शिवरात्रि आज, निकलेगी बाबा भोले की बरात

Updated at : 21 Feb 2020 6:13 AM (IST)
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शिवरात्रि आज, निकलेगी बाबा भोले की बरात

मुंगेर : महाशिवरात्रि पर्व को लेकर शहर से लेकर गांव तक शिवालयों को आकर्षक ढंग से सजाया-संवारा गया है. शुक्रवार को विभिन्न पूजा समितियों द्वारा बाबा भोलेनाथ की बारात निकाली जायेगी और रात में शुभ-लग्न मुहूर्तू के दौरान महादेव तथा माता पार्वती के विवाह समारोह का आयोजन किया जायेगा. इसे लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह […]

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मुंगेर : महाशिवरात्रि पर्व को लेकर शहर से लेकर गांव तक शिवालयों को आकर्षक ढंग से सजाया-संवारा गया है. शुक्रवार को विभिन्न पूजा समितियों द्वारा बाबा भोलेनाथ की बारात निकाली जायेगी और रात में शुभ-लग्न मुहूर्तू के दौरान महादेव तथा माता पार्वती के विवाह समारोह का आयोजन किया जायेगा.

इसे लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह है. वैसे भी इस बार महाशिवरात्रि पर दुर्लभ संयोग बन रहा है, क्योंकि इस साल न तो तिथियों को लेकर कोई उलझन है और न ही पूजा के समय को लेकर विवाद. कई ग्रह भी शुभ स्थिति में हैं. साथ ही सर्वार्थ सिद्धि योग भी इस दिन उपस्थित हो रहा है.
सज-धज कर शिवालय तैयार: शुक्रवार को महाशिवरात्रि का त्योहार पड़ने के कारण इस बार श्रद्धालुओं में काफी उत्साह का माहौल है. शहर से लेकर गांव तक सभी शिवालयों के रंग-रोगन, साफ-सफाई, सजावट व डेकोरेशन का काम पूरा कर लिया गया है. अब सभी को इंतजार है उस शुभ घड़ी का, जिस घड़ी में भगवान भोलनाथ की भव्य बारात निकलेगी और चारों ओर देवलोक सा नजारा उत्पन्न हो जायेगा. कई जगहों पर झांकी की तैयारी को लेकर प्रतिमा तथा अन्य तैयारियां की जा रही है, जो अंतिम चरण में है.
शहर के गोयनका शिवालय, दुमंठा घाट स्थित शिवालय, बाबा मनकेश्वर नाथ महादेव, लाल दरबाजा, शिव गरु धाम, शिवगंज, नौवागढ़ी, चड़ौन, गढ़ीरामपुर, बोचाही, कलारामपुर सहित अन्य जगहों पर स्थापित शिवालयों में तैयारी पूरी कर ली गयी है.
शिवरात्रि व्रत की पूजा-विधि: मिट्टी के लोटे में पानी या दूध भरकर, ऊपर से बेलपत्र, आक-धतूरे के फूल, चावल आदि डालकर ‘शिवलिंग’ पर चढ़ाना चाहिए. अगर आस-पास कोई शिव मंदिर नहीं है तो घर में ही मिट्टी का शिवलिंग बनाकर उनका पूजन किया जाना चाहिए. शिव पुराण का पाठ और महामृत्युंजय मंत्र या शिव के पंचाक्षर मंत्र ॐ नमः शिवाय का जाप इस दिन करना चाहिए.
साथ ही महाशिवरात्री के दिन रात्रि जागरण का भी विधान है. शास्त्रीय विधि-विधान के अनुसार शिवरात्रि का पूजन ‘निशीथ काल’ में करना सर्वश्रेष्ठ रहता है. हालांकि भक्त रात्रि के चारों प्रहरों में से अपनी सुविधानुसार यह पूजन कर सकते हैं. शिवरात्रि को लेकर गुरुवार को बाजार में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी. श्रद्धालुओं ने प्रसाद की खरीदारी की.
ज्योतिष के दृष्टिकोण से शिवरात्रि पर्व: चतुर्दशी तिथि के स्वामी भगवान भोलेनाथ अर्थात स्वयं शिव ही हैं, इसलिए प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मासिक शिवरात्रि के तौर पर मनाया जाता है. ज्योतिष शास्त्रों में इस तिथि को अत्यंत शुभ बताया गया है. गणित ज्योतिष के आंकलन के हिसाब से महाशिवरात्रि के समय सूर्य उत्तरायण हो चुके होते हैं और ऋतु-परिवर्तन भी चल रहा होता है.
ज्योतिष के अनुसार चतुर्दशी तिथि को चंद्रमा अपनी कमजोर स्थिति में आ जाते हैं. चन्द्रमा को शिव जी ने मस्तक पर धारण किया हुआ है. अतः शिवजी के पूजन से व्यक्ति का चंद्र सबल होता है, जो मन का कारक है. दूसरे शब्दों में कहें तो शिव की आराधना इच्छा-शक्ति को मजबूत करती है और अन्तःकरण में अदम्य साहस व दृढ़ता का संचार करती है.
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