शहर में बिना लाइसेंस के तेजाब की हो रही बिक्री

Updated at : 04 Jul 2016 12:36 AM (IST)
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शहर में बिना लाइसेंस के तेजाब की हो रही बिक्री

दर्जनों बैटरी की दुकानें तथा लैट्रिन क्लीनर में होता है इस्तेमाल पटना से चोरी-छिपे मंगाया जाता है तेजाब बिहारशरीफ : जिले में तेजाब (एसिड) से जुड़े कई उद्योग बड़े पैमाने पर फल-फूल रहा है. हालांकि तेजाब एक घातक रसायन है तथा बिना लाइसेंस के इसकी खरीद-बिक्री पूर्ण रूप से प्रतिबंधित है. इसके बावजूद जिले में […]

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दर्जनों बैटरी की दुकानें तथा लैट्रिन क्लीनर में होता है इस्तेमाल

पटना से चोरी-छिपे मंगाया जाता है तेजाब
बिहारशरीफ : जिले में तेजाब (एसिड) से जुड़े कई उद्योग बड़े पैमाने पर फल-फूल रहा है. हालांकि तेजाब एक घातक रसायन है तथा बिना लाइसेंस के इसकी खरीद-बिक्री पूर्ण रूप से प्रतिबंधित है. इसके बावजूद जिले में बिना लाइसेंस के ही कई उद्योगों में तेजाब का बड़े पैमाने पर धड़ल्ले से उपयोग किया जा रहा है. तेजाब का सर्वाधिक खपत बैटरी निर्माण तथा लैट्रिन क्लीनर के रूप में किया जा रहा है. इसके कारोबारी बेखौफ अपनी दुकानों पर तेजाब की खरीद-बिक्री सामान्य लोगों को नहीं करते हैं. सिर्फ दुकानदारों को ही यह तेजाब दिया जाता है.
तेजाब कारोबारियों का कहना है कि वे कम शक्ति के तेजाब की ही खरीद-बिक्री करते हैं. वर्तमान में 1840 नंबर के तेजाब पटना से चाेरी-छिपे मंगाये जाते हैं तथा इसे पानी मिला कर कम शक्ति में तोड़ दिया जाता है, जिसे बैटरी निर्माताओं तथा लैट्रिन क्लीनर निर्माताओं को प्लास्टिक के जार में 20 रुपये प्रति किलो की दर से बेच दिया जाता है. तेजाब कारोबारी बताते हैं कि सांद्र (गाढ़) तेजाब को पानी मिला कर तोड़ना एक खतरनाक काम है.
तेजाब में पानी उड़ेलने के पहले ही तेजाब छलक उठता है तथा इधर-उधर गिरने पर दुर्घटनाओं की आशंका रहती है. ऐसे में जानकार लोग ही तेजाब को सांद्र (गाढ़ा) से तनु (पतला) में बदलने का काम करते हैं. जिले में दर्जनों बैटरी निर्माण की दुकानें खुली हुई है, जहां बैटरी बनाने में बड़े पैमाने पर तेजाब का इस्तेमाल होता है. व्यवसायी इस धंधे में जहां मोटी कमायी कर रहे हैं. वहीं लाइसेंस के नाम पर अथवा सुरक्षा के मानकों के संबंध में उन्हें जानकारी तक नहीं है.
हाथ-पैर तथा कपड़े आदि जलने की छोटी-मोटी दुर्घटनाएं भी यदा-कदा होती है.जिले में तेजाब की बड़े पैमाने पर खपत लैट्रीन क्लीनर के निर्माण में भी किया जाता है. शहर के विभिन्न मोहल्लों में कई घरों में लैट्रीन क्लीनर निर्माण का धंधा किया जा रहा है. सान्द्र सल्फ्युरिक एसिड को पानी मिला कर साधारण क्लीनर तथा जामतोड़ क्लीनर के नाम से अलग-अलग लोकर ब्रांड नेम से बिक्री होती है.
तेजाब से जुड़े सारे धंधे चोरी-छिपे ही किये जाते हैं. लैट्रीन क्लीनर निर्माता स्वयं थैलों में तेजाब की शीशियां लेकर दुकान-दुकान घुम कर बेचते हैं.
कई दुकानदार निर्माता को फोन कर भी तेजाब मंगाते हैं. बड़ी ब्रांडेड कंपनियों के उत्पादों को मात देने वाले ये लोकल मोड क्लीनर सस्ते होने के कारण खूब बिकते हैं.
क्या कहते हैं अधिकारी :
”तेजाब बेचने के लिए मेरे विभाग से किसी व्यवसायी द्वारा लाइसेंस नहीं लिया गया है.”
– कौशल कुमार, नगर आयुक्त, बिहारशरीफ
क्या कहते हैं अधिकारी :
”यदि बिना लाइसेंस के तेजाब बेची जा रही है तो इसकी जांच कर न्याय संगत कार्रवाई की जायेगी.”
– सुधीर कुमार, सदर अनुमंडल पदाधिकारी, बिहारशरीफ
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