सियासत नहीं, मत्स्यगंधा का विकास हो लक्ष्य

सहरसा नगर : वर्ष 1997 में नर्क से स्वर्ग में तब्दील मत्स्यगंधा जलाशय परियोजना को साकार करने में जिला प्रशासन की अहम भूमिका रही थी. लेकिन कुछ ही दिनों के बाद जमीन पर साकार हुई तत्कालीन डीएम टीएन लाल दास की परिकल्पना जमींदोज हो चुकी है. चुनावी मंच पर मत्स्यगंधा की पुरानी रौनक लौटाने का […]
सहरसा नगर : वर्ष 1997 में नर्क से स्वर्ग में तब्दील मत्स्यगंधा जलाशय परियोजना को साकार करने में जिला प्रशासन की अहम भूमिका रही थी. लेकिन कुछ ही दिनों के बाद जमीन पर साकार हुई तत्कालीन डीएम टीएन लाल दास की परिकल्पना जमींदोज हो चुकी है. चुनावी मंच पर मत्स्यगंधा की पुरानी रौनक लौटाने का दंभ भरने वाले सियासतबाज भी फिसड्डी साबित हो रहे हैं.
जबकि जनता कायाकल्प की बाट देख रही है. कोसी प्रमंडल के प्रमुख पयर्टक स्थल के रूप में विख्यात हो चुके मत्स्यगंधा झील के विकास को लेकर जिला प्रशासन ने पुन: सक्रियता दिखायी है. लेकिन जब तक इसे मूर्त रूप न दिया जाये, कुह कहना जल्दबाजी होगी.
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