पानी उतरने पर भी मुसीबतें बरकरार

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सूरत-ए-हाल . एनएच किनारे शरण लिये बाढ़ पीड़ितों का है बुरा हाल एनएच किनारे शरण लिये बाढ़पीड़ित. कुरसेला : दियों का जलस्तर नीचे उतरने के बाद भी बाढ़ पीड़ितों को राहत नहीं मिल सका है. उंचे स्थानों पर आश्रय लिये बाढ़ पीड़ितों के लिए घर लौटना मुश्किल हो गया है. बाढ़ के बाद संक्रमण फैलने […]

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सूरत-ए-हाल . एनएच किनारे शरण लिये बाढ़ पीड़ितों का है बुरा हाल

एनएच किनारे शरण लिये बाढ़पीड़ित.
कुरसेला : दियों का जलस्तर नीचे उतरने के बाद भी बाढ़ पीड़ितों को राहत नहीं मिल सका है. उंचे स्थानों पर आश्रय लिये बाढ़ पीड़ितों के लिए घर लौटना मुश्किल हो गया है. बाढ़ के बाद संक्रमण फैलने का खतरा बना हुआ है. गंगा, कोसी के जलस्तर में पिछले चार दिनों से गिरावट आ रही है. केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, कोसी नदी कुरसेला का जलस्तर 31.59 मीटर से घटकर 31.10 मीटर पर आ गया है. नदी के पानी में पिछले चार दिनों में 49 सेंटीमीटर की गिरावट दर्ज की गयी है. शुक्रवार को जलस्तर में 20 सेमी की कमी आने की संभावना जतायी गयी है.
गुमटी टोला रिंग बांध से पानी प्रवाह की गति धीमी हो गयी है. इससे नये क्षेत्रों में पानी के फैलाव में कमी आयी है. गंगा नदी के जलस्तर में लगातार कमी आने की खबरें मिल रही हैं. संभावना है कि बाढ़ की स्थितियों में आगामी दो दिनों में सुधार आयेगा. निचले इलाके के भूभाग के गांव बाढ़ के पानी से अभी भी जलमग्न बने हुये हैं.
इन गांवों के संपर्क साधन टूटे हुये हैं. आपदा के आफत ने जीवन पर संकट कायम कर रखा है. बाढ़ से विस्थापित उंचे स्थानों पर शरण लिये पीड़ितों के समक्ष संकटपूर्ण कठिनाई बनी हुयी है. एनएच किनारे शरण लिये बाढ़ प्रभावितों को समुचित राहत सहायता नहीं मिल सकी है. इनके समक्ष भोजन पानी रोशनी अभाव से विषम कठिनाई बनी हुयी है.
राहत शिविर में अव्यवस्था से असंतोष : राहत शिविर से भोजन समय पर नहीं मिलने से पीड़ितों में असंतोष पाया गया है. बसूहार मजदिया गांव में बुधवार को राहत शिविर के बंद रहने की जानकारी मिली है. शिविर के कई स्थानों पर घटिया चावल खिलाये जाने की खबर दी गयी है.
महामारी का संकट : जलस्तर में गिरावट आने के साथ संक्रमित रोग प्रकोप के खतरे बढ़ गये है. पानी के बीच संडाध की बदबू फैल रही है. छोटी और सड़ी गली मछलियों के खाने से डायरिया आदि रोगों से संक्रमित होने का संभावना बढ़ा हुआ है. बाढ़ संकट के मुसीबतों के बाद नये खतरे की परिस्थितियां पैदा होने की आशंका बनी हुयी है.
सांप व बिच्छुओं से भय : बाढ़ की वजह से जहरीले सर्प बिच्छुओं का विचरण पीड़ितों में खौफ को बढ़ा रहा है. पानी प्रवाह और सूखे स्थानों पर कई जहरीले प्रजाति के सर्पों को देखा जा रहा है. जहरीले सर्पो की वजह से हर तरफ पीड़ितों में भय का आलम बना हुआ है. समझा जाता है कि दुसरे क्षेत्रों से सर्प पानी में बहकर आ गये हैं.
पशुचारा का अभाव : बाढ़ आपदा में पशु चारे की किल्लत बढ़ गयी है. भूभाग के जलमग्न होने से पशुओं के हरे चारा का साधन डुब कर नष्ट हो गया है. सुखा चारा के पानी में डुबनने से पशुओं के भोजन का आधार समाप्त हो गया है. पशुपालकों के सामने पशुओं का जीवन रक्षा कर पाना कठिन बना हुआ है.
धान व केला की फसल बरबाद : क्षेत्र के धोवनियां सोसबाहा बहियार में टूटे बांध का पानी प्रवेश करने से धान केला की फसले डुबकर नष्ट होने के कगार पर पहुंचता जा रहा है. प्रभावित किसानों में फसल डुबने को लेकर अफरा तफरी कायम थी. इस भूभाग में पानी का तेजी से फैलाव बना हुआ था. जिससे लाखो के फसल क्षति का अनुमान है.
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