मध्यमवर्गीय परिवार से सत्ता के गलियारों तक पहुंचने की प्रशांत किशोर की कहानी

Author : Prabhat Khabar Digital Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 18 Feb 2020 11:37 AM

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पटना : आज देश में अगर चुनाव रणनीतिकारों की बात की जाती है, तो प्रशांत किशोर का नाम सबसे पहले जेहन में आता है. राजनीतिक पार्टियां चुनाव जीतने के लिए प्रशांत किशोर का सहारा लेना सबसे ज्यादा पसंद करती हैं. पर्दे के पीछे रह कर लोगों को सत्ता के गलियारों तक पंहुचाने वाले प्रशांत किशोर […]

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पटना : आज देश में अगर चुनाव रणनीतिकारों की बात की जाती है, तो प्रशांत किशोर का नाम सबसे पहले जेहन में आता है. राजनीतिक पार्टियां चुनाव जीतने के लिए प्रशांत किशोर का सहारा लेना सबसे ज्यादा पसंद करती हैं. पर्दे के पीछे रह कर लोगों को सत्ता के गलियारों तक पंहुचाने वाले प्रशांत किशोर बिहार के विकास के लिए युवाओं को जोड़ने की मुहिम शुरू कर रहे हैं. एक मध्यमवर्गीय परिवार से सत्ता के गलियारों तक पहुंचनेवाले प्रशांत किशोर की क्या है कहानी…? पढ़ें…

मध्यमवर्गीय परिवार से निकल कर पहुंचे सत्ता के गलियारों तक
मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे प्रशांत किशोर बिहार के बक्सर जिले से ताल्लुक रखते हैं. उनके पिता पेशे से डॉक्टर हैं और बक्सर में ही अपना क्लिनिक चलाते हैं. प्रशांत की पत्नी जाह्नवी दास भी पेशे से डॉक्टर है. प्रशांत ने अपनी 12वीं की पढ़ाई पटना के सांइस कॉलेज से की. उसके बाद हैदराबाद के एक कॉलेज से इंजीनियरिंग की. इसके बाद उन्होंने अफ्रीका में हेल्‍थ एक्‍सपर्ट के तौर पर काम किया है. नौकरी छोड़कर प्रशांत किशोर साल 2011 में भारत लौट आये.
चुनावी रणनीतिकार के रूप में बनायी पहचान
भारत लौटने पर साल 2013 में प्रशांत किशोर ने सिटीजन्स फॉर अकाउंटेबल गवर्नेंस (सीएजी) नाम से एक एनजीओ बनाया. इसी एनजीओ का नाम बाद में इंडियन पॉलीटिकल एक्शन कमेटी (आईपैक) हो गया. इस कंपनी का काम चुनाव में राजनीतिक पार्टियों के लिए प्रभावी नीति बनाना हो गया. प्रशांत किशोर ने हीप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए चुनावी रणनीतिकार का काम किया साल 2014 के लोकसभा चुनाव में किया था. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक ब्रांड की तरह पेश किया और बीजेपी की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी. इस जीत के बाद बीजेपी ने उनसे किनारा कर लिया. साल 2015 बिहार विधानसभा चुनाव में जेडीयू और आरजेडी गठबंधन की जीत में प्रशांत किशोर की भूमिका महत्वपूर्ण रही. इसके बाद उन्हें चुनावी रणनीतिकार के रूप में पूरे देश में पहचान मिली.
बिहार में सफल चुनावी कैंपेन के बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के लिए काम किया, लेकिन उनका यह शो पूरी तरह फ्लॉप रहा. इसके बाद उन्होंने पंजाब में कैप्टन अमिरिंदर सिंह और तेलंगाना में जगनमोहन रेड्डी लिए सफल चुनाव कैंपेन किया. बंगाल में होनेवाले आगामी विधानसभा चुनाव में वह ममता बनर्जी के लिए काम करने जा रहे हैं. साथ हीडीएमके के साथ प्रशांत किशोर ने हाथ मिलाया है.
राजनीति में प्रवेश
साल 2015 में बिहार विधानसभा चुनाव में जेडीयू को जीत मिली, इसके बाद 2018 में प्रशांत किशोर ने चुनावी राजनीति की पारी की शुरुआत जनता दल यूनाइटेड से करने का फैसला किया. हालांकि, यह सफर ज्यादा दिनों तक नहीं चल सका और दो साल बाद प्रशांत को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया.
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