कात्यायनी मंदिर में उमड़ा भक्तों का सैलाब

Published at :15 Jan 2016 6:42 PM (IST)
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कात्यायनी मंदिर में उमड़ा भक्तों का सैलाब

कात्यायनी मंदिर में उमड़ा भक्तों का सैलाब मकर संक्रांति के मौके पर जुटती है श्रद्धालुओं की भीड़प्रतिनिधि, सिमरी नगरमकर संक्रांति के मौके पर शुक्रवार को धमारा घाट स्थित मां कात्यायनी मंदिर में भक्तों का जनसैलाब उमड़ पड़ा. शुक्रवार को दिन भर विभिन्न ट्रेन से भक्तों की टोली धमारा घाट पहुंचती दिखी, मंदिर में दिन भर […]

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कात्यायनी मंदिर में उमड़ा भक्तों का सैलाब मकर संक्रांति के मौके पर जुटती है श्रद्धालुओं की भीड़प्रतिनिधि, सिमरी नगरमकर संक्रांति के मौके पर शुक्रवार को धमारा घाट स्थित मां कात्यायनी मंदिर में भक्तों का जनसैलाब उमड़ पड़ा. शुक्रवार को दिन भर विभिन्न ट्रेन से भक्तों की टोली धमारा घाट पहुंचती दिखी, मंदिर में दिन भर पूजा-पाठ के बीच दही-चूड़ा का दौर चलता दिखा. वही शुक्रवार और मकर संक्रांति एक साथ होने की वजह से धमारा घाट स्टेशन पर दिन भर यात्रियों की भीड़ रही. इस कारण टिकट काउंटर पर यात्रियों की लंबी-लंबी कतारें देखने को मिली.मंदिर का इतिहास दिल्ली के महरौली से आये सेंगर वंश के राजा मंगल सिंह को मुगल बादशाह अकबर ने 1595 में चौथम तहसील देकर मुरार शाही की उपाधि से नवाजा था. राजा व उनके मित्र श्रीपत जी महाराज को यह पवित्र स्थल शिकार एवं गौ चराने के क्रम में मिला. किंवदंती है कि श्रीपत जी महाराज हजारों गाय-भैंसों के मालिक थे. चरने के क्रम में उक्त स्थल पर गाय स्वत: दूध देने लगती थी. जिसे देखकर दोनों को अचरज होता था. स्वप्न में मां ने दिया था आदेशलोगों का कहना है कि राजा को मां ने स्वप्न में दर्शन देकर वहां मंदिर बनाने का आदेश दिया था. इसी पर दोनों ने उक्त स्थान पर मंदिर का निर्माण करवाया. खुदाई के क्रम में उस स्थान से मां का हाथ मिला. जिसका पूजन आज तक किया जा रहा है. मां कात्यायनी के पूजा के बाद आज भी यहां श्रीपत जी महाराज की पूजा की जाती है. यहां के लोक गीतों में भी राजा मंगल सिंह और श्रीपत जी की चर्चा होती है.लोगों की मान्यताएंलोगों का शारीरिक कष्ट एवं पशुओं (गाय, भैंस) के रोगों के निवारण के लिए श्रद्धालु मां कात्यायनी से याचना करते हैं. मनोकामना पूर्ण होने पर मां को दूध का चढ़ावा चढ़ाते हैं. रास्ते में घंटों समय लगने के बावजूद चढ़ावा का दूध जमता या फटता नहीं है. मां कात्यायनी स्थान न्यास समिति से जुड़े सदस्य कहते हैं कि अन्य शक्तिपीठों की तरह इस शक्तिपीठ का भी विकास हो रहा है. प्रत्येक सोमवार एवं शुक्रवार को वैरागन के अवसर पर श्रद्धालुओं द्वारा दान किए गए पैसों से मंदिर का विकास हो रहा है.फोटो – भक्त 12 – मंदिर मे पूजा करते श्रद्धालुफोटो – भक्त 13 – धमारा घाट स्टेशन पर लगी यात्रियों की भीड़

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