लागत लाखों की, फिर भी पशु अस्पताल है बदहाल

Published at :18 Oct 2015 6:47 PM (IST)
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लागत लाखों की, फिर भी पशु अस्पताल है बदहाल

लागत लाखों की, फिर भी पशु अस्पताल है बदहाल पशुपालकों को नहीं मिल रहा है लाभप्रतिनिधि, पतरघट प्रखंड मुख्यालय स्थित पशुपालन विभाग की लाखों की राशि से निर्मित पशु गर्भाधान केंद्र बदहाल हो चुका है. इस केन्द्र में अक्सर ताला लटका रहता है. सप्ताह तो दूर महीनों में भी यह केंद्र नहीं खुलता है. यहां […]

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लागत लाखों की, फिर भी पशु अस्पताल है बदहाल पशुपालकों को नहीं मिल रहा है लाभप्रतिनिधि, पतरघट प्रखंड मुख्यालय स्थित पशुपालन विभाग की लाखों की राशि से निर्मित पशु गर्भाधान केंद्र बदहाल हो चुका है. इस केन्द्र में अक्सर ताला लटका रहता है. सप्ताह तो दूर महीनों में भी यह केंद्र नहीं खुलता है. यहां पदस्थापित कर्मी अपनी मनमर्जी से आते-जाते हैं. इस केंद्र के नहीं खुलने से अधिकांश लोगों को यह पता नहीं है कि लाखों रुपये से निर्मित पशु अस्पताल की जानकारी भी लोगों को नहीं है. प्रखंड मुख्यालय से महज पांच सौ मीटर की दूरी पर स्थित पशु गर्भाधान केंद्र पर किसी तैनात अधिकारियों की भी नजर नहीं पड़ती है. छह माह पूर्व हुआ था तबादला करीब छह माह पूर्व यहां प्रथम वर्गीय पशु चिकित्सालय में पदस्थापित प्रभारी के रूप में डॉ विनोद कुमार सिंह के स्थानांतरित होने के बाद पशु चिकित्सा प्रभारी के पद पर सौर बाजार में पदस्थापित पशु चिकित्सा प्रभारी सुजीत कुमार वर्मा द्वारा प्रभार ग्रहण किया गया था. उनके जिम्मे में सौर बाजार के अलावे पतरघट, धबौली, मंगुवार सहित कई अन्य जगहों का प्रभार भी है. इसके कारण वे अपना समय नहीं दे पा रहे हैं. मिली जानकारी के अनुसार इस पशु चिकित्सालय में पशुओं के गर्भाधान कराने सहित पशुओं के सुविधा के लिए सभी प्रकार की सरकारी सुविधा उपलब्ध करायी जाती है. इसके लिए कई कमरों का बहुमंजिला भवन भी बनाया गया है. यहां कई प्रकार के यंत्र भी मौजूद हैं. यहां प्रभारी के अलावे एक कंपाउंडर गौरी सिंह भी वर्षों से जमे हैं. इसके अलावे एक डाटा आॅपरेटर भी कार्यरत हैं. पशु चिकित्सा प्रभारी को सप्ताह में तीन दिन मंगलवार, गुरुवार एवं शनिवार को यहां पर रहना है.कृत्रिम गर्भाधान की है व्यवस्था पशुओं को गर्भ में कृत्रिम तरीके से गर्भ ठहराया जाता है. इसके अलावे भी कई व्यवस्था हैं. विभागीय सूत्रों के अनुसार पशुपालन विभाग द्वारा प्रतिमाह नाइट्रोजन, गैस लीटर, स्ट्रोंसिथ दवाई सहित पशुओं के लिए समय-समय पर टीकाकरण एवं घास का बजी व कई सुविधाएं यहां उपलब्ध करायी जाती है. इसके बावजूद सरकारी सुविधा प्राप्त होने के बाद भी पशुपालकों को अस्पताल से कोई लाभ नहीं मिल पाता है. जबकि प्रखंड क्षेत्र आबादी के अनुसार यहां 70 से 80 प्रतिशत सिर्फ पशुपालक हैं. पशुपालक पशु को लेकर आ भी जाते है तो भवन में ताला लगा देख लौट जाते है. क्या कहते हैं पशुपालक : ग्रामीण पशुपालक कारी यादव, अमीर यादव, दिलीप यादव, कामेश्वर शर्मा, मुरलीधर सिंह, पवन सिंह, रामनाथ शरण सिंह सहित अन्य लोगों का कहना है कि जबसे इस भवन में पशु गर्भाधान केंद्र खुला है यहां से पशुपालकों को कोई भी लाभ नहीं है. अस्पताल बंद रहने के कारण मुख्य द्वार को स्थानीय दुकानदारों द्वारा जबरन अतिक्रमण कर लिया गया है. पशु चिकित्सालय बंद रहना यह एक गंभीर विषय है हम खुद मामले की जांच कर दोषी कर्मचारी पर कार्रवाई करेंगे. कर्पूरी ठाकुर बीडीओ, पतरघट’ फोटो-अस्पताल 2- बंद पड़ा पतरघट का पशु अस्पताल.फोटो- अस्पताल 3- अस्पताल के मुख्य द्वार पर लटका ताला.

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