भागलपुर में पंडित नेहरू ने चखा था पसंदीदा छोले का स्वाद, तब मुश्किल नहीं था प्रधानमंत्री से मिलना

Updated at : 27 May 2022 12:11 PM (IST)
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भागलपुर में पंडित नेहरू ने चखा था पसंदीदा छोले का स्वाद, तब मुश्किल नहीं था प्रधानमंत्री से मिलना

पंडित जवाहर लाल नेहरू की पुण्यतिथि आज 27 मई को है. प्रधानमंत्री नेहरू आजादी के बाद जब भागलपुर आए तो उन्हें उनका पसंदीदा छोला खाने को मिला. उस वाक्ये का जिक्र भागलपुर के ही मुकुटधारी अग्रवाल ने किया था. वो भी पंडित नेहरू से मिलने सर्किट हाउस तब गये.

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भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की आज यानी 27 मई को पुण्यतिथि है. आज के दिन ही पंडित नेहरू ने इस दुनिया को अलविदा कहा. उनसे जुड़ी कई यादें आज भी लोग याद करते हैं. ऐसा ही कुछ वाक्या बिहार से भी जुड़ा है. उस दौर की कुछ यादें आज भी स्मरण की जाती हैं जब पंडित जवाहर लाल नेहरू यहां पहुंचे. चर्चित व वरिष्ठ पत्रकार रहे मुकुटधारी अग्रवाल ने पंडित नेहरू से जुड़ा ऐसा ही एक वाक्या अपने फेसबुक पेज पर पोस्ट के जरिये कभी शेयर किया था.

चुनाव के सिलसिले में भागलपुर पहुंचे पंडित नेहरू

भागलपुर निवासी पत्रकार व चेंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष रहे मुकुटधारी अग्रवाल अब इस दुनिया में नहीं रहे. शहर उन्हें इनसाइक्लोपीडिया भी कहने से नहीं चूकता था. दरअसल, मुकुटधारी अग्रवाल आजादी से पूर्व के भारत और स्वतंत्रता के ठीक बाद के घटनाक्रमों को फेसबुक पर अक्सर लिखा करते थे. इसी क्रम में नबंर, 2017 में उन्होंने पंडित नेहरू से जुड़ा एक वाक्या शेयर किया था जब वो 1957 में चुनाव के सिलसिले में भागलपुर पहुंचे थे.

छोले खाने के शौकीन थे पंडित नेहरू

स्व. मुकुटधारी अग्रवाल ने उस वाक्ये को याद करते हुए लिखा था कि पंडित नेहरू को छोले काफी प्रिय थे. जब वो बनारस आते तो अपने सहयोगी कांग्रेस नेता श्री प्रकाशा के सिगरा स्थित निवास पर ठहरते थे और छोला खाने की फरमाइश जरुर करते. श्री प्रकाश की छोटी बेटी सुधावती उनके लिए छोले बनाती थीं और नेहरू जी बड़े चाव से खाते. सुधावती की शादी बाद में भागलपुर के सत्येंद्र नारायण अग्रवाल से हुई. वो भागलपुर से कांग्रेस विधायक, विधान सभा उपाध्यक्ष और भागलपुर विश्विद्यालय के कुलपति भी बने.

छोले लेकर सर्किट हाउस पहुंचीं सुधावती

1957 में जब चुनाव के सिलसिले में पंडित नेहरू भागलपुर आए तो सुधावती को यह याद था कि पंडित जी को छोला काफी पसंद है. अपने हाथों से बना छोला उन्होंने फौरन तैयार किया. मुकुटधारी अग्रवाल ने तब लिखा कि उस समय प्रधानमंत्री की सुरक्षा का इतना व्यापक इंतजाम नहीं होता था. सुधावती को उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा के कारण सभी पदाधाकारी भी जानते थे इसलिए तमाम प्रशासनिक स्वीकृति लेने के बाद सुधावती, उनकी बडी बेटी व मुकुटधारी अग्रवाल एक सेवक के साथ सर्किट हाउस पहुंच गये.

जब छोले देखकर पंडित नेहरू ने कहा- तुम्हें आज भी सब याद है…

पंडित नेहरू अंदर कमरे में बैठे थे. वापसी के लिए वो विमान का इंतजार कर रहे थे. कमरे में जैसे ही सभी प्रवेश किये, नेहरू जी ने हाथ का सिगरेट फौरन बुझाया और कहा कि आओ सुधा, मैं तुम्हारा ही इंतजार कर रहा था. सुधावती ने थोड़ी देर बातचीत के बाद कपड़े से ढका शीशे का बर्तन खोला तो नेहरू जी ने पूछा-यह क्या है. सुधा ने कहा कि आपके लिए छोले लाई हूं. आपको तो बहुत पसंद हैं. बाबूजी के पास आने पर आप ये अक्सर खाते थे. जिसपर नेहरू जी ठहाके लगाकर हंस पड़े और कहा- तुम्हें आज भी सब याद है. और नेहरू जी छोले खाने लगे.

कांग्रेस नेताओं से मिलकर विदा हुए पंडित नेहरू

मुकुटधारी अग्रवाल लिखते हैं कि दो चम्मच छोले नेहरू जी ने खाये ही थे कि सेक्रेटरी ने आकर प्लेन लेंड हो जाने की जानकारी दी. नेहरू जी ने अपनी टोपी पहनी और खड़े हो गये. सुधावती को दिल्ली आने का न्योता दिया. कई स्थानीय कांग्रेस नेता भी तबतक आ गये. सबसे मुलाकात करके पंडित नेहरू भागलपुर से विदा हुए.

POSTED BY: Thakur Shaktilochan

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