अफसरों ने चेक पर मलिक की जगह माली लिखा, अब मुआवजा राशि के लिए अंचल कार्यालय, सचिवालय थाने का लगा रहे चक्कर

Updated at : 11 Aug 2019 5:17 AM (IST)
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अफसरों ने चेक पर मलिक की जगह माली लिखा, अब मुआवजा राशि के लिए अंचल कार्यालय, सचिवालय थाने का लगा रहे चक्कर

अनिकेत त्रिवेदी, पटना : अब इसे सरकारी काम की सुस्ती कहेंगे या संवेदनहीनता. बीते एक माह से यारपुर में दिवार गिरने से मरे दो बच्चों के परिजन सरकारी चेक से मुआवजा राशि का पैसा भुनाने के लिए कभी सदर अंचल कार्यालय तो कभी सचिवालय थाने का चक्कर लगा रहे हैं.दरअसल, चेक पर लिखे सरनेम में […]

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अनिकेत त्रिवेदी, पटना : अब इसे सरकारी काम की सुस्ती कहेंगे या संवेदनहीनता. बीते एक माह से यारपुर में दिवार गिरने से मरे दो बच्चों के परिजन सरकारी चेक से मुआवजा राशि का पैसा भुनाने के लिए कभी सदर अंचल कार्यालय तो कभी सचिवालय थाने का चक्कर लगा रहे हैं.दरअसल, चेक पर लिखे सरनेम में गड़बड़ी से बैंक पैसे का भुगतान नहीं कर रहा है. बैंक कहा रहा है कि चेक को सुधार कर लाएं. परिजन सदर अंचल में सीओ व संबंधित अधिकारी से सुधार के लिए गुहार लगा रहे हैं. तो, वहां से पहले मृत्यु प्रमाण पत्र, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और एफआइआर की कॉपी लाने को कहा जा रहा है.

थाने में नहीं आयी पोस्टमार्टम रिपोर्ट
मृतक के पिता सुरेश मलिक बताते हैं कि थाने का कहना है कि अभी तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट पीएमसीएच से नहीं आयी है. डाॅक्टरों ने हस्ताक्षर नहीं किये हैं. जब तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं आती है, मृत्यु प्रमाण पत्र भी नहीं बन सकते हैं. कुल मिला कर मामला थाने, सदर अंचल और पीएमसीएच के बीच झूल रहा है.
क्या हुई है गड़बड़ी
बीते नौ जुलाई की रात में यारपुर में बीएसएनएल की दिवार गिरने से सुरेश मलिक की चार माह की बेटी नंदिनी कुमारी और विनोद मलिक के बेटे सूरज उर्फ विशाल की मौत हो गयी थी.
उस समय प्रशासन ने आनन-फानन दोनों मृतक के परिजनों के नाम चार-चार लाख रुपये का चेक जारी कर दिया था. लेकिन, अधिकारियों ने मृतक के परिजनों के बगैर आधार कार्ड देखे चेक में सरनेम में मलिक की जगह माली लिख गया.
अब पैसा मिले तो घायलों का हो इलाज
इस हादसे दो बच्चे जैकी व गोल्डेन भी गंभीर रूप से घायल हो गये थे. प्रशासन ने उनको पीएमसीएच में भर्ती कराया था. लेकिन, सुविधाजनक इलाज के लिए परिजनों ने एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया.
जैकी के पैर में लोहे की रड पड़ी व जले गोल्डेन का इलाज हुआ. बाद में पैसे के अभाव में निजी अस्पताल ने दोनों को निकाल दिया. अब परिजन इंतजार कर रहे हैं कि मृतकों का पैसा मिले तो उनका बेहतर इलाज हो.
सफाई कर्मी का काम करता है सुरेश
सुरेश मलिक पटना जंक्शन पर निजी एजेंसी के माध्यम से सफाई कर्मी का काम करता है. एक माह से इलाज के चक्कर में नियमित काम पर नहीं जाता. सुरेश मूल रूप से वैशाली का रहने वाला है.
नहीं मिला पैसा
कई बार अंचल कार्यालय व थाने का चक्कर लगा चुके हैं. कब पोस्टमार्टम रिपोर्ट आयेगी. कब अंचल की ओर से नाम सुधार किया जायेगा. कोई जानकारी नहीं मिल रही है. एक माह हो गया, लेकिन पैसा आज तक नहीं मिला.मामले को संज्ञान लिया जा रहा है. संबंधित अधिकारी को देखने व परिजनों को राशि भुगतान करने के निर्देश दिये जायेंगे.
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