कभी भी ध्वस्त हो सकता है किले के मुख्य द्वार का पुल

Updated at : 07 Aug 2018 6:10 AM (IST)
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कभी भी ध्वस्त हो सकता है किले के मुख्य द्वार का पुल

मुंगेर : वैसे तो मुंगेर में कई ऐतिहासिक धरोहर हैं, किंतु उन सबों में मुंगेर किला की एक अलग पहचान है. इस ऐतिहासिक किला की तस्वीर मात्र देख लेने के बाद मुंगेर का नाम खुद-ब-खुद जेहन में आ जाता है. किंतु द्वापरयुग में बना यह किला कलयुग में अपनी जर्जरता पर आंसू बहा रहा है. […]

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मुंगेर : वैसे तो मुंगेर में कई ऐतिहासिक धरोहर हैं, किंतु उन सबों में मुंगेर किला की एक अलग पहचान है. इस ऐतिहासिक किला की तस्वीर मात्र देख लेने के बाद मुंगेर का नाम खुद-ब-खुद जेहन में आ जाता है. किंतु द्वापरयुग में बना यह किला कलयुग में अपनी जर्जरता पर आंसू बहा रहा है. जिस किला के मुख्य द्वार से होकर प्रतिदिन अधिकारियों के वाहनों का काफिला गुजरता है, उसी मुख्य द्वार का पुल अब इतना जर्जर हो चुका है कि यह कभी भी ध्वस्त हो सकता है. ऐसे में इस ऐतिहासिक धरोहर को अधिक दिनों तक नजरअंदाज करना एक बड़ी भूल हो सकती है.

काफी जर्जर हो चुका है मुख्य द्वार का पुल: यूं तो किला के मुख्य द्वार की दीवारें भी काफी जर्जर हो चुकी है तथा किला की चहारदीवारी कई जगहों पर जीर्णशीर्ण हो चुकी है. किंतु अब किला के मुख्य द्वार का पुल भी इतना जर्जर हो चुका है कि यह कभी भी ध्वस्त हो सकती है. मालूम हो कि इस पुल में छड़ तथा कंक्रीट से बनने वाला कोई पिलर नहीं दिया गया है, बल्कि ईंट-पत्थर की मदद से बनाये गये पाया पर यह पुल बना हुआ है. यह पुल अब इतना पुराना हो चुका है कि इसके पाये में लगाये गये ईंट व पत्थर कई जगहों से झड़ कर गिर रहा है. पुल में कई जगहों पर मोटी-मोटी दरारें भी आ चुकी है,
जो लगातार पुल के जीर्णोद्धार का संकेत दे रहा है. समय रहते यदि इसका जीर्णोद्धार नहीं किया गया तो यह पुल अपने साथ-साथ किले के मुख्य द्वार को संकट में डाल सकता है.
किले के प्रति बरती जा रही उदासीनता: मुंगेर का किला यहां के ऐतिहासिक धरोहरों में से एक है. किंतु इसके जीर्णोद्धार के प्रति जिला प्रशासन वर्षों से उदासीनता बरत रही है. सही देखरेख नहीं होने के कारण किला की विशाल चहारदीवारी कई जगहों पर ध्वस्त हो चुकी है. वहीं साफ-सफाई नहीं होने के कारण किला के चारों ओर झाड़-जंगल की स्थिति उत्पन्न हो गयी है. वर्षों से किला के खाई की सफाई तक नहीं हुई है. जबकि किला के खाई में जहां मछली पालन तथा खाई के उपर औषधि पौधों की खेती हुआ करती थी. इस कार्य से जुड़ने के बाद किला मुसहरी के महादलित परिवारों की दशा भी बदलने लगी थी. किंतु प्रशासनिक उदासीनता के कारण अब किला के अस्तित्व पर ही संकट के बादल मंडराने लगे हैं.
जरासंध ने कराया था किला का निर्माण
मुंगेर का किला सचमुच में काफी पुरानी ऐतिहासिक धरोहर है. इस किला का निर्माण महाराज जरासंध ने द्वापरयुग में ही करवाया था. लंबे समय के बाद यह किला काफी जीर्णशीर्ण हो गया था. जिसके बाद मीर कासिम ने अपने शासनकाल में जीर्णशीर्ण पड़े इस किले का जीर्णोद्धार किया और इसे पहले से और भी आकर्षक बना दिया. जिसके बाद यह किला लंबे वक्त तक मुंगेर की शान बनी रही. किंतु वर्ष 1934 में आयी विनाशकारी भूकंप में किला का उपरी हिस्सा टूट कर गिर गया. जिसके बाद जिला प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए किला का जीर्णोद्धार किया और किला के सबसे उपरी छोड़ पर एक बड़ा घड़ी भी लगाया गया, जो पिछले तीन साल से बंद पड़ा हुआ है. ऐसे में लाजिमी है कि प्रशासनिक स्तर पर इस ऐतिहासिक किले का अविलंब जीर्णोद्धार किया जाये, ताकि आने वाली पीढ़ी भी द्वापर युग के इस धरोहर का दीदार कर सके.
कहते हैं राजद जिलाध्यक्ष
राजद के जिलाध्यक्ष प्रमोद कुमार यादव ने बताया कि मुंगेर किले के जीर्णोद्धार को लेकर प्रशासन उदासीन बना है, जिसके कारण इस ऐतिहासिक धरोहर के अस्तित्व पर संकट उत्पन्न हो गया है. इसके लिए जल्द ही कार्यकर्ताओं की एक आपात बैठक बुलाकर आंदोलन किया जायेगा.
कहते हैं जदयू जिलाध्यक्ष
जदयू के जिलाध्यक्ष संतोष सहनी ने कहा कि मुंगेर किले के जीर्णोद्धार के लिए जिला प्रशासन से अपील की जायेगी. साथ ही राज्य के पर्यटन मंत्री से मिल कर उन्हें किले की जर्जरता से अवगत कराया जायेगा.
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