पांच साल बाद फिर आया शुभ योग

Published at :12 Jan 2017 5:40 AM (IST)
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पांच साल बाद फिर आया शुभ योग

त्योहार . इस वर्ष शनिवार को सायंकाल में मनायी जायेगी मकरसंक्रांति इस बार भी मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी शनिवार को सायंकाल में मनाया जायेगा. पांच साल बाद मकर संक्रांति का ऐसा शुभ योग आया है. तिल और गुड़ की खुशबू से वातावरण हो रहा है सुगंधित गया के कारीगर मधेपुरा में बना रहे […]

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त्योहार . इस वर्ष शनिवार को सायंकाल में मनायी जायेगी मकरसंक्रांति

इस बार भी मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी शनिवार को सायंकाल में मनाया जायेगा. पांच साल बाद मकर संक्रांति का ऐसा शुभ योग आया है.
तिल और गुड़ की खुशबू से वातावरण हो रहा है सुगंधित
गया के कारीगर मधेपुरा में बना रहे हैं तिलकुट
मधेपुरा : मकर संक्रांति हिंदू धर्म का प्रमुख त्योहार है. यह पर्व पूरे भारत में किसी न किसी रूप में मनाया जाता है. पौष मास में जब सूर्य मकर राशि पर आता है, तब इस संक्रांति को मनाया जाता है. यह त्योहार अधिकतर जनवरी माह की चौदह तारीख को मनाया जाता है. ज्योतिषाचार्य कृष्णा पाठक ने बताया कि इस बार भी मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी शनिवार को सायंकाल में मनाया जायेगा. पांच साल बाद मकर संक्रांति का ऐसा शुभ योग आया है. हिंदू धर्म में मकर संक्रांति को बड़े हर्षोल्लास से मनाया जाता है. इस दिन भारत के विभिन्न हिस्सो में तिल के लड्डू बनाएं जाते तो कई जगह खिचड़ी खाई जाती है. लोग इस तिल और लाई का दान भी करते हैं. कहा जाता है कि जब सूर्य एक राशि से दूसरे राशि में प्रवेश करता है तो उसे संक्रांति कहते हैं. जिस राशि में सूर्य प्रवेश करता है उसे संक्रांति की संज्ञा मिलती है.
सामग्री कीमत
काला तिल 60से 80
उजला तिल 150 से 170
खोवा तिलकुट 240 से 300
गुड़ तिलकुल 200 से 250
चीनी तिलकुट 180 से 280
खस्ता तिलकुट 240 से 340
रेबड़ी 100 रूपये
मूल्य : रुपये/ प्रति किलो में
शहर में सज गया तिलकुट का बाजार
मधेपुरा शहर में तिलकुट का बाजार सज चुका है. भुने तिल और गुड़ की खुशबू से वातावरण सुगंधित है. रेवड़ी, गजक और विभिन्न तरह के तिलकुट की बिक्री उफान पर है. लोग अभी से ही इन तिलकुटों का आस्वादन कर रहे हैं. हालांकि इस वर्ष तिलकुट की कीमत पिछले साल से थोड़ा ही अधिक है. इसका कारण तिल और चीनी की कीमत है. वहीं सिंहेश्वर से यहां दुकान लेकर आये मुकेश साह कहते हैं कि विगत वर्ष तिल की कीमत 120 से 140 रूपये प्रतिकिलो थी.
वहीं इस वर्ष केवल 150 से 170 रूपये किलो है. जबकि चीनी की कीमत पिछले साल 34 रूपये किलो थी तो इस साल 44 रूपये के आस-पास है. इसका असर तिलकुट की कीमत पर भी पड़ा है. दुकानदारों ने बताया कि जिस तिलकुट की कीमत पिछले साल 240 रुपये किलो थी, इस वर्ष 300 रूपये किलो बिक रही है. खोया मिक्स तिलकुट पिछले वर्ष 300 रूपये किलो था लेकिन इस वर्ष 400 रूपये किलो तक उपलब्ध है. बाजार में इस वर्ष गुड़ तिलकुट 300 रूपये, गजक 350 रूपये तथा खोया मिक्स 350 से चार सौ तक उपलब्ध है.
पहले लोग तिलकुट के लिए बाहर के बाजार पर निर्भर थे. कोई पटना तो कोई गया से तिलकुट मंगाया करते थे. लेकिन अब मधेपुरा में ही तिलकुट की हर वेराइटी मौजूद है. गणपति तिलकुट भंडार के संचालक ने कि जब नौ वर्ष पहले उन्होंने यह काम शुरू किया था तो गुणवत्ता पहली चुनौती थी. इसके लिए उन्होंने गया के कारीगर से संपर्क किया. राजकिशोर साह भी विगत छह वर्ष से गया के कारीगरों से ही तिलकुट दुकान चलाते हैं.
मधेपुरा में दिनों दिन तिलकुट का बाजार बढ़ता जा रहा है. पांच साल पहले जहां एक – दो दुकानें ही थी वहीं इस वर्ष एक दर्जन से अधिक दुकानें हैं. खगडि़या के प्रेमसागर इस वर्ष पहली बार मधेपुरा पहंुचे हैं. उन्होंने बताया कि उन्हें पता चला कि मधेपुरा में तिलकुट की काफी बिक्री होती है. प्रेमसागर सामान्य दिनों में खेती और पढ़ाई करते हैं. इस एक महीने की कमाई से खेती के लिए उन्नत यंत्र खरीदने की सोच रहे हैं.
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