पटना : प्रमोशन नहीं मिलने से मगध महिला कॉलेज की प्राचार्या ने दिया इस्तीफा, लगाया जातिवाद का आरोप
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 12 Jul 2018 6:25 AM
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पटना : मगध महिला कॉलेज की प्राचार्या शशि शर्मा ने बुधवार को इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने विवि प्रशासन पर उनकी जाति से प्रभावित होकर प्रमोशन नहीं करने का आरोप लगाया गया है. उनका कहना है कि जानबूझ कर उन्हें डिमोट किया गया है, जबकि उनका प्रमोशन काफी पहले कर दिया गया था. हालांकि यह […]
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पटना : मगध महिला कॉलेज की प्राचार्या शशि शर्मा ने बुधवार को इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने विवि प्रशासन पर उनकी जाति से प्रभावित होकर प्रमोशन नहीं करने का आरोप लगाया गया है.
उनका कहना है कि जानबूझ कर उन्हें डिमोट किया गया है, जबकि उनका प्रमोशन काफी पहले कर दिया गया था. हालांकि यह निर्णय सेलेक्शन कमेटी द्वारा लिया गया है, जिसे पीयू सिंडिकेट द्वारा सर्वसम्मति से स्वीकृत भी किया गया है.
विवि से मिली जानकारी के पूर्व में सेलेक्शन कमेटी द्वारा किये गये सेलेक्शन में प्रो शशि शर्मा का प्रमोशन रीडर से प्रोफेसर में किया गया था, उसे न्यायालय में तब चैलेंज किया गया था. इसके बाद न्यायालय का आदेश हुआ कि फिर से एक सेलेक्शन कमेटी बनायी जाये और यह प्रक्रिया पूरी की जाये.
आदेश के बाद ही नयी सेलेक्शन कमेटी बनी लेकिन इस बार कमेटी ने प्रो शशि शर्मा का प्रमोशन रिकमेंड ही नहीं किया. नयी कमेटी ने उन्हें उक्त पोस्ट के लिए योग्य नहीं समझा. इसके बाद दो दिन पूर्व नोटिफिकेशन जारी किया गया, जिसमें राजनीति शास्त्र में प्रोफेसर के पद पर ग्रांट किये गये प्रमोशन को रद्द कर दिया गया.
सेलेक्शन कमेटी जो रिकमेंड करती है
वही निर्णय मान्य होता है
प्रो शशि शर्मा द्वारा लगाये गये आरोप का विवि प्रशासन ने खंडन किया है. विवि प्रशासन ने कहा कि इस तरह का निर्णय कोई एक व्यक्ति ले ही नहीं सकता, सेलेक्शन कमेटी एक तरह से आयोग की तरह ही काम करती है.
वह जो रिकमेंड करती है, वही निर्णय मान्य होता है और सेलेक्शन कमेटी द्वारा शशि शर्मा के प्रमोशन को रिकमेंड ही नहीं किया गया. वहीं दूसरी तरफ प्रो शशि शर्मा का कहना है कि विवि प्रशासन ने जाति की वजह से उनका प्रमोशन रोका है और वे इसी वजह से इस्तीफा दे रही हैं.
उन्होंने बाकायदा इसका जिक्र विवि को भेजे गये इस्तीफा पत्र में भी किया. वहीं स्वयं भी मीडिया में बयान देते हुए कहा कि योग्य होने के बाद भी जाति की वजह से उन्हें डिमोट कर दिया गया. यह सही नहीं है. बहरहाल वजह चाहे जो भी हो, लेकिन इस पर राजनीति भी शुरू हो गयी है. छात्र नेताओं के बयान भी आने शुरू हो गये हैं. छात्र संघ के पूर्व उपाध्यक्ष अंशुमान ने इसका विरोध किया है.
क्या कहते हैं अधिकारी
जब सेलेक्शन कमेटी ही किसी को रिकमेंड न करे तो सिर्फ अकेले कुलपति कैसे व्यक्तिगत निर्णय ले सकते हैं. विवि पर इस तरह का आरोप शोभनीय नहीं है, वह भी तब जब विवि प्रशासन हर काम पूरी पारदर्शिता से कर रहा है. विवि इसमें फूंक-फूंक कर निर्णय कर रहा है और नियमों को ध्यान में रखकर ही नोटिफिकेशन निकाला गया है.
प्रो एनके झा,
स्टूडेंट्स वेलफेयर डीन, पीयू
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