फिर परंपरागत शिक्षा में निपुण होंगे बच्चे

Published at :25 Dec 2013 5:11 AM (IST)
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फिर परंपरागत शिक्षा में निपुण होंगे बच्चे

– सूरज कुमार – जिले के बुनियादी स्कूलों को सुदृढ़, पुनर्जीवित और विकसित करने की मिली स्वीकृति प्रदेश के 301 व जिले के 12 बुनियादी स्कूलों का होगा कायाकल्प नवादा : जिले के बुनियादी विद्यालयों के बच्चे अब निजी विद्यालय के बच्चों की तरह शिक्षा ग्रहण करेंगे. प्रदेश सरकार ने राज्य के कुल 391 बुनियादी […]

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– सूरज कुमार –

जिले के बुनियादी स्कूलों को सुदृढ़, पुनर्जीवित

और विकसित करने की मिली स्वीकृति

प्रदेश के 301 व जिले के 12 बुनियादी स्कूलों का होगा कायाकल्प

नवादा : जिले के बुनियादी विद्यालयों के बच्चे अब निजी विद्यालय के बच्चों की तरह शिक्षा ग्रहण करेंगे. प्रदेश सरकार ने राज्य के कुल 391 बुनियादी विद्यालयों के सुदृढ़ीकरण, पुनर्जीविकरण व विकसित करने पर स्वीकृति प्रदान कर दी है.

राज्यपाल के आदेश पर मिली स्वीकृति के बाद एक तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है. इस कमेटी का गठन 26 दिसंबर, 2011 को हुआ था.

समिति का प्रतिवेदन सितंबर 2012 में तैयार किया गया. तैयार प्रतिवेदन को राष्ट्रीय कार्यशाला में रखा गया था, जिस पर सभी ने सहमति दिखाई. बुनियादी विद्यालयों की राज्य स्तरीय सूची में जिले के 12 विद्यालय भी शामिल हैं.

इसमें हिसुआ के बगोदर व हदसा में, कौआकोल के बनौर व बाजितपुर में, नवादा सदर प्रखंड के केना सराय में, नरहट के कोनिबर में, नारदीगंज के नंदपुर, नारदीगंज, डोमावर कुझा व कोसला गांव में, अकबरपुर के गोपालपुर गांव में व वारिसलीगंज के दरियापुर गांव में बुनियादी विद्यालय संचालित है.

स्वावलंबन पर विशेष बल

बुनियादी स्कूलों की स्थापना गांधीवादी शिक्षा दर्शन के आधार पर किया गया था. इसके अतिरिक्त यहां पढ़ने वाले बच्चों को स्वावलंबन का समवाय पर विशेष बल था. यहां सात वर्ष से 14 वर्ष तक के बच्चों के लिए मस्तिष्क के साथ-साथ हाथ के उपयोग से भी शिक्षा दिये जाने का कोशिश होती थी. समाज उपयोगी व जीवन की शिक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल रहा है. बुनियादी विद्यालयों के बच्चों को पाठ्य पुस्तक के अलावा खेती करना, छोटे-छोटे औद्योगिक प्रशिक्षण, चरखा का उपयोग आदि का भी गठन किया गया था.

बंदी के कगार पर स्कूल

कालांतर में बुनियादी विद्यालय मृतप्राय होते गया व इसका विकास सही ढंग से नहीं हो सका. अधिकतर बुनियादी विद्यालयों के पास पर्याप्त भूमि है, जहां वर्तमान में प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्तर की शिक्षण व्यवस्था संचालित है. बता दें कि बुनियादी विद्यालय के लिए अलग से शिक्षक नियुक्ति नहीं हो रहे थे. इसलिए अधिकतर ऐसे विद्यालयों में शैक्षणिक कार्य बाधित होता रहा है.

विस्तार करने का निर्णय

गांधीवादी बुनियादी शिक्षा व्यवस्था व डॉ जाकीर हुसैन की कई तालिम को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से गहन विचार के बाद बुनियादी विद्यालयों के सुदृढ़ीकरण, पुनर्जीविकरण व विकसित करने के लिए राज्य स्तर पर विभिन्न बिंदुओं पर निर्णय लिया गया, जिसका रिपोर्ट सभी जिला शिक्षा विभाग को भेज दिया गया है.

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