पटना : छोटी कमियों से बंद पड़ी हैं पीएमसीएच की पांच मशीनें

Updated at : 26 Mar 2019 5:11 AM (IST)
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पटना : छोटी कमियों से बंद पड़ी हैं पीएमसीएच की पांच मशीनें

निजी अस्पताल के चक्कर लगा रहे मरीज पटना : दूरदराज से इलाज की आस लेकर आये करीब 300 से अधिक मरीजों को पीएमसीएच से बाहर जांच करानी पड़ रही है. क्योंकि, अस्पताल में पांच ऐसी जांच की मशीनें हैं, जो धूल फांक रही हैं. इनसे कई बीमारियों की जांच बाधित हैं. मरीज अस्पताल से परामर्श […]

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निजी अस्पताल के चक्कर लगा रहे मरीज
पटना : दूरदराज से इलाज की आस लेकर आये करीब 300 से अधिक मरीजों को पीएमसीएच से बाहर जांच करानी पड़ रही है. क्योंकि, अस्पताल में पांच ऐसी जांच की मशीनें हैं, जो धूल फांक रही हैं. इनसे कई बीमारियों की जांच बाधित हैं. मरीज अस्पताल से परामर्श लेकर जांच बाहर से करा रहे हैं.
बंद है टीएमटी जांच मशीन : पीएमसीएच के टीबी व चेस्ट विभाग की बगल में बंद पड़े कमरे में रखी टीएमटी (ट्रेड मिल टेस्ट) मशीन तीन साल पहले ही पीएमसीएच में लायी गयी. लेकिन, आज तक इसे चालू नहीं किया जा सका. जबकि, इस मशीन से मरीज को दौड़ा या चलाकर दिल की नसों पर पड़ने वाले जोर को कंप्यूटर पर देख कर रिपोर्ट बनायी जाती है. हार्ट अटैक की आशंका व धड़कन की जांच के लिए इसका प्रयोग किया जाता है.
बक्टेक मशीन खराब, एक सप्ताह बाद मिल रही रिपोर्ट : बैक्टीरियल ऑर्गन जांच के लिए इस्तेमाल की जाने वाली लेटेस्ट बैक्टेक मशीन खराब है. ऐसे में मरीजों को जांच के प्राइवेट लैब में जाकर करीब 2500 रुपये खर्च कराना पड़ रहा है.
इस मशीन से यूरिन, ब्लड कल्चर व छाती की जांच की जाती है. हालांकि, अस्पताल प्रशासन वैकल्पिक तौर पर बैक्टीरियल ऑर्गन की जांच रूटीन मैथड से करा रहे हैं. रिपोर्ट के लिए मरीजों को सात दिन बाद बुलाया जा रहा है.
डायलिसिस मशीन : पीएमसीएच में पांच डायलिसिस मशीन 2016 से खराब हैं. 11 में सिर्फ छह मशीन है, जो पूरी तरह से ठीक है. किसी में पानी नहीं है तो किसी की लाइट, स्लाइड व दूसरे पाॅर्ट्स खराब हैं. मरम्मत के लिए सरकार ने कंपनी को जिम्मेदारी दी थी. भुगतान नहीं होने से फरवरी, 2017 में कंपनी ने काम करने से इन्कार कर दिया.
स्किन विभाग में खराब हैं दो मशीनें : स्कीन विभाग में करीब एक करोड़ की लागत से आइपीएल, एनडी याग व आइएंटो फोरेसिस कुल तीन मशीनें खरीदी गयी थी. लेकिन, मेंटेनेंस के अभाव में दो मशीनें खराब हैं. इसमें आइपीएल मशीन करीब दो वर्षों से खराब पड़ी है. जबकि, आइएंटो फोरेसिस मशीन छह महीने से खराब है.
करायी जा रही हैं ठीक
छह माह के अंदर बहुत-सी मशीनें ठीक करायी जा चुकी हैं और कई के पाॅर्ट्स बदल नया कर दिया गया है, जिससे जांच हो रही है. वहीं, जो मशीनें खराब हैं, उन्हें भी ठीक करा लिया जायेगा.
डॉ आरके जैमेयार, उपाधीक्षक, पीएमसीएच
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