सावधान! आंगनबाड़ी प्रशक्षिण के नाम पर ठगे जा सकते हैं आप

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सावधान! आंगनबाड़ी प्रशिक्षण के नाम पर ठगे जा सकते हैं आप कटिहार. समाज सेवा व अन्य सामाजिक गतिविधियों को बायलॉज में शामिल कर स्वयंसेवी संस्था निबंधन विभाग से पंजीकृत कराते हैं. निबंधन होने के बाद तथाकथित कुछ संस्थाएं तरह-तरह से धन कमाने का उपाय खोजने लगते हैं. इसी तरह की एक संस्था प्रयास शक्ति एजुकेशन […]

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सावधान! आंगनबाड़ी प्रशिक्षण के नाम पर ठगे जा सकते हैं आप कटिहार. समाज सेवा व अन्य सामाजिक गतिविधियों को बायलॉज में शामिल कर स्वयंसेवी संस्था निबंधन विभाग से पंजीकृत कराते हैं. निबंधन होने के बाद तथाकथित कुछ संस्थाएं तरह-तरह से धन कमाने का उपाय खोजने लगते हैं. इसी तरह की एक संस्था प्रयास शक्ति एजुकेशन सोसाइटी ने आंगनबाड़ी वर्कर, आंगनबाड़ी टीचर व आंगनबाड़ी सुपरवाइजर के लिए प्रशिक्षण देने की घोषणा किया है. शहर के विभिन्न स्थानों पर इसका फार्म धड़ल्ले से बिक रहा है. जबकि समाज कल्याण विभाग के समेकित बाल विकास सेवाएं (आइसीडीएस) द्वारा आंगनबाड़ी केंद्र का संचालन किया जाता है. सोसाइटी द्वारा चलाये जाने वाले उक्त पदों के प्रशिक्षण कार्यक्रम का आइसीडीएस से कोई संबंध नहीं है. सोसाइटी 14500 स्थान के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम की घोषणा की है. आवेदन करने वाले सामान्य व पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थी से 200 रुपया व अनुसूचित जाति-जनजाति के अभ्यर्थी से 150 रुपया का बैंक ड्रॉफ्ट अथवा पोस्टल ऑर्डर शुल्क के रूप में मांग की है. आवेदन का विवरणी व फार्म को देखने से यह प्रशिक्षण फर्जी प्रतीत होता है. शहर के एक बुद्धिजीवी ने गुरुवार को जनता दरबार में डीएम को एक आवेदन देकर इस प्रशिक्षण पर रोक लगाने की मांग की है. चार जिले के निकला है वेकेंसी सोसाइटी ने अपने वेबसाइट के माध्यम से पूर्णिया, कटिहार, अररिया, फारबिसगंज व किशनगंज जिले के लिये 14500 पद के लिए वेकेंसी निकला है. जिस तरह सरकारी विभाग द्वारा वेकेंसी निकलती है, उसी तरह सोसाइटी ने भी वेकेंसी निकाला है. बेरोजगार युवा वर्ग सोसाइटी के सब्जबाग में फंस रहे हैं. वेकेंसी के अनुसार आंगनबाड़ी वर्कर के लिए योग्यता आठवीं पास निर्धारित किया. जबकि आंगनबाड़ी टीचर व सुपरवाइजर के लिए क्रमश: मैट्रिक व स्नातक योग्यता निर्धारित किया है. प्रशिक्षण अवधि तीन महीने का है. प्रत्येक अभ्यर्थी से अलग-अलग आवेदन की मांग की है. आवेदन शुल्क भी निर्धारितसामान्य व पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थी के लिए आवेदन शुल्क 200 रुपया व एससी-एसटी अभ्यर्थी के लिए 150 रुपये शुल्क रखा गया है. आवेदन शुल्क डिमांड ड्राफ्ट अथवा पोस्टल ऑर्डर के जरिये मांग की गयी है. आवेदन करने की प्रक्रिया जिस तरह सोसाइटी के द्वारा बतायी गयी है, उससे साफ प्रतीत होता है कि बेरोजगार लोग जल्दी से जल्दी आवेदन कर दें. आवेदन पत्र गुमराह करने वालीनिर्धारित आवेदन प्रपत्र के साथ संलग्न विवरणी में कई बात अस्पष्ट है. मसलन, यह प्रशिक्षण कार्यक्रम सरकार के किस विभाग से जुड़ा है, उसका उल्लेख कहीं नहीं है. आवेदक पुरुष होगा या महिला, इसका भी जिक्र नहीं है. जबकि आइसीडीएस द्वारा संचालित आंगनबाड़ी केंद्र में सिर्फ महिलाओं को लिये जाने का प्रावधान है. वेकेंसी के विरुद्ध आने वाले आवेदन पर किस तरह चयन किया जायेगा, इसका भी कोई जिक्र नहीं है. इससे साफ जाहिर होता है कि लोगों को गुमराह कर पहले डीडी नाम राशि एकत्रित की जाय. फिर उसके बाद प्रशिक्षण देने के नाम पर अभ्यर्थी से राशि उगाही की जाय. डीएम से की रोक लगाने की मांगइस वेकेंसी व मांगी जा रही आवेदन को लेकर स्थानीय एक युवक गंगा सागर दीनबंधू ने जनता दरबार में जिला पदाधिकारी को एक आवेदन देकर उक्त प्रशिक्षण के नाम पर निकली वेकेंसी पर रोक लगाने की मांग की है. श्री दीनबंधू ने डीएम को दिये आवेदन में कहा है कि वह जब आवेदन प्रपत्र में दिये मोबाइल नंबर पर बात किया तो सोसाइटी के प्रतिनिधि ने बताया कि इस प्रशिक्षण से सरकारी नौकरी में लाभ मिलेगा या नहीं, उसकी जिम्मेदारी सोसाइटी की नहीं है. सोसाइटी आवेदन करने वालों को 6 हजार रुपया शुल्क लेकर प्रशिक्षण देगी. इस तरह की वेकेंसी से रहे सावधानदरअसल, समाजसेवा के नाम पर स्वयंसेवी संस्था विभिन्न माध्यमों से वेकेंसी निकाल कर राशि की उगाही करते रहे हैं. वेकेंसी को इस तरह प्रचारित किया जाता है कि लोग उसे सरकारी वेकेंसी समझे. कहते हैं डीपीओआइसीडीएस के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी अजीत कुमार मंडल ने इस संदर्भ में बताया कि यह पूरा मामला फर्जी है. किसी तरह की वेकेंसी या प्रशिक्षण आइसीडीएस के तहत नहीं हो रही है. सोसाइटी द्वारा लोगों को ठगने के लिए इस तरह का वेकेंसी निकाला जाता है.

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