दुधमुंहे बच्चे लेकर भटकती रहीं महिलाएं

Updated at : 03 Sep 2016 7:17 AM (IST)
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दुधमुंहे बच्चे लेकर भटकती रहीं महिलाएं

नाराजगी. राष्ट्रव्यापी हड़ताल के दौरान चरमरायी सदर अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था अस्पताल परिसर से लौटे मरीज हड़ताल के समर्थन में उतरे कई संगठन, हड़ताल को बताया राष्ट्रव्यापी व सफल नवादा कार्यालय : 10 सेंट्रल ट्रेड यूनियन सहित अन्य 40 ट्रेड फेडरेशनों के आह्वान पर शुक्रवार को बुलायी गयी हड़ताल में सदर अस्पताल के कर्मचारियों के […]

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नाराजगी. राष्ट्रव्यापी हड़ताल के दौरान चरमरायी सदर अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था
अस्पताल परिसर से लौटे मरीज
हड़ताल के समर्थन में उतरे कई संगठन, हड़ताल को बताया राष्ट्रव्यापी व सफल
नवादा कार्यालय : 10 सेंट्रल ट्रेड यूनियन सहित अन्य 40 ट्रेड फेडरेशनों के आह्वान पर शुक्रवार को बुलायी गयी हड़ताल में सदर अस्पताल के कर्मचारियों के शामिल होने से चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गयी.
अस्पताल में इमरजेंसी, प्रसव सहित बाह्य जैसे प्रमुख विभाग के कर्मचारियों के हड़ताल पर रहने से चिकित्सा व्यवस्था बेपटरी हो गयी. विभिन्न जगहों से आये मरीज वापस लौट गये. कई माताएं अपने दुधमुंहे बच्चों को सीने से लगाये धूप में इधर-उधर चक्कर लगा कर निजी क्लिनिकों में इलाज करवाने पहुंची. अस्पताल के बेड खाली दिखे. उन पर पड़नेवाली चादर भी बदली नहीं गयी थी. हालांकि अस्पताल प्रबंधन द्वारा आपातकालीन कक्ष में एएनएम व डॉक्टर आपात स्थिति में पहुंचने वाले मरीजों के इलाज में मुस्तैद दिखे.
विभिन्न मांगों को लेकर हड़ताल : बिहार चिकित्सा व जन स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के बैनर तले अस्पताल कर्मचारी शुक्रवार को हड़ताल पर रहे. सभी कर्मचारियों के लिए पेंशन, संविदा पर नियुक्त कर्मचारियों की नियमित वेतनमान पर बहाली, आशा, ममता को न्यूनतम मजदूरी, महिलाओं को 33%आरक्षण, सातवें वेतन आयोग की रिपोर्ट लागू करने, न्यूनतम वेतन 26 हजार करने सहित अन्य मांगों को लेकर कर्मचारी हड़ताल में शामिल हुए. इस अवसर पर जिला मंत्री नीरज कुमार, रामस्वरूप यादव, किशोरी प्रसाद सिंह, स्वर्णलता कुमारी, सीमा कुमारी, राजेश्वर प्रसाद, अशोक शर्मा, अनुग्रह नारायण सिंह सहित अन्य कर्मचारी हड़ताल में शामिल थे.
हड़ताल में कई संगठनों के कर्मचारी रहे शामिल : सरकार की जान विरोधी व मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ विभिन्न संगठनों ने शुक्रवार को एकजुट होकर राष्ट्रव्यापी हड़ताल को सफल बनाने का प्रयास किया. संगठनों ने जनपक्षी वैकल्पिक नीतियों को लागू कराने को लेकर सरकार के विरुद्ध मोरचा खोल रखा है.
नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चल रही केंद्र सरकार की लुभावने घोषणाओं पर हमला करते हुए कड़ा प्रहार किया गया. गरीबों के नाम पर बनी सरकार को कॉरपोरेट व विदेशी पूंजीपतियों के हाथों की कठपुतली बनने पर संगठनों ने आपत्ति जतायी है. सबका साथ व सबका विकास का नारा लेकर बनी सरकार ने लोगों की बहाली पर रोक लगा दिया. खाने-पीने की वस्तुओं पर बढ़ी महंगाई सहित किसानों के उत्पादों पर सही दाम नहीं मिलने का आरोप संगठनों ने सरकार पर लगाया हैं.
मोदी सरकार द्वारा रक्षा, रेल, बैंक, बीमा व पेंशन जैसे क्षेत्रों में 100% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की घोषणा करके देश को फिर से विदेशी ताकतों के हाथ में सौंपने की साजिश रची जा रही हैं. केंद्र सरकार पर धार्मिक, जातीय व सांस्कृतिक ध्रुवीकरण बढ़ा कर सामाजिक भेदभाव व असहिष्णुता बढ़ाने का संदेश इन संगठनों ने हड़ताल के माध्यम से दिया हैं. केंद्रीय ट्रेड यूनियनों व फेडरेशनों ने महंगाई पर रोक लगाने, रिक्त पदों पर नियमित नियुक्ति करने, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश पर रोक लगाने, लघु फैक्टरी बिल की वापसी, मजदूरी विधेयक, श्रम संहिता व औद्योगिक संबंध विधेयक, पुरानी भूमि अधिग्रहण बिल की वापसी, असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिए सार्वभौम सामाजिक सुरक्षा कानून जैसे 12 सूत्री मांगों को लेकर राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आयोजन किया गया था.
बिहार अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के बैनर तले प्रखंड सह अंचल, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के कर्मचारियों ने समाहरणालय के निकट रैन बसेरा में हड़ताल कर प्रदर्शन किया.
अशोक शर्मा की अध्यक्षता में कर्मचारियों ने नयी पेंशन नीति को समाप्त करने, अनुबंध पर बहाल कर्मियों को नियमित करने, स्वास्थ्य व शिक्षा सहित अन्य क्षेत्रों के निजीकरण पर रोक लगाने आदि को लेकर हड़ताल की. इसमें जिला मंत्री विवेकानंद शर्मा, मनीष नारायण झा, अवधेश कुमार, अरविंद कुमार, शैलेश कुमार, अजय कुमार सहित सैकड़ों कर्मचारी शामिल हुए. बिहार राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के गोपगुट द्वारा समाहरणालय गेट पर रामानंद सिंह की अध्यक्षता में हड़ताल का सफल आयोजन किया.
इनके द्वारा सिविल सर्जन द्वारा किये गये हाल के स्थानांतरण पर रोक लगाने, स्वास्थ्य प्रशिक्षकों के कार्य निर्धारण पर आपत्ति जताते हुए हड़ताल का समर्थन किया गया. मौके पर सचिव हाजी मो सज्जाद खां, दिनेश प्रसाद यादव मो नकीबुल हक, उपेंद्र प्रसाद, सुचुन कुमार, ईश्वरी पासवान, मनोज कुमार सिन्हा ,सोनी कुमारी, सुलेखा तृप्ति, रिंकु कुमारी, संजू कुमारी आदि ने सहभागिता निभायी.
बिहार राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के सेवांजलि द्वारा बिहार बंद का समर्थन करते हुए हड़ताल को सफल बनाने के लिए धरना व प्रदर्शन किया गया. सेवांजलि ने सातवें वेतन आयोग को लागू नहीं किये जाने पर 15 सितंबर को राजधानी पटना में राज्य सरकार के खिलाफ एक दिवसीय महाधरना प्रदर्शन करने का निर्णय लिया हैं. धरने में जिला मंत्री अनिल भारद्वाज, अध्यक्ष गणेश प्रसाद, कामेश्वर रविदास, वाल्मीकि प्रसाद, उमेश प्रसाद, मीना देवी, वाल्मीकि सिंह आदि शामिल हुए.
उधर, ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियन (एक्टू) द्वारा आंबेडकर पार्क से जुलूस निकाल कर अस्पताल रोड, मेन रोड, विजय बाजार आदि मुख्य मार्गों से होते हुए शहर भर में मार्च किया गया. सरकार विरोधी नारे लगाकर लोगों ने अपना आक्रोश जताया. इसमें अखिल भारतीय खेत व ग्रामीण मजदूर सभा,रसोइया संघ, फुटपाथी दुकानदार संघ, इंजन रिक्शा संघ आदि जैसे जनसंगठनों ने भी सहभागिता निभायी. अनाज के बदले नकद योजना राशि बंद करने, समान शिक्षा नीति लागू करने, दलित अल्पसंख्यक सहित महिलाओं पर हो रहे उत्पीड़न को बंद करने आदि मांगों को लेकर प्रजातंत्र चौक को जाम करने का प्रयास किया. इससे ट्रैफिक व्यवस्था पर असर देखी गयी. मौके पर भाकपा(माले) के जिला सचिव काॅमरेड नरेंद्र प्रसाद सिंह, काॅमरेड भोला राम, एक्टू सचिव सावित्री देवी, संतान कुमार, अयोध्या तिवारी आदि उपस्थित थे.
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