स्वास्थ्य बीमा योजना के संपूर्ण लाभ से दूर हैं बीपीएल परिवार

Updated at : 18 Jan 2016 4:23 AM (IST)
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स्वास्थ्य बीमा योजना के संपूर्ण लाभ से दूर हैं बीपीएल परिवार

इलाज को तरस रहे गरीब बिहारशरीफ : अगले माह राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना की एक साल की मियाद पूरी हो जायेगी. एक साल की अवधि पूरा होने के बावजूद इस महत्वाकांक्षी योजना का लाभ बीपीएल परिवार के लोगों को नहीं मिल पाया है. जैसे-तैसे अवधि पूरा होने का इंतजार किया जा रहा है. इस वित्तीय […]

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इलाज को तरस रहे गरीब

बिहारशरीफ : अगले माह राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना की एक साल की मियाद पूरी हो जायेगी. एक साल की अवधि पूरा होने के बावजूद इस महत्वाकांक्षी योजना का लाभ बीपीएल परिवार के लोगों को नहीं मिल पाया है. जैसे-तैसे अवधि पूरा होने का इंतजार किया जा रहा है. इस वित्तीय साल में योजना की शुरूआत ही बेहद खराब रही.
जिले में चार लाख बीपीएल परिवार हैं. इसके विपरित करीब एक लाख 95 हजार बीपीएल परिवार का स्मार्ट कार्ड बनाया गया है. योजना के तहत अब तक मात्र दस हजार बीपीएल परिवार को स्मार्ट कार्ड से इलाज कराने में सफलता मिली है. हाल तो यह है कि कार्ड में त्रुटि के कारण सैकड़ों मरीज कार्ड लेकर इलाज के लिए भटकते रहते हैं.
कार्ड में सुधार के लिए टहलाया जाना नीयति बन गया है. एक मार्च से अक्तूबर 2015 तक 8598 मरीजों का ऑपरेशन किया गया है. जिले के 30 क्लिनिकों द्वारा किये गये इलाज पर छह करोड़ 45 लाख का खर्च दिखाया गया है. इसके एवज में बीमा कंपनी द्वारा दो करोड़ 18 लाख रुपये का भुगतान किया जा चुका है. लोगों का कहना है कि योजना की मॉनिटरिंग बेहत तरीके से नहीं होने के कारण भी गरीबों को परेशानी होती है.
सरकारी अस्पतालों में कार्ड पर इलाज शून्य : अस्पतालों की संख्या बढ़ाने के लिए कंपनी द्वारा सरकारी अस्पतालों का भी चयन किया जाता है. लेकिन स्मार्ट कार्ड पर सरकारी अस्पतालों में इलाज नहीं के बराबर होती हैं. बीमा कंपनी द्वारा जारी किये गये प्रपत्र के अनुसार एक भी सरकारी अस्पतालों में इलाज किये गये मरीजों की संख्या को नहीं दरसाया गया है.
वर्ष 2012-13 में 12 करोड़ रुपये का भुगतान : राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत वर्ष 2012-13 में जिले के 37 अस्पतालों को इलाज के लिए अनुबंधित किया गया था. उक्त क्लीनिकों द्वारा 21 हजार 199 मरीजों का ऑपरेशन व इलाज किया गया था. इलाज के बदले बीमा कंपनी द्वारा चिकित्सकों को 12 करोड़ 99 लाख 78 हजार 754 रुपये का भुगतान किया गया था.
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