12 हजार लाभुकों को नहीं मिली पीएम आवास योजना की स्वीकृति
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 08 Aug 2018 5:38 AM
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चार प्रखंडों के बीडीओ से डीडीसी ने पूछा स्पष्टीकरण 24 घंटे के अंदर बरती गयी लापरवाही को सुधारने का डीडीसी ने दिया आदेश खगड़िया : राज्य व जिलास्तर से पीएम आवास योजना में प्रगति लाने को लेकर भले ही दर्जनों बार आदेश जारी किये गये हों, लेकिन योजना की स्थिति यह बताने को काफी है […]
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चार प्रखंडों के बीडीओ से डीडीसी ने पूछा स्पष्टीकरण
24 घंटे के अंदर बरती गयी लापरवाही को सुधारने का डीडीसी ने दिया आदेश
खगड़िया : राज्य व जिलास्तर से पीएम आवास योजना में प्रगति लाने को लेकर भले ही दर्जनों बार आदेश जारी किये गये हों, लेकिन योजना की स्थिति यह बताने को काफी है कि इन आदेशों का प्रखंड के बाबुओं ने अनुपालन नहीं कराया है या फिर यह भी कहा जा सकता है कि वरीय अधिकारी के आदेश का इनपर पर कोई खास असर नहीं हुआ है. तभी तो योजना की प्रगति बदतर रह गयी. आंकड़े यह बयां कर रही है, कि पीएम आवास योजना की स्थिति बहुत ही खराब है. पीएम आवास योजना के लिए चयनित लाभुकों के रजिस्ट्रेशन से लेकर जियो टैगिंग, योजना की स्वीकृति, लाभुकों को भुगतान या फिर आवास का निर्माण.
हर फेज के प्रगति की स्थिति खराब है. समीक्षा के बाद हर बार इस महत्वपूर्ण योजना को लेकर वरीय पदाधिकारी के द्वारा अनेकों बार आदेश दिये गये हैं. लेकिन न तो योजना की स्थिति सुधरी और न इन आदेशों का प्रखण्ड/पंचायत के साहबों पर कोई खास असर हुआ. लापरवाही की बातें सामने आने के बाद डीडीसी राम निरंजन सिंह ने अलौली, बेलदौर, खगड़िया सहित परबत्ता प्रखंड के बीडीओ से स्पष्टीकरण पूछा है. साथ ही 24 घंटे के भीतर बरती गयी लापरवाही को सुधारने के भी आदेश दिये हैं. बताया जाता है कि प्रखण्डों में स्वीकृति व जियो टैगिंग की स्थिति संतोषजनक नहीं रहने के कारण डीडीसी ने बीडीओ से जवाब-तलब किया है. बताया जाता है कि 11 हजार से अधिक लाभुकों को प्रखण्ड स्तर योजना की स्वीकृति तक नहीं दी गयी है. जबकि करीब 10 हजार लाभुकों का जियो टैगिंग नहीं किया गया है.
लापरवाही का आलम यह है कि 1192 लाभुक ऐसे है जिन्हें जियो टैगिंग के बाद भी बीडीओ ने आवास योजना की स्वीकृति नहीं दी है. जिसे गंभीरता से लेते हुए डीडीसी ने चार बीडीओ से जवाब मांगा है.
भले ही चार बीडीओ से स्पष्टीकरण पूछा गया हो, लेकिन योजना में लापरवाही हर प्रखंड में बरती जा रही है. सूत्र बताते हैं कि लापरवाही का आलम यह कि प्रखंड के बाबू चयनित लाभुकों को समय पर प्रधानमंत्री आवास योजना की स्वीकृति तक नहीं दे पा रहे हैं. हालत यह कि करीब 43 प्रतिशत लाभुकों को अबतक योजना की स्वीकृति नहीं मिल पाई है. ऐसे में ये सवाल उठ रहे हैं कि इन्हें राशि कब मिलेगी और ये घर कब बनाएंगे. जानकारी के मुताबिक बार-बार आदेश के बाद भी शत-प्रतिशत लाभुकों का न तो रजिस्ट्रेशन हो पाया है और न जियो टैगिंग. गौरतलब है कि जिले में लाभुकों को मिलने वाले भुगतान के साथ-साथ आवास निर्माण की स्थिति भी खराब है. सैकड़ों लाभुक अधूरे मकान को पूर्ण कराने के लिए शेष बची राशि के लिए प्रखंड कार्यालय के चक्कर काट रहें हैं.
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