पटना : शिक्षकों की संख्या करनी होगी दोगुनी

Updated at : 15 Dec 2018 2:07 AM (IST)
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पटना  : शिक्षकों की संख्या करनी होगी दोगुनी

पटना : बीएड चार वर्षीया इंटीग्रेटेड कोर्स के लिए शिक्षकों की दोगुनी व्यवस्था करनी होगी. बीएड काॅलेजों में शिक्षकों की संख्या काफी कम है. इन्फ्रास्ट्रक्चर को भी बढ़ाना होगा. चार वर्षीया कोर्स इंटीग्रेटेड होगा अर्थात सभी ऑनर्स विषयों के साथ बीएड कोर्स की भी पढ़ाई साथ-साथ होगी. ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि अन्य […]

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पटना : बीएड चार वर्षीया इंटीग्रेटेड कोर्स के लिए शिक्षकों की दोगुनी व्यवस्था करनी होगी. बीएड काॅलेजों में शिक्षकों की संख्या काफी कम है. इन्फ्रास्ट्रक्चर को भी बढ़ाना होगा. चार वर्षीया कोर्स इंटीग्रेटेड होगा अर्थात सभी ऑनर्स विषयों के साथ बीएड कोर्स की भी पढ़ाई साथ-साथ होगी.
ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि अन्य विषयों को पढ़ाने के लिए शिक्षक कहां से आयेंगे या फिर इसे उन्हीं कॉलेजों में खोला जायेगा, जहां पहले से ऑनर्स विषयों की पढ़ाई होगी. इन सबको लेकर वर्तमान में जो बीएड कॉलेज हैं वे कंफ्यूज्ड हैं और उन्हें समझ में नहीं आ रहा कि आखिर इसे किस तरह से लागू किया जायेगा.
बीएड के जानकार बताते हैं कि सरकार हर बार नयी-नयी नीतियां बनाती है. नयी नीति का कुछ लोग समर्थन कर रहे हैं, तो कुछ इसके विरोध में भी हैं. कुछ लोगों का मानना है कि इससे एंटीग्रेटेड कोर्स होने से छात्र पहले से निर्णय लिए रहेंगे कि उन्हें शिक्षक ही बनना है और इस प्रकार अच्छे प्रशिक्षित शिक्षक स्कूलों को मिलेंगे, जिनका लक्ष्य निर्धारित रहेगा.
वहीं, दूसरा पक्ष यह कह रहा है कि इससे अनावश्यक परेशानी होगी. अभी कम-से-कम स्नातक के बाद कई तरह के क्षेत्र चुनने का छात्रों के पास ऑप्शन रहता है.
लेकिन, उस समय वे सिर्फ शिक्षक ही बन पायेंगे और शिक्षकों के लिए पोस्ट काफी कम हैं. इसी तरह चार वर्षीय कोर्स काफी बोझिल हो जायेगा. इसमें शिक्षकों की संख्या भी बढ़ानी होगी. शिक्षक वर्तमान में ही काफी कम है. एडहॉक बेसिस पर सारे शिक्षक काम कर रहे हैं.
अनसुलझे हैं कई सवाल
यही नहीं जो छात्र जिस विषय में इंटीग्रेटेड कोर्स करेगा उक्त विषय के लिए विशेषज्ञ शिक्षक इतनी तादाद में कैसे रखे जायेंगे. अगर इतने शिक्षक नहीं रखे जायेंगे, तो फिर उन्हें ऑनर्स विषय कौन पढ़ायेगा. कुछ ऐसे ही सवाल हैं जो अभी अनसुलझे हैं. कुछ शिक्षकों का मामना है कि यह अब फर्स्ट स्टेज में हैं और जब तक कि नोटिफिकेशन सभी कॉलेजों और विवि को नहीं आ जाता अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी.
वहीं एनसीटीई को राजभवन व राज्य सरकार किस प्रकार लागू करती है यह भी देखने वाली बात होगी. कुछ शिक्षकों का मत है कि इसे हर कॉलेज में किया जायेगा.
वहीं अपने कॉलेज में छात्र ऑनर्स विषय के साथ ही बीएड की पढ़ाई कर लेंगे. ऐसे में इसे लागू करना अधिक आसान होगा. अन्यथा प्राइवेट कॉलेजों को भी आर्ट्स, साइंस या कॉमर्स के कोर्स चलाने होंगे.
चार वर्षीया कोर्स मेरे समझ से थोड़ा बोझिल होगा. दो वर्षीया कोर्स अधिक उपयुक्त है. चार वर्षीया इंटीग्रेटेड कोर्स करने पर सबसे बड़ी समस्या शिक्षकों व इन्फ्रास्ट्रक्चर की आयेगी.
प्रो ललित कुमार, प्राचार्य, पटना ट्रेनिंग कॉलेज
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