मोरा तालाब ब्रांडेड कलस्टर के लिए 1.30 करोड़ स्वीकृत
Updated at : 07 Mar 2017 3:51 AM (IST)
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ब्रांडेड जूते-चप्पलें, 55 एकड़ में बनेगा कलस्टर बाजारों में सहज रूप से उपलब्ध होंगी चप्पलें बिहारशरीफ : जिले में उद्योग को बढ़ावा दिया जायेगा. युवक स्वाबलंबी बनें इसके लिए रोजगार मुहैया कराये जाने की योजना है. इस कार्य को मूर्तरुप देने के लिए ठोस कदम उठाये जा रहे हैं. सरकार ने जिले में उद्योग को […]
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ब्रांडेड जूते-चप्पलें, 55 एकड़ में बनेगा कलस्टर
बाजारों में सहज रूप से उपलब्ध होंगी चप्पलें
बिहारशरीफ : जिले में उद्योग को बढ़ावा दिया जायेगा. युवक स्वाबलंबी बनें इसके लिए रोजगार मुहैया कराये जाने की योजना है. इस कार्य को मूर्तरुप देने के लिए ठोस कदम उठाये जा रहे हैं. सरकार ने जिले में उद्योग को बढ़ावा देने के लिए जिला मुख्यालय से सटे मोरा तालाब में कलस्टर उद्योग को स्थापित करने पर अपनी मुहर लगा दी है.
अब मोरा तालाब में कलस्टर बनने का मार्ग एक तरह से प्रशस्त हो गया है.
बिहार एवं विभिन्न प्रदेशों में बहुत पहले से मोरा तालाब निर्मित जूते व चप्पलों की एक अलग पहचान रही है.इस उद्योग के लिए सरकार ने एक करोड़ 30 लाख राशि स्वीकृत की है.जिले में इस निर्माण के लिए पहले से अपनी एक अलग पहचान कायम करने वाले मोरा तालाब में शीघ्र ही करोड़ों रुपये की लागत से शू कलस्टर उद्योग स्थापित होंगे. इसके लिए सरकार ने उक्त राशि की स्वीकृति दे दी है.स्वीकृत राशि में 25 लाख 84 हजार रुपये विद्युत स्थापित एवं भवन जीर्णोद्धार व मरम्मत पर खर्च होंगे.
शेष राशि एक करोड़ 54 लाख रुपये मोरा तालाब फूट वेयर औद्योगिक स्वावलंबी सहकारी समिति लिमिटेड को कलस्टर में प्लांट मशीन की अधिष्ठापन के लिए तीन किस्तों में निर्गत किये जायेंगे. प्रथम किस्त की राशि के भुगतान के पहले सहकारी समिति के सभी सदस्यों को एफडीडीआई बिहटा पादुका मशीन निर्माण के लिए प्रशिक्षण लेना जरूरी है.इस कलस्टर उद्योग में प्रशिक्षित कुशल कारीगरों द्वारा
अत्याधुनिक मशीनों के द्वारा जूते -चप्पलों का निर्माण होगा. साथ ही चर्म सामग्री ब्रांडेड कर देश के बाजारों में उपलब्ध कराये जायेंगे. यहां के निर्मित चर्म सामग्रियों की होगी अलग पहचान. जूते -चप्पलों के निर्माण में यह कलस्टर एक अग्रणी भूमिका अदा करेगी. इस प्रतिस्पर्धा युग में बड़े -बड़े चर्म उद्योग कंपनियों में एक अलग पहचान कायम करेगी. कलस्टर में 55 इकाई होंगी.
जिला उद्योग विभाग के महाप्रबंधक शत्रुघ्न प्रसाद सिन्हा ने बताया कि इस कलस्टर उद्योग में अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लिए पायलट प्रोजेक्ट के रूप में कलस्टर को लिया गया है. इसमें करीब हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा. वे स्वावलंबी बन सकेंगे.
इस कारखाने की सूबे में एक अपनी अलग पहचान होगी.
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