हजारों यात्री, करोड़ों की आमदनी और शौचालय में ताला

Updated at : 06 Jul 2018 6:03 AM (IST)
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हजारों यात्री, करोड़ों की आमदनी और शौचालय में ताला

पीएम के स्वच्छता अभियान को लग रहा झटका खुले में शौच को बाध्य कर रहा है रेलवे पटरी पर या प्लेटफॉर्म पर खड़ी ट्रेन में यात्री करते हैं शौच महिला यात्रियों को बेहद परेशानी सहरसा : एक तरफ देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वच्छ भारत अभियान के नारे को मजबूत कर रहे हैं, दूसरी ओर […]

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पीएम के स्वच्छता अभियान को लग रहा झटका

खुले में शौच को बाध्य कर रहा है रेलवे
पटरी पर या प्लेटफॉर्म पर खड़ी ट्रेन में यात्री करते हैं शौच
महिला यात्रियों को बेहद परेशानी
सहरसा : एक तरफ देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वच्छ भारत अभियान के नारे को मजबूत कर रहे हैं, दूसरी ओर केंद्र सरकार का महत्वपूर्ण विभाग रेलवे ही उनके अभियान को झटका दे रहा है. रेलवे की लापरवाही से रेलयात्री खुले में शौच को बाध्य हो रहे हैं. प्रसाधन नहीं होने से महिला यात्रियों को काफी परेशानी होती है. दरअसल सहरसा जंक्शन देश के ए ग्रेड स्टेशनों में शामिल होने के बाद भी शौचालय की सुविधा से मरहूम है. ऐसा नहीं है कि यहां सार्वजनिक शौचालय नहीं है. लेकिन महीनों से ताला लगे होने के कारण यात्रियों के काम नहीं आ रहा है. जबकि सहरसा जंक्शन से यात्रा करनेवालों की संख्या हजारों में होती है और इन यात्रियों से रेलवे को करोड़ों की आमदनी होती है.
आमदनी के बाद भी रेलवे ने नहीं की व्यवस्था: रेलवे की लापरवाही से रेलयात्रियों को खुले में शौच जाने की मजबूरी बनी हुई है. शौच की नौबत आने पर रेलयात्रियों को या तो पटरियों के किनारे बैठना पड़ता है, या यार्ड सहित प्लेटफॉर्म पर खड़ी गाड़ियों का सहारा लेते हैं. बात दें कि सहरसा जंक्शन से देश के विभिन्न भागों में जाने वाले यात्रियों की औसत संख्या लगभग 15 हजार रोज और महीने में लाखों की है. इन यात्रियों से रेलवे को हर माह करोड़ों रुपये का राजस्व मिलता है.
अभी पिछले महीने 10 से 27 जून तक कोसी सहित सीमांचल के लगभग डेढ़ लाख मजदूर यात्री सहरसा जंक्शन से सवार हुए. रेलवे के रिकॉर्ड के अनुसार 13 से 17 जून तक सिर्फ पांच दिनों में दो करोड़ 18 लाख रुपये के टिकट कटे. उन्हें प्लेटफॉर्म सहित स्टेशन परिसर में दो से तीन दिन तक रुकना पड़ा. लेकिन यहां शौचालय की सुविधा नहीं रहने के कारण उन मजदूर यात्रियों को खुले का सहारा लेना पड़ा. वे पटरियों पर बैठ मल त्यागने को बाध्य बने रहे और अभी तक स्वच्छता अभियान को झटका लग ही रहा है.
प्लेटफॉर्म एक पर महीनों से बंद है शौचालय
जंक्शन के प्लेटफॉर्म नंबर एक और टिकट घर के बीच महिला व पुरुषों का सार्वजनिक शौचालय बना है. सेवा शुल्क लेकर इसका संचालन निजी संगठन करता था. हालांकि संचालक पर कई बार निर्धारित शुल्क से अधिक राशि वसूलने के आरोप लगते रहे थे. लेकिन राशि वसूलने के बाद भी संचालन करने वाले द्वारा यात्रियों को कोई सुविधा नहीं दी जाती थी. शौचालय के दरवाजों की कुंडी टूटी थी तो टंकी की टोटियां भी डायरेक्ट थी. महीनों तक उसकी सफाई नहीं कि जाती थी तो शौच से निवृत्त होने के बाद हाथ साफ करने के लिए साबुन या ब्लीचिंग पाउडर की भी व्यवस्था नहीं थी.
लेकिन बीते कई महीनों से इस सार्वजनिक शौचालय में ताला लटके होने के कारण निवृत्त होने की वह सुविधा भी छीन गयी. प्लेटफॉर्म नंबर दो का पुराना शौचालय कभी भी उपयोग करने लायक नहीं रहा था. सफाई नहीं होने के कारण फर्श पर ही शौच पड़े होते थे. पैन में मल तैरते रहते थे. लगभग दो माह पूर्व सर्कुलेटिंग एरिया के लिए उसे भी तोड़ डाला गया. अभी यह ए ग्रेड स्टेशन शौचालय विहीन है.
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