भूकंपरोधी मकान नहीं बनाना अपराध : नीतीश कुमार

पटना: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि वर्तमान में आये भूकंप में यदि मकान नहीं गिरा, तो खुश नहीं होना चाहिए. इस बार भूकंप का केंद्र पहाड़ में था. मैदानी इलाके में केंद्र होता, तो इसका कितना बड़ा असर होता, यह समझा जा सकता है. यह तो सबको मालूम है कि एक दिन सबको जाना […]
कृपा कर इसका पालन करें. वे होटल पाटलिपुत्र में आयोजित आपदा प्रबंधन विभाग के दो दिवसीय आपदा न्यूनीकरण सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि भूकंपरोधी मकान नहीं बनाना अपराध है. सरकारी और निजी भवन भूकंपरोधी बनना चाहिए. मंगलवार को आये भूकंप की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि यह तो चेतावनी है.
ऐसा नहीं करेंगे तो यह आत्मघाती होगा. इस भूकंप के पूर्व हमलोग इसे पढ़ते थे, अब महसूस कर रहे हैं. कल्पना कीजिए यदि यही भूकंप रात में आता तो क्या होता? मुख्यमंत्री ने कहा कि भूकंप के बाद कल हम घूम रहे थे. पिछली बार की अपेक्षा लोगों में कम दहशत नहीं था. आपदा न्यूनीकरण पर आयोजित पहले सम्मेलन में शामिल भवन निर्माताओं से भवन ऐसा बनाइए कि वह सुरक्षित हो. यह ऐसी आपदा है कि इसमें लोगों को जानकारी भी नहीं मिलती है. पिछले दिनों आये भूकंप में दुष्प्रचार करनेवालों को शैतान बताते हुए उन्होंने कहा कि यहां तक अफवाह फैला दी गयी कि चांद ही उलटा हो गया. हमारे कुछ लोग भी मानने के लिए तैयार नहीं थे. जब हमने कहा कि पिछले साल आज ही के दिन आपने चांद देखा था? तब जाकर लोग माने.
भूकंप मामले के विशेषज्ञ प्रो एएस आर्या ने कहा कि 1934 के तरह यदि हाल में आये भूकंप का केंद्र बिहार-नेपाल की सीमा पर होता तो बिहार का हाल अहमदाबाद वाला होता. उन्होंने कहा कि मात्र पांच प्रतिशत अधिक लागत से भूकंपरोधी मकान बना सकते हैं. पुराने मकान को दस प्रतिशत लागत पर भूकंपरोधी बनाया जा सकता है. सरकार को प्रतिवर्ष सौ करोड़ बजट में पुराने भवनों को रेट्रोफिटिटिंग मद में देने का सुझाव दिया. सम्मेलन को मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह, सदस्य राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकार, कमल किशोर, नेशनल इंस्टीच्यूट ऑफ डिजास्टर मैनेजमेंट के निदेशक, संतोष कुमार, सदस्य, बिहार राज्य आपदा, व्यास जी, प्रधान सचिव आपदा प्रबंधन विभाग ने संबोधित किया. इस अवसर पर प्रधान सचिव आपदा प्रबंधन व्यास जी ने मुख्यमंत्री को प्रतीक चिह्न् भेंट कर स्वागत किया.
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