तब नाला सतह से दस फुट नीचे था
Updated at : 06 Oct 2019 7:43 AM (IST)
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पाटलिपुत्र नगर की स्थापना भगवान बुद्ध के जीवन के अंतिम वर्ष में हुई. जिस नगर को अजातशत्रु ने प्रारंभ किया, नंदों ने सजाया-संवारा और अशोक महान ने इसके सौंदर्य गरिमा को शिखर पर पहुंचाया. पाटलिपुत्र बहुत ही सुनियोजित एवं सुव्यवस्थित नगर था. नगर की जल आपूर्ति, मलप्रवाह व्यवस्था और स्वच्छता काफी अच्छी थी. पाटलिपुत्र नगर […]
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पाटलिपुत्र नगर की स्थापना भगवान बुद्ध के जीवन के अंतिम वर्ष में हुई. जिस नगर को अजातशत्रु ने प्रारंभ किया, नंदों ने सजाया-संवारा और अशोक महान ने इसके सौंदर्य गरिमा को शिखर पर पहुंचाया. पाटलिपुत्र बहुत ही सुनियोजित एवं सुव्यवस्थित नगर था. नगर की जल आपूर्ति, मलप्रवाह व्यवस्था और स्वच्छता काफी अच्छी थी. पाटलिपुत्र नगर प्रशासन का बहुत विस्तृत विवरण मेगास्थनीज ने दिया है.
अपने यात्रा वर्णन में मेगास्थनीज ने पाटलिपुत्र नगर की बनावट के संबंध में बताया है कि यह नगर चारों तरफ से लकड़ी की दीवारों से घिरा था. इस प्राचीर की बनावट बाढ़, डाकुओं और आक्रमणकारियों से बचने के लिए किया गया था. प्राचीर के बाद चारों ओर से एक खायी थी, जिसकी चौड़ाई सौ फीट थी तथा आठ फुट गहरी थी. दुर्ग से बाहर आने के लिए फाटक बने थे. इस चीनी विवरण के अनुसार नगर के चारों तरफ की खायी पानी से भरी रहती थी.
इस नगर के पास ही गंगा नदी बहती थी. मेगास्थनीज के विवरणों की प्रामाणिकता पुरातात्विक खुदाई से होती है. इसके अवशेष बुलंदीबाग, कुम्हार, सदरगली, कंकड़बाग तथा पटना सिटी के दर्जनों स्थानों से मिले हैं. खुदाई में लकड़ी के बने नालों की जानकारी मिली है, जो जमीन के अंदर बने होते थे. पटना के पुल के बाग नामक स्थान से 40 फुट लंबे नाले का अस्तित्व मिला है.
यह नाला सतह से दस फुट नीचे था. यह दो लाइनों में बहता था. यह लकड़ी का बना था. सड़क की दोनों ओर इस नाले को सही ढंग से रखने तथा वह हिलेडुले नहीं, इसके लिए उसमें दो फुट लंबे लोहे के कील को ठोका गया था. लकड़ी के नाले के अवशेष बुलंदी बाग से भी मिले हैं. यहीं कारण है कि प्राचीन पटना यानी पटना सिटी के इलाके में जल-जमाव की स्थिति कभी पैदा नहीं होती है.
साथ ही पटना सिटी सतह से ऊंचे होने के कारण भी जल-जमाव की समस्या से यहां के लोगों को सामना नहीं करना पड़ता है. पाटलिपुत्र की नगर योजना काफी व्यवस्थित थी. सड़क एवं नाली की योजना भी आज के पटना का विस्तार बिना किसी योजना का हुआ है और आज भी हो रहा है. नाले जो बने हैं उनकी गहराई कम है तथा एक नाला दूसरे से जोड़े नहीं गये हैं.
नये नाले जो बह रहे हैं उनको किसी बड़े नाले से नहीं जोड़ा जा रहा है. मकान लो लैंड में बने हैं. दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति के अभाव में मुस्तैदी से कार्य नहीं हो रहा है. ड्रेनेज सिस्टम को व्यवस्थित करने के लिए सरकार को बड़े पैमाने पर कार्य करना होगा तथा बिना योजना के सड़क-नाली बनाये आवास बनाने पर रोक लगनी चाहिए.
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