प्रधानमंत्री मातृत्व शिशु सुरक्षा योजना की खुली पोल, प्रसव के दौरान सदर अस्पताल में जच्चा-बच्चा की मौत

Updated at : 29 Jun 2019 7:39 PM (IST)
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प्रधानमंत्री मातृत्व शिशु सुरक्षा योजना की खुली पोल, प्रसव के दौरान सदर अस्पताल में जच्चा-बच्चा की मौत

मुंगेर : बिहार के मुंगेर में गर्भवती महिलाओं के लिए सरकार ने एक नयी स्वास्थ्य योजना प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) शुरू की गयी है. इस योजना की मदद से मातृ व शिशु मृत्यु दर को कम किया जा सकता है. लेकिन, मुंगेर जिले में सरकार की योजना की बदहाली है कि एक गर्भवती महिला […]

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मुंगेर : बिहार के मुंगेर में गर्भवती महिलाओं के लिए सरकार ने एक नयी स्वास्थ्य योजना प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) शुरू की गयी है. इस योजना की मदद से मातृ व शिशु मृत्यु दर को कम किया जा सकता है. लेकिन, मुंगेर जिले में सरकार की योजना की बदहाली है कि एक गर्भवती महिला का एक बार भी प्रसव पूर्व जांच नहीं करवाया गया और प्रसव के दौरान शनिवार की सुबह सदर अस्पताल में गर्भवती महिला की मौत हो गयी और उसके गर्भ में पल रहे बच्चे की भी मौत हो गयी.

गर्भावस्था के दौरान एक बार भी नहीं किया गया स्वास्थ्य जांच
धरहरा निवासी गौतम राम की पत्नी अनिता देवी को परिजनों ने शुक्रवार की सुबह 11:45 बजे सदर अस्पताल स्थित प्रसव केंद्र में भरती कराया गया. वह प्रसव पीड़ा से काफी परेशान थी. ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सक डॉ मंजुला रानी मंडल ने परिजनों से अनिता के प्रसव पूर्व जांच का रिपोर्ट मांगा तो परिजनों ने कहा कि अनिता का एक बार भी प्रसव पूर्व जांच हुआ ही नहीं है. जिसके बाद सदर अस्पताल में ही अनिता का सारा जांच कराया गया. जांचोपरांत अनिता के खून में सिर्फ 5 ग्राम ही हिमोग्लोबिन पाया गया.

जिसके बाद चिकित्सक ने परिजनों को अविलंब खून की व्यवस्था करने को कहा. अनिता को रक्त रक्त चढ़ाये जाने के बाद भी जब हालत में सुधार नहीं पाया गया तो चिकित्सक ने एसे भागलपुर रेफर कर दिया. किंतु भागलपुर ले जाने से पूर्व ही शनिवार की सुबह 9 बजे अनिता की मौत हो गयी और इस तरह से एक बार फिर सदर अस्पताल में जच्चा-बच्चा के मौत से यहां के स्वास्थ्य स्वास्थ्य सेवा पर सवाल उठने लगा है.

नौ महीने स्वास्थ्य सेवा से दूर रही अनिता

प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान योजना के तहत, सभी सरकारी अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्र में हर महीने की 9 तारीख को सभी गर्भवती महिलाओं की निशुल्क चिकित्सा जांच किये जाने का प्रावधान है. किंतु दुर्भाग्य है कि अनिता का पिछले नौ महीने में प्रसव के दौरान एक बार भी स्वास्थ्य जांच नहीं किया गया. जिसके कारण अनिता या उसके परिजनों को इस बात की पहले से जानकारी नहीं मिल पायी कि उसका हिमोग्लोबिन कम है और अंतत: अनिता सिवियर एनिमिया की मरीज बन गयी. इस घटना से ऐसा प्रतीत होता है कि न तो उस क्षेत्र की आंगनबाड़ी सेविका ने अनिता के प्रति संवेदनशीलता दिखायी और न ही उस क्षेत्र की आशा कार्यकर्ता ने. यदि आंगनबाड़ी सेविका तथा आशा कार्यकर्ता द्वारा इस मामले में संवेदनशीलता दिखायी गयी होती तो शायद अनिता की इस तरह से मौत नहीं होती.

कहते हैं सिविल सर्जन
सिविल सर्जन डॉ पुरुषोत्तम कुमार ने कहा कि महिला सिवियर एनेमिक थी. उसे बचाने का काफी प्रयास किया गया. परिजनों द्वारा महिला का एक भी प्रसव पूर्व जांच नहीं कराया गया था. जिसके कारण एनेमिक रहने के बावजूद परिजन महिला के प्रति अनभिज्ञ बने रहे. पहले से ध्यान दिया जाता तो महिला को बचाया जा सकता था.

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