बिहार-उत्तराखंड के इलाके को अपना बता रहा नेपाल, नक्शे पर दिखाई भारत की जमीन

India Nepal Land Dispute | Social Media
India Nepal Land Dispute: नेपाल ने नये नोट से भारत की टेंशन बढ़ गई है. दरअसल, शुक्रवार को नेपाल सरकार ने नये नोट जारी करने की घोषणा की है. सौ रुपये ने नये नोट में नेपाल सरकार एक नक्शा भी अंकित कर रही है. जिसमें लिपुलेख, लिंपियाधुरा और कालापानी को दर्शाया जाएगा.
India Nepal Land Dispute: नेपाल और भारत पड़ोसी देश हैं. भारत के साथ उसका मित्रवत संबंध भी है. लेकिन, बीते दिनों नेपाल सरकार की एक घोषणा के बाद दोनों देश के बीच थोड़ी तल्खियां आ गई है. दरअसल, शुक्रवार को नेपाल सरकार ने नये नोट जारी करने की घोषणा की है. सौ रुपये ने नये नोट में नेपाल सरकार एक नक्शा भी अंकित कर रही है. इस मानचित्र में नेपाल सरकार ने कुछ जगहों को भी शामिल कर लिया है. नेपाल कैबिनेट के फैसले के अनुसार नये नोट में एक मानचित्र होगा और उसमें स्थल सुस्ता, लिपुलेख, लिंपियाधुरा और कालापानी को दर्शाया जाएगा. पश्चिमी चंपारण का सुस्ता बिहार में पड़ने वाला स्थान हैं. जबकि, लिपुलेख, लिंपियाधुरा और कालापानी घाटी उत्तराखंड में है.

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नये नोट में दिखेगा लिपुलेख, लिंपियाधुरा और कालापानी
गौरतलब है कि नेपाल ने शुक्रवार को 100 रुपये के नए नोट छापने की घोषणा की है, जिसमें एक मानचित्र होगा और उसमें विवादित स्थल लिपुलेख, लिंपियाधुरा और कालापानी को दर्शाया जाएगा. बता दें, भारत पहले ही इन क्षेत्रों को कृत्रिम रूप से विस्तारित करार दे चुका है. इस मामले में सरकार की प्रवक्ता रेखा शर्मा ने कैबिनेट फैसले के बारे में जानकारी देते हुए मीडिया से बात की जिसमें उन्होंने कहा कि नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्पकमल दहल ‘प्रचंड’ की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद की बैठक में 100 रुपये के नोट में नेपाल का नया नक्शा छापने का फैसला किया गया है. नोट में छपने वाले मानचित्र में लिपुलेख, लिंपियाधुरा और कालापानी को दर्शाया जाएगा.
नहीं बदलेगा जमीनी हकीकत- भारत
इधर, नेपाल की ओर से प्रस्तावित नये नोट को लेकर भारत ने अपना रुख साफ कर दिया है. भारत के साथ विवादित क्षेत्रों की मानचित्र वाले नये नोट को लेकर विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर ने कहा है कि मैंने वह रिपोर्ट देखी है. हालांकि उन्होंने कहा कि मैंने इसे विस्तार से नहीं देखा है, लेकिन मुझे लगता है कि हमारी स्थिति बहुत स्पष्ट है. उन्होंने कहा कि नेपाल के साथ हम चर्चा कर रहे है. जयशंकर ने साफ कर दिया कि हमारे जमीनी हकीकत बदलने वाले नहीं हैं.
नेपाल ने किया था अपने मैप में शामिल
बता दें, साल 2020 को नेपाल अपने संविधान में संशोधन कर लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा को अपने देश के मैप में शामिल कर लिया था. हालांकि नेपाल की हरकत का भारत ने जोदार विरोध किया था. भारत ने उस समय इसे नेपाल की एकतरफा कार्यवाही बताया था. यह तीनों क्षेत्र रणनीतिक रूप से काफी अहम हैं. और तीनों भारत का हिस्सा है.
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लेखक के बारे में
By Pritish Sahay
12 वर्षों से टीवी पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सेवाएं दे रहा हूं. रांची विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग से पढ़ाई की है. राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय विषयों के साथ-साथ विज्ञान और ब्रह्मांड विषयों पर रुचि है. बीते छह वर्षों से प्रभात खबर.कॉम के लिए काम कर रहा हूं. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में काम करने के बाद डिजिटल जर्नलिज्म का अनुभव काफी अच्छा रहा है.
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