मां का पिंडदान कर रानी ने बेटियों का बढ़ाया सम्मान

Published at :10 Jan 2016 6:43 PM (IST)
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मां का पिंडदान कर रानी ने बेटियों का बढ़ाया सम्मान

मां का पिंडदान कर रानी ने बेटियों का बढ़ाया सम्मान मुखाग्नि देने के बाद वैदिक विधानों से संपन्न कराये सभी कर्मआत्मा की शांति के लिए करायेगी दो दिनों का सत्संग प्रतिनिधि, सतरकटैयाइतिहास में पुरुषों से अधिक स्त्रियों को सम्मान देने की परम्परा रही है. इसिलिए तो राम से पहले सीता, कृष्ण से पहले राधा, शंकर […]

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मां का पिंडदान कर रानी ने बेटियों का बढ़ाया सम्मान मुखाग्नि देने के बाद वैदिक विधानों से संपन्न कराये सभी कर्मआत्मा की शांति के लिए करायेगी दो दिनों का सत्संग प्रतिनिधि, सतरकटैयाइतिहास में पुरुषों से अधिक स्त्रियों को सम्मान देने की परम्परा रही है. इसिलिए तो राम से पहले सीता, कृष्ण से पहले राधा, शंकर से पहले गौरी का नाम लिया जाता है. इसके अलावा मीराबाई, लक्ष्मीबाई, इंदिरा गांधी, मदरटरेसा व अन्य ने भी सभी क्षेत्रें में महिलाओं को सम्मान दिलाया है. लेकिन पिछले कुछ वर्षों में पुत्री से अधिक पुत्र को महत्व दिया जाने लगा था. बेटी होने पर मातम और बेटा होने पर बाजा बजने की परंपरा बन गयी थी. यहां तक कि बेटियों को बोझ समझ कोख में ही मारा जाने लगा था. लेकिन यह कहानी भी अब खत्म होने के कगार पर है. समाज में अभी भी कुछ ऐसी बेटियां पैदा होती है जो अपने परिवार, कुल और समाज को नयी दिशा देकर अपने सम्मान को फिर से लौटाने व बरकरार रखने में कामयाबी पा रही है. विशनपुर गांव की रानी वैसी ही बेटियों में शामिल है. वैदिक विधानों से कराये सारे कर्मरानी का नाम आज जिले भर में गर्व से लिया जा रहा है. मां के निधन के बाद उसके अंतिम दर्शन व उसे मुखाग्नि देने से जब उसके इकलौते भाई ने इनकार कर दिया, तो वह खुद आगे आयी व मां पर अपना बराबर का अधिकार बताते उसे मुखाग्नि दी. इतना ही नहीं, रानी ने अपनी दिवंगत माता की आत्मा की शांति के लिए वैदिक विधानों से सारे कर्म को भी पुत्र की तरह संपन्न करायी. रानी ने माता के प्रति सेवा व समर्पण भाव को धर्म से ही नहीं कर्म से भी निभाया. पंडित उपेंद्र झा व पंडित पप्पू झा के नेतृत्व में उसने अस्थि विसर्जन, सतलाहन, नखबाल, श्राद्ध व संपींडन का विधि सम्मत कर्म किया. विधानों के अनुसार पंडितों को यथासंभव दान व दक्षिणा देकर विदा किया. माता की आत्मा की शांति के लिए रानी ने लोगों के हाथ भी धुलवाये. रानी अपनी मां का पिंडदान कर अपने आप को सौभाग्य शाली समझ रही है. उसक ी भावना को समाज ही नहीं जिले भर में बहुत सम्मान ही नहीं मिला. वह गांव की प्रेरक बेटी के रूप में चर्चित हो चुकी है. मां की आत्मा की शांति के लिये रविवार को दो दिनों का सतसंग एवं भजन संकीर्तन का कार्यक्रम भी आयोजित है.रानी ने बढ़ाया समाज का मानविशनपुर पंचायत के मुखिया अरविन्द यादव, सरपंच सिकेंन्द्र यादव, पंसस अनिता देवी, पैक्स अध्यक्ष अभिनंदन यादव, राजद के पूर्व प्रखंड अध्यक्ष तारणी यादव, हाई स्कूल के सेवानिवृत निवृत शिक्षक विंन्देश्वरी प्रसाद यादव, सेवानिवृत शिक्षक सुरेन्द्र यादव, ठाकुर पासवान, सेवानिवृत जनसेवक जयनारायण यादव, प्रिंस कुमार, डीलर उमेश यादव, वकील यादव, विष्णुदेव यादव, राजेश यादव, कृष्ण्देव यादव, सुकन यादव, वरूण देव, शिवेंद्र यादव सहित कई ने कहा कि रानी जैसा बेटी ईश्वर सभी को दे. रानी ने मां का संस्कार कर जो इतिहास कायम किया है, वह समाज को दिशा देने वाला है.फोटो- रानी 12- अपनी दिवंगत माता का पिंडदान करती रानी

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