पटना सिटी : समाज में फैले ज्ञान की रोशनी, जलती रहे शिक्षा की लौ

Updated at : 04 Sep 2019 9:06 AM (IST)
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पटना सिटी : समाज में फैले ज्ञान की रोशनी, जलती रहे शिक्षा की लौ

अमिताभ श्रीवास्तव पेंशन के पैसे से स्लम के बच्चों को देते हैं तालीम पटना सिटी : सेवानिवृत्ति के 16 वर्ष बाद भी हर बच्चों को तालीम मिले, इसी संकल्प के साथ स्लम बस्ती के बच्चों को चिह्नित कर उनको पढ़ाते हैं पद्यम देव सिंह चंद्रिका जी. उम्र के 80 पड़ाव पर जीवन बीता रहे चंद्रिका […]

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अमिताभ श्रीवास्तव
पेंशन के पैसे से स्लम के बच्चों को देते हैं तालीम
पटना सिटी : सेवानिवृत्ति के 16 वर्ष बाद भी हर बच्चों को तालीम मिले, इसी संकल्प के साथ स्लम बस्ती के बच्चों को चिह्नित कर उनको पढ़ाते हैं पद्यम देव सिंह चंद्रिका जी. उम्र के 80 पड़ाव पर जीवन बीता रहे चंद्रिका जी श्री गुरु गोबिंद सिंह बालिका उच्च विद्यालय से वर्ष 2003 में सेवानिवृत्त हुए थे.
इसके बाद भी पढ़ाने का जुनून इस कदर कायम रखा की आज भी वह स्लम बस्ती में जाकर बच्चों को पढ़ाने के साथ ही उनको पाठ्य सामग्री भी उपलब्ध कराते हैं. यह सब वह अपनी पेंशन की राशि से करते हैं. स्वर्गीय मोती देवी एजुकेशन वेलफेयर ट्रस्ट से जुड़ कर वह मालसलामी स्थित सर्वोदय एजुकेशन सेंटर व हाजीगंज स्थित सर्वोदय इंफैट एकेडमी में भी नियमित तौर पर बच्चों को धार्मिक व नैतिक शिक्षा का पाठ पढ़ाते हैं.
वह कहते हैं कि 14 वर्ष की आयु में गुरु सेवानंद गिरी शिक्षा ग्रहण करने के बाद गुरु जी ने ही आदेश दिया था कि गृहस्थ जीवन व्यतीत करते हुए भी समाज में शिक्षा की लौ मंद नहीं पड़े, इसके लिए कार्य करना, उसी भावना से आज कार्य कर रहे हैं. उनके इस काम में पुत्र पंकज किशोर सिंह व कृष्ण किशोर सिंह भी मदद करते हैं. ठंड के मौसम में बस्ती में जाकर कंबल का वितरण भी करते हैं.
ईंट भट्ठा श्रमिकों के बच्चों का निजी विद्यालय में कराते हैं नामांकन
स्लम बस्ती में रहने वाले बच्चों व ईंट-भट्ठों में कार्य करने वाले श्रमिकों के बच्चों को तालीम मिले, इसके लिए पटना सिटी प्राइवेट स्कूल वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष शंकर चौधरी कार्य करते हैं. वह स्लम बस्ती शरीफागंज, बेगमपुर, अगमकुआं, कुम्हरार में रहने वाले बच्चों को सप्ताह में एक दिन भोजन कराने के साथ पढ़ाने के लिए किताब, कॉपी, स्कूल यूनिफार्म उपलब्ध कराते हैं.
इन बच्चों को कक्षा एक से लेकर अष्टम वर्ग तक की पढ़ाई करा सकें. इसके लिए बस्ती के समीप में स्थित निजी विद्यालय में इन बच्चों का नामांकन कराया जाता है. जहां नि:शुल्क पढ़ाई हो सके. कुछ इसी तरह की स्थिति ईंट भट्ठों पर कार्यरत श्रमिकों के बच्चों को पढ़ाने में अपनायी जाती है.
खुद के संस्थान में नवम व दशम वर्ग के विद्यार्थियों के लिए जो सरकारी विद्यालय में पढ़ते हैं. उनके लिए नि:शुल्क कोचिंग की कराते हैं. स्लम बस्ती के बच्चों को पढ़ाने के लिए मंदिर में तारणी प्रसाद लेन घसियारी गली, चौकशिकारपुर व गड़हइया बिजली ऑफिस गली में विद्यालय चलाते थे, लेकिन मंदिर में होने के कारण इसे बंद करना पड़ा. अब बस्ती के बच्चों का नामांकन करा पढ़ाते हैं.
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