पांच दिवसीय नवोदित नाट्य महोत्सव हुआ शुरू

Published at :18 Dec 2015 6:35 PM (IST)
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पांच दिवसीय नवोदित नाट्य महोत्सव हुआ शुरू

पांच दिवसीय नवोदित नाट्य महोत्सव हुआ शुरू पहले दिन पटना व भागलपुर की प्रस्तुति ने वर्तमान व्यवस्था पर किया प्रहार पूर्व क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र कोलकाता द्वारा 21 दिसंबर तक चलेगा महोत्सव सहरसा सदर पूर्व क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र कोलकाता, संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार नयी दिल्ली की ओर से सहरसा में पहली बार नवोदित नाट्य महोत्सव का […]

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पांच दिवसीय नवोदित नाट्य महोत्सव हुआ शुरू पहले दिन पटना व भागलपुर की प्रस्तुति ने वर्तमान व्यवस्था पर किया प्रहार पूर्व क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र कोलकाता द्वारा 21 दिसंबर तक चलेगा महोत्सव सहरसा सदर पूर्व क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र कोलकाता, संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार नयी दिल्ली की ओर से सहरसा में पहली बार नवोदित नाट्य महोत्सव का आयोजन गुरुवार से शुरू हुआ. 21 दिसंबर तक आयोजित पांच दिवसीय महोत्सव का उद्घाटन रमेश झा महिला कालेज की प्राचार्या व साहित्यविद् डॉ रेणु सिंह एवं डीपीआरओ बिंदुसार मंडल ने संयुक्त रूप से किया. उद्घाटन समारोह को संबोधित करती प्राचार्या श्रीमती सिंह ने नाट्य कला को सबसे गंभीर कला की संज्ञा देते कहा कि कलाकार द्वारा अपनी संवेदना को दर्शकों के सामने प्रदर्शित करना कठिन होता है. विशिष्ट अतिथि डीपीआरओ श्री मंडल ने रंगमंच व नाट्य कला की चर्चा करते कहा कि रंग कर्मी समाज में हो रही घटनाओं को रंगमंच के माध्यम से सामने लाते हैं. पूर्व क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र कोलकाता के निदेशक डॉ ओमप्रकाश भारती के प्रयास से पिछले वर्ष भी सहरसा जिले में आक्टेव का आयोजन हुआ था. इस वर्ष भी इस नाट्य महोत्सव का आयोजन कर उन्होंने बिहार व झारखंड जैसे राज्यों में रंगमंच के विकास के लिए नवोदित नाट्य महोत्सव का यहां आयोजन सराहनीय प्रयास है. हास्य व्यंग प्रस्तुति को देख लोटपोट हुए दर्शक महोत्सव के पहले दिन पटना की सांस्कृतिक संस्था द आर्ट मेकर के रंगकर्मियों द्वारा नरेन्द्र सिंह के निर्देशन में हास्य व्यंग से भरे जूते की प्रस्तुति देख दर्शकों ने काफी प्रशंसा की. बगदाद शहर की पृष्ठभूमि को लेकर केंद्रित इस नाटक में गुलाम अबुल कासिम के किरदार के रूप में कुणाल कुमार द्वारा सशक्त अभिनय व हास्य व्यंग की प्रस्तुति बार-बार दर्शकों को रोमांचित करता रहा. एक जूते की वजह से गुलाम अबु कासिम का मुकद्दर हमेशा उसे मुसीबत में ही डालता है. जबकि अबु कासिम कई बार जूते की मुसीबत से छुटकारा के लिए हर तरह का प्रयास करता है. लेकिन वह प्रयास भी विफल होकर उसके लिए मुसीबत भी उत्पन्न कर देता है. एक जूते पर केंद्रित इस नाटक की हास्य व्यंग की रचना को निदेशक द्वारा इस तरह रंग कर्मियों को मंच पर प्रदर्शित किया गया कि पूरी नाटक में लोग बार-बार अपनी हंसी को रोक नहीं पा रहे थे. हास्य व्यंग पर आधारित यह नाटक वर्तमान व्यवस्था पर भी चोट करने का काम किया. क्योंकि बिना समस्या को समझे किसी को दोषी मान उसे प्रताडि़त करने व सजा देने की परंपरा को यह नाटक भलीभांति प्रदर्शित कर रहा था. नाटक के पात्रों ने वसुधा कुमारी, उदय कृष्ण, रमेश कुमार रभू, सूरज कुमार सिंह, संतोष राजपुत ने भी अपने-अपने पात्रों के साथ न्याय करते सशक्त अभिनय करने में सफल रहे. नाटक के संगीत पक्ष ने भी नाटक की खूबसूरती को बखूबी उभारने का काम किया. हारमोनियम पर रोहित चंद्रा, नाल पर गायन मंडली के दीपक कुमार, क्रांति राज ने महती भूमिका निभायी. व्यवस्था पर चोट करती दिखी भागलपुर की प्रस्तुति महोत्सव के पहले दिन के दूसरी प्रस्तुति भागलपुर सम्बद्ध संस्था द्वारा प्रस्तुत व रितेश रंजन द्वारा निर्देशित नाटक कुछ किस्से, कुछ कहानियां की प्रस्तुति ने वर्तमान व्यवस्था पर करारा प्रहार किया. पाश्चात्य संस्कृति के आगोश में पल रहे आज के युवा पीढ़ी के डगमगाते पैर के कारण समाज में बढ़ रही अपसंस्कृति को जहां जाहिर करने का काम किया. वहीं मौजूदा परिवेश में सरकार व प्रशासन तंत्र की व्यवस्था के तले लाचार, बेबस लोगों की मजबूरियों का किस तरह समाज के बड़े लोग अवसरवादी लाभ लेने का काम करते हैं. उन सभी पहलुओं को अपने नाटक के माध्यम से हास्य व्यंग से लेकर गंभीर क्षणों को मंच से प्रस्तुत कर व्यवस्था पर चोट किया. भागलपुर की प्रस्तुति कुछ किस्से कुछ कहानियां एक गांव की चाय दुकान, दद्दा के दुकान से शुरू होती है जहां प्रतिदिन गांव के निठल्ले, मनचले युवक चाय की दुकान पर पहुंच अल्हड़ मस्ती में लीन रहते हैं. उस चाय की दुकान पर कभी रामलीला की रिहर्सल हुआ करता था. वहां बढ़ते अपसंस्कृति के कारण ऐसे अनैतिक कार्य होने लगे थे जो समाज के अंदर नहीं हुआ करता था. वेश्यावृत्ति तक का भी धंधा उस चाय की दुकान पर शुरू हो गयी थी. भले मानस चाय दुकानदार इस व्यवस्था को देख छिन्न रहता था. लेकिन दबंग व बदमाशों के आगे चाह कर भी उसकी कुछ नहीं चल पाती थी. यहीं से इस नाटक की कहानी में समाज के अंदर हर पहलू को दिखाने का काम किया गया जो समाज के लिए कहीं से भी उचित नहीं था. नाटक के पात्रगत भूमिका में साहिल राज, सुमित मिश्रा, पंकज गुप्ता, मोहित कश्यप, विपिन बिहारी, खुशबू कुमारी, मनीषा कुमारी, निधि पंडित, पिंकी कुमारी, रोशन कुमार सहित अन्य रंग कर्मियों ने बेहतर अभिनय प्रस्तुत कर दर्शकों की खूब तालियां बटोरी. दोनों ही नाटक की प्रस्तुति के बाद मुख्य अतिथि व विशिष्ट अतिथि के साथ-साथ मौजूद रंग समीक्षक व नाट्य निर्देशक डॉ दीपक गुप्ता के हाथों नाट्य निर्देशकों को सम्मानित किया गया. अभय कुमार मनोज व निरंजन कुमार के संचालन में आयोजित नाट्य समारोह के मौके पर पूर्व क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र कोलकाता के प्रोग्राम आफिसर डॉ तापस सामंत राय, प्रोग्राम कार्डिनेटर महेंद्र कुमार, हरिशंकर गुप्ता, अशोक वैरागी सहित अन्य मौजूद थे. फोटो- नाटक 11- उद्घाटन भाषण करती प्रधानाचार्या डॉ रेणु सिंहफोटो- नाटक 12 से 15- जूते की प्रस्तुति करते पटना के कलाकारफोटो- नाटक 16 से 18- कुछ किस्से, कुछ कहानी प्रस्तुत करते भागलपुर के नाट्य कलकार

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