अंदर ही अंदर सुलग रही है पूर्णिया में हाइकोर्ट बेंच की मांग

Published at :12 Sep 2018 5:57 AM (IST)
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अंदर ही अंदर सुलग रही है पूर्णिया में हाइकोर्ट बेंच की मांग

पूर्णिया : विकास के इस दौर में हाई कोर्ट के बेंच की मांग अंदर ही अंदर सुलग रही है. इस मांग को लेकर पूर्णिया का प्रबुद्ध जनमानस संजीदा है. वे कहते भी हैं कि पूर्णिया लगातार विकास की राह पर चल रहा है और बहुत कुछ हासिल भी हुआ है पर यह कसक अब तलक […]

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पूर्णिया : विकास के इस दौर में हाई कोर्ट के बेंच की मांग अंदर ही अंदर सुलग रही है. इस मांग को लेकर पूर्णिया का प्रबुद्ध जनमानस संजीदा है. वे कहते भी हैं कि पूर्णिया लगातार विकास की राह पर चल रहा है और बहुत कुछ हासिल भी हुआ है पर यह कसक अब तलक बनी रह गई है कि बारंबार मांग के बावजूद यहां हाई कोर्ट के बेंच की स्थापना अब तक नहीं हो सकी है. इतना ही नहीं, प्रबुद्ध जनमानस पूर्णिया को उपराजधानी का दर्जा दिए जाने की भी वकालत कर रहा है.

उनका कहना है कि उपराजधानी की मांग उस समय से हो रही है जब बिहार से कटकर झारखंड राज्य का गठन किया गया था. यह बात भी मुखर रुप से रखी गई कि हाई कोर्ट के बेंच की मांग आश्वासनों के बीच 27 सालों से झूल रही है. नब्बे के दशक में इस मांग को लेकर हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर हुई थी. लोगों का तर्क यह था कि पूर्णिया पूर्ण अरण्य से बना है और यहां का इम्फ्रास्ट्रेक्चर इस तरह का है कि इसे उपराजधानी का दर्जा दिया जा सकता है. जीतन राम मांझी ने अपने मुख्यमंत्रित्व काल में हाई कोर्ट बेंच की मांग को न केवल जायज ठहराया था बल्कि यह आश्वासन भी दिया था कि अगर वे सीएम रह गए तो यह मांग पूरी हो जाएगी. उस समय वे पूर्णिया दौरे में आए थे और

बनमनखी में एक सभा को सम्बोधित करते हुए बोल रहे थे . इससे पहले पूर्णिया के प्रबुद्ध लोगों के एक शिष्टमंडल ने मुलाकात कर उनसे यह मांग की थी और इसके पक्ष में तर्क भी प्रस्तुत किया था. मगर उनके सीएम पद से हटते ही बात खत्म हो गई. यहां प्रस्तुत है वह भावनाएं जिस पर पूर्णिया का प्रबुद्ध मन आस लगाए बैठा है.

उच्च न्यायालय की खंडपीठ यहां हो जाए तो मेरे ख्याल से यही विकास का पैमाना हो सकता है. पूर्णिया और कोशी प्रमंडल में जिस तरह पुराने मुकदमे पेंडिंग पड़े हुए हैं, यदि यहां इस खंडपीठ की स्थापना हुई होती तो सारे मामलों का निष्पादन हो गया होता. अगर देखा जाए तो यहां भूमि विवाद काफी अधिक है और पेंडिंग मामलों में अधिकांश इसी विवाद से सम्बन्धित हैं. इस दृष्टि से पूर्णिया में हाई कोर्ट का बेंच होना ही चाहिए.
उमेश मिश्रा, रिटायर्ड बैंक अधिकारी
सही पूछिये तो हाई कोर्ट के बेंच की स्थापना पूर्णिया का हक है. पूर्णिया के पास इसके लिए इम्फ्रास्ट्रेक्चर है तो सहुलियत भी है. अगर यहां हाई कोर्ट के बेंच की स्थापना हो जाए तो न केवल पूर्णिया बल्कि अररिया, किशनगंज और कटिहार के लंबित मामले भी सुलझाए सकते हैं. इतना हे नहीं, पूर्णिया के अलावा कोशी प्रमंडल के मामलों का भी सहज रुप से निष्पादन हो सकता है. इस दिशा में पहल होनी चाहिए.
दिलीप कुमार दीपक, अधिवक्ता
पूर्णिया को स्मार्ट सिटी बनना चाहिए पर नहीं बन सका. हाई कोर्ट का बेंच नहीं हो सका. उपराजधानी का दर्जा नहीं मिला. यह सच है कि कुछ चीजें मिली हैं पर वही पर्याप्त नहीं. अभी जमीन सम्बन्धी मुकदमे सबसे ज्यादा हैं जो किसी न किसी वजह से हाई कोर्ट में पेंडिंग पड़े हुए हैं. अनावश्यक व्यय के कारण गरीब तबके वहां नहीं जा सकते. यहां यदि हाई कोर्ट का बेंच होता तो इस तरह के मामले तुरंत निबटा लिए जाते.
गौतम वर्मा, अधिवक्ता
हाई कोर्ट का बेंच पूर्णिया की जरुरत है और इसे पूरा किया जाना पूर्णिया के लिए हर दृष्टि से हितकर है. 1981 में हुए आल इंडिया बार एंड बेंच यूनिटी कान्फ्रेंस में हाई कोर्ट बेंच की चर्चा हुई थी और तबसे इसकी मांग होती रही है पर पटना उच्च न्यायालय के खंडपीठ के गठन का मामला भी शिथिल पड़ा हुआ है. इसकी स्थापना के बाद पेंडिंग वादों की सुनवाई के साथ लोगों को काफी हद तक राहत भी मिल सकेगी.
वीके ठाकुर, प्रदेश प्रवक्ता, बिहार कांग्रेस
आज के महंगाई के जमाने में यदि मध्यमवर्गीय व्यक्ति को किसी मुकदमे की पैरवी में पटना हाई कोर्ट जाने की नौबत आ जाए तो मुसीबत ही मुसीबत है. समय तो गया ही, फिजुलखर्ची भी हो गई. पूर्णिया में जमीन का विवाद बहुत ज्यादा है और आज भी ढेर सारे मुकदमें लंबित हैं. गरीब और मध्यमवर्गीय लोगों का केस के सिलसिले में बार-बार पटना जाना संभव नहीं. इस दृष्टि से हाई कोर्ट का बेंच तो यहां होना ही चाहिए.
संजय कुमार बनर्जी, जैविक कृषक
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