लोकतंत्र के महापर्व के बाद अब आस्था के महापर्व की तैयारी

Published at :06 Nov 2015 6:33 PM (IST)
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लोकतंत्र के महापर्व के बाद अब आस्था के महापर्व की तैयारी

लोकतंत्र के महापर्व के बाद अब आस्था के महापर्व की तैयारी दीपावली के लिए घरों की साफ-सफाई में जुटे लोगछठ घाटों की ओर नजर-ए-इनायत नहीं कर रहा नपसभी तालाबों में कजली व कचरे हैं भरे, तैर रहे हैं सांप व कीड़े सहरसा मुख्यालयलोकतंत्र के महापर्व ‘बिहार विधान सभा’ चुनाव संपन्न हो जाने के बाद लोगों […]

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लोकतंत्र के महापर्व के बाद अब आस्था के महापर्व की तैयारी दीपावली के लिए घरों की साफ-सफाई में जुटे लोगछठ घाटों की ओर नजर-ए-इनायत नहीं कर रहा नपसभी तालाबों में कजली व कचरे हैं भरे, तैर रहे हैं सांप व कीड़े सहरसा मुख्यालयलोकतंत्र के महापर्व ‘बिहार विधान सभा’ चुनाव संपन्न हो जाने के बाद लोगों ने अब आस्था के महापर्व छठ की तैयारी शुरू कर दी है. दीपावली के लिए लोगों ने अपने घर व दुकानदारों ने अपनी दुकान की साफ -सफाई शुरू कर दी है. रंग-रोगन का काम भी युद्ध स्तर पर कराया जा रहा है. चुनाव समाप्त होने के साथ ही बाजार भी त्योहारों के लिए तैयार नजर आने लगा है. झाड़ू से लेकर चूना, रंग, पेंट की दुकानों में भीड़ जानी शुरू हो गयी है. दिहाड़ी मजदूरों के उपलब्ध होने वाले ठिकानों पर भी सुबह से ही मजदूर सहित लोगों का पहुंचने लगे हैं. सजावट सहित पूजा-पाठ सामग्रियों की दुकानों में भी लिस्ट पहुंचने लगी है. चौक -चौराहे सहित बाजारों में गणेश-लक्ष्मी की मूर्ति रख बेचने की भी तैयारी शुरू हो चुकी है. कई घरों में पारंपरिक घरकुंडा भी बनाया जा रहा है. केंडिल व हुक्का-पाती भी समय से चुनाव के कारण दीपावली व छठ जैसे पारंपरिक त्योहारों की तैयारी शिथिल पड़ गयी थी. लेकिन गुरुवार को अंतिम चरण के मतदान संपन्न होने के साथ ही बाजार एक बार फिर उत्साह से खड़ा हो गया है. बांस की तिलियों से बनने वाले आकाशदीप (कैंडिल) हो या लक्ष्मी घर-दरिद्र बाहर करने वाले हुक्का पाती से बाजार पट गया है. डिबिया जलाने के लिए केरोसिन हो या दीप जलाने के लिए रूई की बाती सबकी खरीदारी में लोग लग गए हैं. घरों को आकर्षक ढ़ंग से सजाने व दीवारों पर लगने वाली कालिख से बचाने के लिए बिजली के झालड़ खरीदने की तैयारी में हैं या पुरानी लड़ी को निकाल उसे चेक कर रहे हैं. नप क्यों भूल गया है त्योहार कोमहापर्व छठ मनाने के लिए लोग अभी से घाट सुरक्षित करने में जुट गए हैं. लेकिन किसी भी तालाबों की स्थिति ठीक नहीं है. नगर परिषद की यह सालाना आदत बनती जा रही है कि जब तक बार-बार खबरों के प्रकाशन से उसका ध्यान आकृष्ट नहीं कराया जाता है. तब तक वह तालाब में मजदूर नहीं उतारता है. अभी अमूमन तालाबों में पानी तो है. लेकिन गंदगी भरी-पड़ी है. कई तालाबों की सीढ़ियां क्षतिग्रस्त है तो सभी तालाब में कचरे व कजली जमे हुए हैं. सांप व कीड़े-मकौड़े पानी में तैरते दिख जाते हैं. व्रती परिवार के सदस्य यदि घाट की सफाई के लिए जाते हैं तो उनके साथ दुर्घटना कोई बड़ी बात नहीं होगी. फोटो-छठ 1- कचरे से भरा मत्स्य विभाग का सतपोखराफोटो-छठ 2- दरिद्र को भगाने के लिए बिकने लगा है हुक्का पाती

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