आवागमन संकटों से जूझ रहा कैंजरी

Published at :01 Jan 2016 10:02 PM (IST)
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आवागमन संकटों से जूझ रहा कैंजरी

आवागमन संकटों से जूझ रहा कैंजरीशुद्ध पेयजल, शिक्षा व चिकित्सा सुविधा से भी वंचित हैं लोगफोटो है 21 मेंकैप्सन- अधूरा पड़ा सड़क का निर्माण प्रतिनिधि, बेलदौरकैंजरी गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है. बात चाहे स्वास्थ्य, शुद्ध पेयजल, शिक्षा या फिर आवागमन की हो, ये सभी सुविधाएं यहां के लोगों के लिए सपना बनी […]

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आवागमन संकटों से जूझ रहा कैंजरीशुद्ध पेयजल, शिक्षा व चिकित्सा सुविधा से भी वंचित हैं लोगफोटो है 21 मेंकैप्सन- अधूरा पड़ा सड़क का निर्माण प्रतिनिधि, बेलदौरकैंजरी गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है. बात चाहे स्वास्थ्य, शुद्ध पेयजल, शिक्षा या फिर आवागमन की हो, ये सभी सुविधाएं यहां के लोगों के लिए सपना बनी हुई हैं. गांव की गलियों से गुजरती हुई पगडंडी कोसी नदी के समीप बनी जमींदारी बांध से जुड़ती है. यह मुख्य पथ तक पहुंचने के लिए एक मात्र संपर्क पथ है. सरकार व विभागीय अधिकारियों की अनदेखी के कारण बांध की जर्जर हालत बारिश में कीचड़ व सुखाड़ में धूल के कारण अपने अस्तित्व पर कई सवाल खड़े कर रही है. आवागमन का साधन पैदल, बैलगाड़ी या नाव ही है. उपेक्षाओ का दंश झेल रहे कैंजरी पंचायत से लोगों को मुख्य पथ के माली चौक एवं उसराहा चौक तक पहुंचने के लिए जर्जर बांध ही एक मात्र सहारा है. बारिश के दिनों में तो चार पहिया वाहन इस इलाके में जाने की सोचते तक नहीं. सुखाड़ के मौसम में भी गड्ढे भरे पथ पर वाहनों को ग्रामीणों के सहयोग से धक्का दे-दे कर गांव तक पहुंचाया जाता है. सबसे ज्यादा बदहाल स्थिति पंचायत के पश्चमी पार कैंजरी गांव की है. गांव की लगभग दस हजार की आबादी कोसी नदी से घिरे टापूनुमा स्थल पर पारंपरिक तरीके से समस्याओं के बीच जिंदगी काट रही है. यहां शिक्षा के नाम पर विद्यालय का भवन महज इसकी खानापूर्ति ही कर रहा है. बिजली की रोशनी तो ग्रामीणों के लिए भविष्य के दिवास्वप्न ही नजर आता है. कहते हैं मुखिया मुखिया जगदीश पंडित ने बताया कि पंचायत की विषम भौगोलिक स्थिति पंचायत को कई भागों में विभक्त करती है. सरकारी स्तर पर मूलभूत सुविधाओं के लिए कोई ठोस पहल नहीं की जा रही है. बावजूद पंचायत योजना के सीमित संसाधनों से आवागमन सुविधा के लिए पथ का निर्माण व पगडंडी का जिर्णोद्धार किया जा रहा है . कहते हैं ग्रामीण ग्रामीण सुभलेश कुमार, मधुसूदन यादव, सत्य नारायण यादव, कीकर यादव समेत दर्जनों लोगों ने बताया कि सरकार व जनप्रतिनिधियों की उपेक्षाओ के कारण गांव में अब तक न तो आवागमन की सुविधा है और न ही शिक्षा व चिकित्सा सुविधा. ग्रामीणों की बदहाल जिंदगी तो बस भगवान भरोसे जैसे-तैसे कट रही है.

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