परेशानी. शहर के मिल रोड स्थित निजी नर्सिंग होम में चार घंटे इलाज नहीं

Published at :16 Nov 2016 1:49 AM (IST)
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परेशानी. शहर के मिल रोड स्थित निजी नर्सिंग होम में चार घंटे इलाज नहीं

पांच सौ व हजार रुपये के नोट बंद होने के कारण एक निजी नर्सिंग होम में चार घंटे तक महिला तड़पती रही. उसके पास मौजूद पांच सौ का नोट लेकर कंपाउंडर उसे नर्सिंग होम में भरती करने को तैयार नहीं था. बाद में दबाव पड़ने पर उसका इलाज शुरू किया गया. 500 का नोट लेकर […]

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पांच सौ व हजार रुपये के नोट बंद होने के कारण एक निजी नर्सिंग होम में चार घंटे तक महिला तड़पती रही. उसके पास मौजूद पांच सौ का नोट लेकर कंपाउंडर उसे नर्सिंग होम में भरती करने को तैयार नहीं था. बाद में दबाव पड़ने पर उसका इलाज शुरू किया गया.

500 का नोट लेकर तड़पती रही महिला
खगड़िया : शहर के मिल रोड स्थित एक निजी नर्सिंग होम में 500 का नोट रहने के कारण दर्द से तड़पती महिला का चार घंटे तक इलाज नहीं किया गया. पूरा मामला डॉ आरएन जैन (महिला चिकित्सक) के नर्सिंग होम से जुड़ा हुआ है. जहां पर मंगलवार की सुबह सात बजे इलाज के लिये पहुंची गोगरी प्रखंड के कन्हौली, बलतारा निवासी बबीता देवी इलाज के लिये पहुंची थी.
वह ब्लीडिंग सहित अन्य समस्या से ग्रसित थी. क्लिनिक पर पहुंचने के बाद मौके पर बैठे कंपाउंडर को फीस के रुपये जमा करने के लिए 500 रुपये के नोट देने पर कंपाउंडर ने उसे लेने से मना कर दिया. दर्द से तड़पती महिला के साथ पहुंचे परिजन द्वारा कंपाउंडर से दूसरा नोट नहीं रहने का हवाला देते हुए इलाज शुरू करने की विनती भी अनसूनी कर दी गयी. इस बीच महिला करीब चार घंटे तक तड़पती रही, लेकिन नर्सिंग होम के संचालकों का दिल नहीं पसीजा. बाद में सूचना मिलने पर पहुंचे युवा शक्ति के जिलाध्यक्ष चंदन सिंह के हस्तक्षेप के बाद महिला का इलाज शुरू हुआ.
युवा शक्ति के जिलाध्यक्ष ने इसे इंसानियत को शर्मसार करने वाली घटना करार देते हुए कहा कि नर्सिंग होम में पैसे के लिए मरीजों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ अगर नहीं रुका, तो जोरदार आंदोलन किया जायेगा. आखिर धरती के भगवान कहे जाने वाले डॉक्टर पैसों के लिए इंसानियत को शर्मसार करने से कब बाज आयेंगे. इधर, डॉ आरएन जैन ने कहा कि जानकारी मिलते ही महिला का इलाज किया गया. चिकित्सक ने कहा कि बेवजह छोटे से मामले को तूल दिया जा रहा है.
नोटबंदी के बाद 500 के नोट नहीं लिये गये, तो क्या गलत किया जा रहा है. लेकिन किसी मरीज का इलाज पैसे के कारण नहीं करने के आरोप सरासर झूठे हैं. बेवजह छोटी सी बात को तूल दिया जा रहा है. सारे आरोप बेबुनियाद हैं.
डॉ आरएन जैन, नर्सिंग होम के चिकित्सक.
मेरे पास 500 रुपये के नोट के अलावा मात्र 75 रुपये खुल्ला थे. इसके कारण डाॅ आरएन जैन के नर्सिंग होम के कंपाउंडर ने कहा कि इस नोट पर इलाज नहीं होगा. ऐसे में घंटों तड़पना पड़ा. बाद में स्थानीय लोगों के हस्तक्षेप के बाद इलाज किया गया.
बबीता देवी, कन्हौली, गोगरी.
सुबह सात बजे मिल रोड स्थित डॉ आरएन जैन के नर्सिंग होम में पहुंची महिला के पास 500 के नोट रहने के कारण इलाज नहीं किया गया. करीब चार घंटे तक महिला तड़पती रही लेकिन नर्सिंग होम के कर्मियों ने एक नहीं सुनी. बाद में स्थानीय लोगों के क्लिनिक पर पहुंचने के बाद इलाज शुरू किया गया. निजी नर्सिंग होम में पैसों के लिए जिंदगी के साथ खिलवाड़ की घटना अगर नहीं रुकी तो युवा शक्ति जोरदार आंदोलन करेगी.
चंदन सिंह, जिलाध्यक्ष, युवाशक्ति.
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