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टूट की आशंकाओं से ग्रसित बिहार कांग्रेस में भूचाल के आसार, राहुल का इंतजार

Updated at : 20 Sep 2017 7:13 AM (IST)
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टूट की आशंकाओं से ग्रसित बिहार कांग्रेस में भूचाल के आसार, राहुल का इंतजार

राजनीति : सीट बचाने को बेचैन हैं कांग्रेसी विधायक पटना : टूट की आशंकाओं से ग्रसित प्रदेश कांग्रेस में एक बार फिर भूचाल आने वाला है. इस बार पार्टी के विधायकों के साथ कुछ विधान पार्षद भी दल छोड़ने को तैयार हैं. बिहार विधानसभा में 27 विधायकों की हैसियत वाली कांग्रेस दो खेमों में बट […]

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राजनीति : सीट बचाने को बेचैन हैं कांग्रेसी विधायक

पटना : टूट की आशंकाओं से ग्रसित प्रदेश कांग्रेस में एक बार फिर भूचाल आने वाला है. इस बार पार्टी के विधायकों के साथ कुछ विधान पार्षद भी दल छोड़ने को तैयार हैं. बिहार विधानसभा में 27 विधायकों की हैसियत वाली कांग्रेस दो खेमों में बट चुकी है. चार विधान पार्षद भी विद्रोह के रास्ते पर हैं.

पार्टी के सवर्ण विधायकों को राजद के साथ बने रहने में अपने वोटों की चिंता सता रही है. अब सबकी नजर गुरुवार को दिल्ली पहुंच रहे कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के अगले कदम पर है. अमेरिका की यात्रा पर रवाना होने के पूर्व राहुल गांधी बिहार के विधायकों से अलग-अलग मुलाकात कर बगावत की टोह ले चुके हैं.

सूत्र बताते हैं कि प्रदेश कांग्रेस का एक खास गुट पार्टी से इतर अपनी राह तलाशने का मन बना चुका है. इस गुट में मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष डाॅ अशोक चौधरी के भी नाम लिए जा रहे हैं. उनके अलावा दो पूर्व मंत्री भी इस खेमे में शामिल हैं. कांग्रेस के मौजूदा विधायकों में अगड़ी जाति के 11 विधायक हैं.

सवर्ण विधायकों को अगले चुनाव में राजद के साथ जाने पर नुकसान होने का डर है. 2015 के विधानसभा चुनाव में महागठबंधन के पक्ष में ब्राह्मण मतदाताओं ने कांग्रेस का खुलकर साथ दिया था. इसी कारण मधुबनी में जहां भाजपा उम्मीदवार विनोद नारायण झा को कांग्रेस उम्मीदवार भावना झा से परास्त होना पड़ा था. वहीं, भाजपा की गढ़ माने जानी वाली भागलपुर, बक्सर, नरकटियागंज और किशनगंज जैसी शहर की सीट कांग्रेस ने छीन ली थी.

भागलपुर के विधायक अजीत शर्मा ने खुलकर राजद की खिलाफत की है. बेगूसराय जिले की विधायक अमिता भूषण, बक्सर के संजय तिवारी जैसे विधायक कांग्रेस के अपने दम पर चुनाव लड़ने की सलाह दे रहे हैं. कांग्रेस की संभावित टूट की गणित भी इसी फाॅर्मूले भी टिका है. कांग्रेस में यदि टूट होती है, तो विधायकी बरकरार रखने के लिए 27 में से 18 विधायकों का अलग होना जरूरी है.

लालू से संबंध तोड़े हाईकमान: रामचंद्र

विधान पार्षद रामचंद्र भारती ने लालू प्रसाद से संबंध तोड़ने की बात कही है. उन्होंने आरोप लगाया कि राजद की वजह से कांग्रेस कमजोर होगी. 2015 के विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार के चेहरा की वजह से 27 विधायक जीत कर आये. नीतीश कुमार ने पार्टी को 41 सीट दिलवायी.

लालू प्रसाद मात्र 15 सीट दे रहे थे. उन्होंने कहा कि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को संदेश देना चाह रहे हैं कि लालू से संबंध तोड़ें, अन्यथा पार्टी टूटेगी. उनकी मांग है कि लालू प्रसाद से अलग होने पर पार्टी हाईकमान विचार करे, तभी पार्टी मजबूत होगी. आनेवाले लोकसभा व विधानसभा चुनाव पार्टी अकेले दम पर लड़े. कांग्रेस नेताओं व कार्यकर्ताओं की इच्छा है कि राजद से कांग्रेस अलग हो. एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि वे कांग्रेसी हैं.

जदयू में जाने की बात को खारिज किया. उन्होंने कहा कि किसी दूसरे पार्टी की में जाने की बात नहीं है. वहीं दूसरी ओर, वरिष्ठ कांग्रेसी नेता प्रेमचंद मिश्रा ने कहा कि कांग्रेस में पार्टी किससे गठबंधन करे किससे नहीं करे, यह आलाकामान तय करेगा. कोई विधायक या विधान पार्षद यह कैसे तय कर सकता है. किसी भी नेता को नीतिगत निर्णय के मामले में पार्टी आलाकमान के समक्ष अपनी भावनाओं को रखना चाहिए.

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