पटना : मासिक रिटर्न से नहीं हो रहा वार्षिक रिटर्न का मिलान

Updated at : 21 Aug 2019 9:00 AM (IST)
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पटना : मासिक रिटर्न से नहीं हो रहा वार्षिक रिटर्न का मिलान

त्रुटियों से कारोबारी हैं परेशान पटना : जीएसटी अब तक कारोबारियों के साथ-साथ एकाउंटेंट के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है, जबकि वार्षिक रिटर्न फाइल करने की अंतिम तारीख 31 अगस्त है यानी कारोबारियों के पास महज 10 दिन बचे हुए हैं. मासिक रिटर्न और वार्षिक रिटर्न की जानकारी अलग-अलग होने के कारण 31 […]

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त्रुटियों से कारोबारी हैं परेशान
पटना : जीएसटी अब तक कारोबारियों के साथ-साथ एकाउंटेंट के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है, जबकि वार्षिक रिटर्न फाइल करने की अंतिम तारीख 31 अगस्त है यानी कारोबारियों के पास महज 10 दिन बचे हुए हैं. मासिक रिटर्न और वार्षिक रिटर्न की जानकारी अलग-अलग होने के कारण 31 अगस्त तक सभी कारोबारियों के लिए रिटर्न जमा करना मुश्किल है. रिटर्न फाइल करने की तकनीकी जटिलताएं दूर करने के लिए फॉर्मेट में सुधार के साथ एक बार फिर अंतिम तारीख बढ़ाने की मांग उठ रही है.
कंप्यूटर कारोबारी अजय अग्रवाल कहते हैं कि जीएसटी की वार्षिक रिटर्न फाइल करने की अंतिम तारीख 31 दिसंबर थी, जो बाद में बढ़ा कर 31 मार्च और फिर 31 अगस्त कर दी गयी. वार्षिक रिटर्न का फॉर्मेट आने के बाद अब हर मासिक रिटर्न की डिटेल्स मांगी जा रही है. दवा कारोबारी अमर सिंह ने बताया कि वार्षिक रिटर्न फाइल करते समय मासिक रिटर्न की त्रुटियां दिखीं मगर इसमें सुधार की कोई गुंजाइश नहीं है.
वार्षिक रिटर्न फाइल नहीं करने पर पेनल्टी भी : साथ ही पुरानी इनपुट टैक्स क्रेडिट निकलने के बावजूद वार्षिक रिटर्न में इसका लाभ नहीं दिया जा रहा है, जबकि कारोबारियों को पूरी रकम जमा करने को कहा जा रहा है. सख्ती के कारण कारोबारियों को भय है कि त्रुटिपूर्ण रिटर्न फाइल करने से उन्हें नोटिस का सामना करना होगा. जीएसटी के जानकार उमा शंकर सिंह बताते हैं कि समय पर वार्षिक रिटर्न फाइल नहीं किया गया, तो 18 फीसदी ब्याज के साथ पेनल्टी भी लगेगी.
सीए राजेश कुमार खेतान का कहना है कि सरकार को इस दिशा में निर्णय लेते हुई सभी को आरंभिक 2 वर्षों में राहत देनी चाहिए. टेबल 6 में मांगे जाने वाले इनपुट टैक्स क्रेडिट को अलग -अलग देने की बाध्यता समाप्त करनी चाहिए .
उन्होंने कहा कि साथ ही टेबल 18 में तो खरीदे गये सामान का इनपुट क्रेडिट का ब्योरा देना तो लगभग असंभव ही है. जब तक इस दिशा में सरकार कोई उचित कदम नहीं उठायेगी तब तक समय पर एनुअल रिटर्न दाखिल हो पाना एक बड़ी चुनौती है.
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