प्रभारी व एकाउंटेंट की मिलीभगत से हुआ गोलमाल

Published at :22 Aug 2016 5:07 AM (IST)
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प्रभारी व एकाउंटेंट की मिलीभगत से हुआ गोलमाल

खगड़िया : अलौली प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में बड़े पैमाने पर पकड़ी गयी वित्तीय अनियमितता में पूर्व पीएचसी प्रभारी व वर्तमान लेखपाल की भूमिका संदिग्ध माना जा रहा है. इधर, पूरे खेल के खुलासा बाद पीएचसी के लेखापाल सह बीएचएम से स्पष्टीकरण तलब करते हुए तीन दिनों के अंदर जवाब मांगा है. पूरी गड़बड़ी सिविल सर्जन […]

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खगड़िया : अलौली प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में बड़े पैमाने पर पकड़ी गयी वित्तीय अनियमितता में पूर्व पीएचसी प्रभारी व वर्तमान लेखपाल की भूमिका संदिग्ध माना जा रहा है. इधर, पूरे खेल के खुलासा बाद पीएचसी के लेखापाल सह बीएचएम से स्पष्टीकरण तलब करते हुए तीन दिनों के अंदर जवाब मांगा है. पूरी गड़बड़ी सिविल सर्जन द्वारा पीएचसी के निरीक्षण के दौरान पकड़ में आया. जिसमें राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन सहित स्वास्थ्य से जुड़े अन्य कार्यों के क्रियान्वयन में लाखों की हेराफेरी सामने आयी है. पूरा मामले में अलौली पीएचसी में तैनात एकाउंटेंट की संदिग्ध भूमिका है.

बताया जाता है कि अलौली पीएचसी में सरकारी राशि के बंदरबांट करने में कोई कोरकसर नहीं छोड़ी गयी है. चाहे जननी बाल सुरक्षा योजना में राशि वितरण में धांधली का मामला हो या फिर आशा कार्यकर्ताओं को विभिन्न मदों में मिलने वाले प्रोत्साहन राशि में गोलमाल का मामला हो. इतना ही नहीं रोगी कल्याण समिति द्वारा खर्च की गयी राशि का कोई हिसाब किताब पीएचसी में उपलब्ध नहीं है. वहीं रोकड़ पंजी में भी बड़े पैमाने पर हेराफेरी का खुलासा हुआ है. बताया जाता है कि पूर्व पीएचसी प्रभारी, लेखापाल सह बीएचएम आदि की मिलीभगत से कागज पर ही राशि खर्च दिखा कर गोलमाल किया गया.
सरकारी योजनाओं की राशि की जमकर बंदरबांट : अलौली प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में कागज पर सरकारी राशि का खर्च दिखाकर बड़े पैमाने पर बंदरबांट किया गया है. सिविल सर्जन के निरीक्षण के दौरान क्लोजिंग बैलेंस (एनएचएम ए/बी तथा अन्य) रोकड़ पंजी पर अंकित नहीं पाये जाने, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी के प्रभार हस्तांतरण में रोकड़ पंजी में बैंक रीकॉन्सिलेशन विवरणी अंकित नहीं रहने, चेक खोने पर आवेदन के आधार पर निर्गत डुप्लीकेट, रद्द आदि चेक संबंधी एवं अन्य का विधिवत संचिका संधारण नहीं करने, चेक आगत संबंधी लेखा अद्यतन नहीं पाये जाने जैसी गड़बड़ी का खुलासा हुआ है.
साथ ही लाभार्थी को दिये जाने वाले चेक पर ओभरराइटिंग की संभावना से बचने के लिये अंक पर सेलोटेप चिपकाने का अनिवार्य रूप से अनुपालन करने के निर्देश को ताक पर रख का काम करने का मामला सामने आया है. पीएचसी प्रभारी ने सीएस को बताया कि काफी दिनों से रोगी कल्याण समिति की बैठक पूर्व प्रभारी डॉ आरएन चौधरी द्वारा नहीं किया गया और ना ही रोकड़ पंजी प्रभार हस्तांतरण के समय प्रस्तुत किया गया. लेखापाल चेतन शर्मा से पूछताछ करने पर कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया और ना ही रोकड़ पंजी ही सिविल सर्जन के समक्ष प्रस्तुत किया गया.
ऐसे में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता की संभावना जताते हुए लेखापाल को तीन दिनों के अंदर जवाब तलब किया गया है. सिविल सर्जन डॉ अरुण कुमार सिंह ने भी माना है कि एनएचएम जैसे राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम के रोकड़ पंजी में मदवार अवशेष की जानकारी, बैंक रिकॉन्सिलेशन विवरणी अंकित नहीं होना काफी गंभीर मामला है. इसके अलावा रोगी कल्याण समिति की रोकड़ पंजी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी/सीएस के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया जाना वित्तीय अनियमितता की ओर इशारा करता है.
ड्यूटी से गायब स्वास्थ्यकर्मियों का वेतन बंद
बीते नौ अगस्त को सिविल सर्जन डॉ अरुण कुमार सिंह के निरीक्षण के दौरान लिपिक नीरज कुमार दो जून से लगातार अनुपस्थित पाये गये. लिपिक अवधेश कुमार की बीते पांच जुलाई को उपस्थिति दर्ज है. छह जुलाई के बाद उपस्थिति पंजी पर पत्रांक 653 दिनांक 05.07.2016 के द्वारा प्रभार हेतू विरमित अंकित किया हुआ पाया गया. इस संबंध में प्रभारी चिकित्सा प्रभारी डॉ संजीव कुमार से जवाब तलब करते हुए सीएस ने पूछा है कि लिपिक अवधेश कुमार को कब से विरमित किया गया है
तथा 9 अगस्त तक (एक माह से ज्यादा समय होने पर भी) प्रभार क्यों नहीं दिया गया? इसके अलावा सीमा देवी संविदा एएनएम बीते 6 से 9 अगस्त तक गायब रहने पर मानदेय रोकते हुए स्पष्टीकरण तलब किया है. साथ ही अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मेघौना फार्मासिस्ट प्रभु चन्द्र से कोल्ड चैन हैडलिंग का काम लिये जाने का भी खुलासा हुआ है. इसके अलावा एंबुलेंस ड्राइवर जय नारायण प्रसाद साह भी एक अगस्त से नौ अगस्त तक की उपस्थिति दर्ज नहीं थी. पूछने पर बताया गया कि भूलवश ऐसा हुआ है.
निरीक्षण के दौरान कई गड़बड़ी पकड़ी गयी है. पूरे मामले में लेखापाल ने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया और ना ही रोकड़ पंजी ही पेश किया गया. ऐसे में वित्तीय अनियमितता को देखते हुए अलौली पीएचसी के लेखापाल चेतन शर्मा सहित ड्यूटी से गायब स्वास्थ्यकर्मियों से स्पष्टीकरण तलब करते हुए तीन दिनों के अंदर जवाब मांगा गया है. साथ ही ड्यूटी के गायब कर्मचारी का वेतन रोकते हुए जवाब देने का निर्देश दिया गया है.
डॉ अरुण कुमार सिंह, सिविल सर्जन
अलौली प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में कहीं कोई गड़बड़ी नहीं हुई है. रोकड़पंजी से लेकर दूसरी गड़बड़ी के बारे में पूछे गये स्पष्टीकरण का जवाब समय पर दे दिया जायेगा.
चेतन शर्मा, लेखापाल.
मेरे कार्यकाल में कोई गड़बड़ी नहीं की गयी है. रोकड़पंजी सहित सरकारी फाइल में पकड़ी गयी गड़बड़ी से मेरा कोई लेना देना नहीं है. सारे आरोप बेबुनियाद हैं.
डॉ आरएन चौधरी, पूर्व पीएचसी प्रभारी.
सिविल सर्जन ने अलौली प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के निरीक्षण के दौरान बड़े पैमाने पर पकड़ी गड़बड़ी
रोगी कल्याण समिति का रोकड़ पंजी गायब, लाखों की हेराफेरी की जतायी जा रही आशंका
अलौली पीएचसी में प्रभार हस्तांतरण में रोकड़ पंजी में बैंक रीकॉन्सिलेशन विवरणी अंकित नहीं
चेक खोने के आवेदन के आधार पर निर्गत डुप्लीकेट/रद्द चेक संबंधी आदि की संचिका संधारित नहीं
लेखापाल से पूछताछ में सीएस को मिला टालमटोल वाला जवाब, रोकड़ पंजी भी नहीं की गयी प्रस्तुत
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