सदर अस्पताल में आइसीयू का मतलब इसीजी!

Published at :29 May 2018 4:36 AM (IST)
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सदर अस्पताल में आइसीयू का मतलब इसीजी!

मधुबनी : आइसीयू का मतलब इसीजी. सुनने में अटपटा लगे. पर इन दिनों सदर अस्पताल में स्थित आइसीयू का मतलब यही रह गया है. इंटेसिव केयर यूनिट की सार्थकता ही यहां समाप्त हो गयी है. सदर अस्पताल के आईसीयू में मात्र इसीजी ही होता है. इसीजी के अलावे कुछ नहीं जिस कारण सदर अस्पताल में […]

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मधुबनी : आइसीयू का मतलब इसीजी. सुनने में अटपटा लगे. पर इन दिनों सदर अस्पताल में स्थित आइसीयू का मतलब यही रह गया है. इंटेसिव केयर यूनिट की सार्थकता ही यहां समाप्त हो गयी है. सदर अस्पताल के आईसीयू में मात्र इसीजी ही होता है. इसीजी के अलावे कुछ नहीं

जिस कारण सदर अस्पताल में आने वाले गंभीर मरीज का इलाज यहां नहीं हो पाता है, तत्काल मरीजों को दरभंगा या अन्य जगह पर रेफर कर दिया जाता है. गंभीर मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा देने के उद्देश्य से सदर अस्पताल में सघन चिकित्सा इकाई वर्ष 2009 में शुरू किया गया था. लेकिन यह यूनिट महज दो वर्ष ही कार्यरत रहा. जिसके बाद यह बंद हो गया. अब इस यूनिट में केवल इसीजी होता है. ऐसे में यदि किसी गंभीर मरीज को आइसीयू की आवश्यकता पड़े तो उसे यहां से अन्य शहरों में ही यह सुविधा उपलब्ध हो सकेगा. ऐसे में स्वास्थ्य विभाग द्वारा सदर अस्पताल को सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में तब्दील करने की घोषणा की हकीकत यह आइसीयू बयां कर रहा है.
सुविधा युक्त था आइसीयू: सदर अस्पताल में वर्ष 2009 में आइसीयू की स्थापना हुई. छ शैय्या वाले आइसीयू में काडियेट मॉनीटर, पेस मेकर, इसीजी सहित सभी उपकरण लगाया गया था. जिसमें 15 से 20 लाख रुपया खर्च किया गया था. आइसीयू पूर्ण वातानुकूलित था. इस संबंध में अस्पताल द्वारा बतलाया गया कि आइसीयू लगभग दो वर्ष कार्यरत रहा. जबकि सूत्रों की मानें तो उस दो वर्ष में भी आइसीयू का संचालन नहीं हो सका. मामला चाहे जो भी हो लाखों रुपये की लागत से उपकरणों से सुसज्जित आइसीयू आज केवल शोभा की वस्तु बन कर रह गया है. जिसमें विगत 6-7 वर्षों से केवल इसीजी का ही कार्य किया जाता है. जबकि सभी कीमती उपकरण रख- रखाव के अभाव में नष्ट होने के कगार पर है.
प्रबंधन को जानकारी नहीं : आइसीयू के संबंध में अस्पताल प्रबंधन को कोई जानकारी नहीं है. इस संबंध में डीएस डा. अजय नारायण प्रसाद बताते हैं कि मुझे बस इतनी जानकारी है कि आइसीयू दो वर्ष तक कार्यरत रहा. बताते चलें कि इस प्रकरण में हर कर्मी अपनी जिम्मेवारी को एक दूसरे पर थोपते रहे. किसी ने न तो बंद होने का कारण बताया न यह बता सके कि इसमें कितने मरीजों का इलाज हुआ या भविष्य में इस दिशा में पहल होने की क्या संभावना है.
सदर अस्पताल में वर्ष 2011 में खुला था आइसीयू
दो वर्ष चलने के बाद बंद हो गया था आइसीयू
गंभीर मरीजों का नहीं होता है यहां पर इलाज, भेज दिया जाता है दरभंगा
क्या कहते हैं अधिकारी
चिकित्सक व कर्मियों के अभाव में आइसीयू का संचालन बंद है. यह ठीक नहीं है. सरकार द्वारा सदर अस्पताल को अप ग्रेड करने की कवायद शुरू कर दी गयी है. जैसे ही इस अस्पताल में चिकित्सा कर्मियों की संख्या पूरी होगी, इसके बाद मरीजों को सदर अस्पताल में सभी आधुनिक सुविधा मरीजों के लिए उपलब्ध होगा.
डा. अमर नाथ झा, सीएस
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