांव की एक नाबालिग का शादी के नाम पर यौन शोषण किया गया. बाद में युवक शादी से मुकर गया. चार माह पूर्व महिला थाना में मामला दर्ज किया जा चुका है. लेकिन आरोपी की अब तक गिरफ्तारी नहीं हो सकी है.सहरसा : नाबालिग को मां बना कर फरार हो जाने का एक मामला सामने आया है. सोमवार को पीड़िता ने एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया और उसके बाद यह खबर आग की तरह पूरे शहर में फैल गयी.
बीते चार माह पूर्व सलखुआ थाना क्षेत्र के बहोरवा गांव निवासी नाबालिग (14 वर्ष) ने महिला थाना में गांव के ही मोबाइल विक्रेता भूटो सिंह के पुत्र जयकांत सिंह पर यौन शोषण करने का आरोप लगाते मामला दर्ज कराया था. जिसके बाद पुलिस द्वारा पीड़िता के कराये गये चिकित्सीय परीक्षण में भी दुष्कर्म की पुष्टि हो गयी थी. घटना के बाद से पुलिस आरोपी युवक को गिरफ्तार करने में विफल रही है. इधर सोमवार को अचानक प्रसव पीड़ा होने पर उक्त नबालिग को उसकी मां कबुतरी देवी ने ग्रामीणों की मदद से सदर अस्पताल में भरती कराया. जहां मंगलवार की सुबह पीड़िता ने एक स्वस्थ्य बच्चे को जन्म दिया है.
अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार, नार्मल डिलीवरी हुई है. जच्चा व बच्चा दोनों ही स्वस्थ्य हैं. एक तो नाबालिग व दूसरी बिन ब्याही मां को देखने सदर अस्पताल में लोगों का तांता लगा हुआ है. इसके बावजूद पुलिस पीड़िता को न्याय दिलाने के बजाय मामले को दबाने में लगी हुई है.
पीड़िता ने बताया कि साल भर से जयंतकात उसे शादी का प्रलोभन देकर शारीरिक संबंध बना रहा था. बीते चार माह पूर्व एक हादसे में पिता की मौत होने के बाद लड़के पर शादी का दबाव बनाने लगी थी. लेकिन उसने शादी के दावे को सिरे से खारिज कर दिया था. जिसके बाद महिला थाना में मामला दर्ज करा न्याय की गुहार लगायी थी.
कहती हैं महिला थानाध्यक्ष: इस बाबत महिला थानाध्यक्ष आरती सिंह ने बताया कि थाना में कांड संख्या 47/16 दर्ज किया गया था. लेकिन आरोपी पुलिस को देख फरार हो जाता था. उन्होंने बताया कि आरोपी के दिल्ली में रहने की जानकारी मिली है. पुलिस पीड़िता व उसके नवजात को न्याय दिलाने के लिए तत्पर है.
कुमार आशीष, सहरसा
दबंगई व कानूनी शिथिलता की वजह से समाज में रोजाना गरीबों के अरमान आंसू बन जमींदोज हो रहे हैं. सलखुआ प्रखंड के बहोरवा गांव की नाबालिग लड़की जो स्वयं अभी बचपने से बाहर नहीं आयी है.
आज सदर अस्पताल की बेड पर बिन ब्याही मां का तमगा लिए नवजात बेटे को बाप का नाम देने के लिए सभ्य समाज पर नजरे टिकाये हुए है. अस्पताल में भरती होने से लेकर इलाज की सभी रस्मों को पूरा करने में उस बच्ची से उसके पैदा हो चुके बच्चे के पिता का नाम पूछा जा रहा है. मीडिया के कैमरे व लोगों की निगाहों से खुद को बचा चेहरे पर नकाब ओढ़े यह मां कलेजे से छोटे बच्चे बाबू को लगाये उसके बाप का पता पूछ रही है. सवाल लाजिमी है अखिर बाबू का बाप कौन है. उसे कानून की बेड़ियों में जकड़ने के बजाय रंगरेलियां मनानेकी छूट कौन दे रहा है. बहोरवा गांव में घटा यह वाकया तो बानगी भर है. न जाने कितने बाबू को दशकों बाद भी बाप का इंतजार है.
पति व पिता का मिले सहारा
सदर अस्पताल में भरती प्रसव पीड़िता नवजात के चेहरे को देख कभी खुश तो कभी उसके भविष्य को लेकर चिंतित हो रही है. कल तक आरोपी से पत्नी का दर्जा मांगने वाली नाबालिग अब बच्चे के पिता तक पहुंचने की गुहार लगा रही है. स्थानीय स्तर पर सरकारी महकमा हो या सामाजिक संगठन कोई भी मां-बेटे को उसका हक दिलानें के लिए आगे नहीं आ रहा है.
कर क्या रही थी पुलिस: पीड़िता द्वारा महिला थाना में जब मामले की जानकारी दी गयी तो उसका चिकित्सीय परीक्षण सफल रहने पर प्राथमिकी दर्ज कर इतिश्री कर ली गयी थी. इसके बाद भी आरोपी गांव में अपनी दबंगई दिखाते पीड़िता की गरीब मां को केस उठाने की धमकी देता रहा. सड़क किनारे सब्जी बेच बच्चों का लालन पालन कर रही वृद्धा भय की वजह से चुप रही. पुलिस भी एफआइआर रजिस्ट्रर में एक पन्ना पीड़िता के नाम कर स्थिर हो गयी.
ससमय पीड़िता को न्याय दिलाने पर मंगलवार को पैदा लिए बच्चे को कानूनी व सामाजिक दोनों स्तर पर पिता का नाम भी मिल जाता. पुलिसिया सुस्ती की वजह से पीड़िता को पति व बाबू को बाप का नाम नहीं मिल रहा है.
मूकदर्शक बना रहता है समाज: पीड़िता द्वारा आवाज उठाने के बाद जयकांत सिंह के चेहरे से बेशर्मी का नकाब हटाया गया था. इसके बावजूद जयकांत के परिजनों ने उस नाबालिग को सहारा देना उचित नहीं समझा. समाज मौन रहा.
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