वर्षों बाद फिर लाल हुई बरुणा की धरती
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :14 Jul 2016 2:18 AM (IST)
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हत्या का सिलसिला एक बार फिर शुरू बिक्रमगंज : पंचायती चुनाव जब जब आता है तब तब दुश्मनी की नयी इबादत लिख देता है. नाते रिश्तेदार, पड़ोसी, जमात सभी के साथ किसी न किसी रूप में दुश्मनी की रेखा खींच जाती है. इसकी बानगी एक बार फिर देखने को मिली जब मंगलवार की रात शिवपुर […]
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हत्या का सिलसिला एक बार फिर शुरू
बिक्रमगंज : पंचायती चुनाव जब जब आता है तब तब दुश्मनी की नयी इबादत लिख देता है. नाते रिश्तेदार, पड़ोसी, जमात सभी के साथ किसी न किसी रूप में दुश्मनी की रेखा खींच जाती है. इसकी बानगी एक बार फिर देखने को मिली जब मंगलवार की रात शिवपुर पंचायत के बरुणा गांव निवासी वेंकटेश सिंह यादवकी गोली मार कर हत्या कर दी गई.
रात में करीब 10 बज रहे थे. हत्या के बाद परिजनों और ग्रामीणों ने शव के साथ आरा-सासाराम पथ को घंटो जाम किया. सड़क जाम करने वाले लोगों को काराकाट विधायक संजय यादव ने इंसाफ का भरोसा दिलाया है साथ में प्रखंड प्रमुख राकेश कुमार सिंह लाली व विधायक प्रतिनिधि रब नवाज राजू भी थे. जदयू नेता गुप्तेश्वर मिश्रा ने घटना पर दु:ख प्रकट करते हुए सभी हत्यारों को शीघ्र गिरफ्तार करने की मांग पुलिस प्रशासन से की है.
क्यों बार-बार लाल होती है बरुणा की धरती
शिवपुर पंचायत का बरुना गांव जिसकी आबादी करीब 15 सौ के करीब है. इस गांव में अभी तक आधा दर्जन से अधिक आपसी रंजिश में हत्या हो चुकी है़ विधानसभा चुनाव के वक्त भी गोली चली थी, जिसमें एक व्यक्ति मरने से बच गया था. गोलियों की चलने की आवाजे इस गांव के लिए नयी नहीं है. हां काफी दिनों बाद गोली से हत्या जरूर हुई है. कहते हैं कि इस गांव में तनाव का आलम यह है की कोई किसी के दरवाजे तक जाना गंवारा नहीं समझता अगर कोई खास काम न हो तो.
हत्या का कारण क्या
शिवपुर पंचायत चुनाव में दो मुखिया आमने-सामने थे. इसमें एक की पृष्ठभूमि में हत्या लूट समेत कई मामले दर्ज हैं. जिसे झारखंड का डॉन भी कहा जाता है और लगातार दूसरी बार जेल से चुनाव जितने में सफलता पायी है. उनका नाम है अमित सिंह उर्फ नटरा. वहीं मुकाबले में खड़े मदन सिंह यादव जिनकी पृष्ठभूमि भी दबंग प्रवृत्ति की मानी जाती है. दोनों के समर्थकों के बीच चुनाव के बाद भी मार-पीट की घटनाएं हुई थी.
इसमें मृतक का बेटा विनय भी शामिल है. भले ही विनय ने मामले को थाने में नहीं पहुंचाया पर अगर उस वक्त ही प्राथमिकी दर्ज हो गयी होती, तो शायद यह घटना नहीं होती़ या यूं कहे कि वह मारपीट की घटना भी अंजाम का संकेत हो सकता है़
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